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अमेरिका-चीन के मुकाबले समंदर में कितने ताकतवर हम?

Sat, 05 Dec 2015 06:56 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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नेवी डे के बाद अब ये भी जान लीजिए कि मौजूदा दौर में समंदर में हम कितने ताकतवर हैं। ये रहे दुनिया के 5 सबसे बड़े युद्धपोत।
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अमेरिका-चीन के मुकाबले समंदर में कितने ताकतवर हम?

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मौजूदा वक्त में समंदर में भी हमारी ताकत किसी से कम नहीं है। अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत का आईएनएस विक्रमादित्य दुनिया का चौथा सबसे बड़ा युद्धपोत है। भारत ने साल 2004 में इसे रूस से 2.35 बिलियन डॉलर यानी आज के करीब 1 खरब 56 अरब 62 करोड़ 38 लाख 57 हजार 500 रुपए में खरीदा था। इससे पहले ये सोवियत सेना में बाकू नाम से जाना जाता था। भारतीय जरूरतों के अनुसार रूस ने इसमें बदलाव भी किए। साल 2013 में भारतीय जल सेना के बेड़े में इसे शामिल कर लिया गया। इससे 36 लड़ाकू विमान उड़ान भर सकते हैं। इसके अलावा भारी मात्रा में असलहा-बारूद और मिसाइलें इसमें लोड की जा सकती हैं।

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1092 फीट लंबा अमेरिकी युद्धपोत निमित्ज दुनिया का सबसे बड़ा युद्धपोत है। ऐसे दस युद्धपोत अमेरिकी सेना में शामिल है। एक की कीमत 4.5 बिलियन डॉलर यानी करीब 2 खरब 99 अरब 91 करोड़ 80 लाख 25 हजार रुपए है। एक लाख टन वजनी ये सुपरकैरियर अमेरिकी सेना की ताकत तो हैं ही, इसके अलावा साल 2004 से 2010 के बीच इंडेनेशिया की सुनामी से लेकर हैती के विनाशकारी भूंकप तक पीड़ितों की मदद करने में इनका सराहनीय योगदान रहा है। निमित्ज से सबसे ज्यादा करीब 90 लड़ाकू विमान उड़ान भर सकते हैं। इसमें मिसाइलों को लोड किया जा सकता है।

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1001 फीट लंबा रूसी युद्धपोत एडमिरल कुजनेत्सोव क्लास दूसरा सबसे बड़ा युद्धपोत है। इसकी खासियत ये हैं कि ये अमेरिकी युद्धपोत से ज्यादा वजनी युद्धक साम्रगी ढोने मे सक्षम है। इनमें दर्जनों एंटीशिप मिसाइलें भी शामिल हैं। ये हैवी एयरक्राफ्ट कैरिंग क्रूजर है। रूस के पास ये अपनी तरह का इकलौता युद्धपोत है। इससे 30 लड़ाकू विमान और दर्जन भर हेलीकॉप्टर उड़ान भर सकते हैं।
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कभी रूसी सेना का हिस्सा रहा युद्धपोत आज चीन की जलसेना का हिस्सा है। मोडिफाइड एडमिरल कुजनेत्सोव क्लास युद्धपोत को चीन ने हालांकि यूक्रेन से खरीदा था। ये साल 2012 में लिआओनिंग के नाम से चीनी सेना में शामिल हुआ। 999 फीट लंबे इस युद्धपोत से एंटीशिप और सबमैरीन मिसाइलों और भारी मात्रा में युद्धक सामग्री को ढोया जा सकता है। इसके अलावा तीस लड़ाकू विमान इससे उड़ान भर सकते हैं। ये चीन का पहला युद्धपोत है। चीन अपने लड़ाके पायलटों को इस युद्धपोत पर ट्रेनिंग भी देता है। इसके बारे में ये भी कहा गया था कि इसे फ्लोटिंग कसीनो बनाया जाएगा।
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पांचवां सबसे बड़ा युद्धपोत ब्राजील का है। इसे मोडीफाइड कलेमेंसियू कहते हैं। भारी मात्रा में युद्धक सामग्री ढोने वाला ये युद्धपोत 869 फीट लंबा है। ब्राजील से पहले ये फ्रांस की सेना का हिस्सा रहा। ब्राजील ने इसका नाम साओ पाउलो रख लिया। इसमें कई बदलाव भी किए, जिनमें ज्यादातर बदलाव फ्रेंच कंपनियों ने ही किए हैं। साल 2005 और 2012 में दो बार इसको हादसे से गुजरना पड़ा जब इसमें आग लग गई। हादसों में इसके कई क्रू मेंबर मारे भी गए। इस युद्धपोत से 39 लड़ाकू विमान उड़ान भर सकते हैं।

सोर्स-द रिचेस्ट
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