साल 2009 में आसनसोल की एक सड़क पर अचानक दरार पड़ गई और जमीन धंसने लगी थी। तब इसकी चपेट में एक बस आ गई थी और हादसा हो गया था।(फाइल चित्र)
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धधक रहे हैं 140 गांवों के घर
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पश्चिम बंगाल में वर्धमान जिले के रानीगंज इलाके में सरकारी कोयला खानों में कई साल से आग धधक रही है।(सभी तस्वीरें: त्रिरंजन चटर्जी)
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कोयला निकालने के बाद खदानों को बालू और पानी से भरना जरूरी होता है। ऐसा न होने से मीथेन गैस भर जाती है। इनमें बालू न भरे जाने के वहां आग फैल गई।
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इलाके के कई गांव इसकी चपेट में हैं। पहले तो जमीन में दरार आती है, फिर काला धुआं दिखाई देता है और आग धधकने लगती है। अवैध खदान उद्योग को बल मिला और यूं ही छोड़ दी गई खदानें आग का घर बन गईं।
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खेत खलिहानों और घरों में भी दरारें हैं। ईस्टर्न कोलफ़ील्ड लिमिटेड की इन खदानों में आग लगने पर सरकार की ओर से मशीनें भेजी जाती हैं, पर समस्या से निपटने के लिए कुछ नहीं किया जाता।
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जमीन धंसना, बाहर आती आग और घरों में दरारें होने पर गांव-वाले दूसरी जगह घर बना लेते हैं। रानीगंज के 140 गांवों में हालात यही हैं।
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अक्सर मकानों के नीचे की जमीन खिसक जाती है। अचानक जमीन दरकने से खदान की सच्चाई सामने आती है।(फाइल चित्र)
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साल 2009 में केंद्र सरकार ने आसनसोल-रानीगंज कोयलांचल के लिए रानीगंज मास्टर प्लान बनाया और करीब 2600 करोड़ की पुनर्वास योजना लागू की। सात साल में 161 करोड़ रुपए खर्च हुआ पर एक भी व्यक्ति का पुनर्वास नहीं हुआ। 111537 लोगों का पुनर्वास होना है।
सरकारी मदद न मिलने से एक-एक घर में दो-दो तीन-तीन परिवार रह रहे हैं। 2011 में आसनसोल रानीगंज के जामुरिआ की छातिमदंगा गांव में भू-धसान के दौरान पांच लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 30 परिवार बेघर हुए थे। आज तक उनका पुनर्वास नहीं हुआ।