63 साल पहले आज ही के दिन 5 दिसंबर को लंदन के आसमान में पीली धुंध छा गई थी। एक ऐसा मुल्क की जिसकी सत्ता का सूरज नहीं डूबता था, वह घुटनों पर आ गया। चार दिनों तक शहर पर धुंध छाई रही, और उसके बाद हुई बीमारियों ने 4000 लोगों की जान ले ली।
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दिल्ली धुंध से कैसे निपटे ये लंदन से सीखें, 63 साल पुरानी तस्वीरें
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ये तस्वीर 2 जनवरी, 1954 की हैं। धुंध इतनी घनी थी कि गेंद दिखाई ही नहीं पड़ रही थी और फुटबॉल का ये मैच रोकना पड़ा था। 1952 के 'ग्रेट स्मॉग' के बाद मुल्क के पर्यावरण की साफसुथरा करने के दिशा में प्रयास किए थे। 1954 में लंदन (वेरियस पॉवर्स ) कानून बना।
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वेस्टमिंस्टर कैथेड्रल पर छाई धुंध की ये तस्वीर 1953 में ली गई थी। ये तस्वीर सुबह की है, लेकिन सूरज बिलकुल भी नहीं दिख रहा है। पर्यावरण का साफ करने के लिए लंदन ने 1954 के बाद 1956 में क्लीन एयर एक्ट बनाया। इन कानूनों के तहत काले धुओं के संरक्षण पर प्रतिबंध लगा दिया गया। शहरी क्षेत्र के निवासियों और फैक्ट्रियों को आदेश दिया गया कि वे धूम्ररहित इंधनों का इस्तेमाल करें।
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धुंध के कारण बने तत्वों को pea souper नाम दिया गया। ये पीले, काले या हरे रंगे के जहरीले धुंए थे, जिनमें जहरीली सल्फर डाइऑक्साइड घुली हुई थी।
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ये तस्वीर 1953 की है, जहरीले धुएं से बचने के लिए मुंह पर मास्क लगा फैक्ट्री जाती महिलाओं की। सरकार ने जहरीले धुएं के असर को कम करने के लिए ऐसे मास्क बांटे थे।
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1952 की इस तस्वीर में मार्बल आर्क की लौ की सहायता से पुलिसर्मी ट्रैफिक नियंत्रित कर रहा है। जहरीली धुंध से उस समय 4000 से अधिक लोग मरे थे।