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अनिल यादव की विदाई पर आखिर क्यों मना ये जश्न?

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यह सिर्फ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष अनिल यादव को हटाए जाने की खुशी नहीं थी। लाखों युवाओं के सुनहरे भविष्य की उम्मीदों का जश्न था। ढाई साल से छाए घोर अंधेरे और सदमे से निकलकर सपनों को फिर से नई ऊर्जा देने का जश्न था। (सभी फोटो और रिपोर्ट: अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद)
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अनिल यादव की विदाई पर आखिर क्यों मना ये जश्न?

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दर्जनों डबडबाई आंखें यह कह रही थीं कि निराशा को इन आंसुओं के साथ बह जाने दो। हाईकोर्ट के फैसले के बाद भावुक और नम आंख के साथ एक प्रतियोगी का कहना था, ‘अब हम भी कुछ बन जाएंगे।’ यह सिर्फ उस प्रतियोगी के बोले नहीं थे, सभी की भावना थी जो उत्साह और जश्न के रूप में दिख रही थी।
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अनिल यादव की विदाई पर आखिर क्यों मना ये जश्न?

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बुधवार को हाईकोर्ट में जमे प्रतियोगियों ने फैसला लिखे जाने के दौरान ही साथियों को संकेत दे दिया कि जीत होने जा रही है। ऐसे में फैसला से पहले बड़ी संख्या में प्रतियोगियों का हाईकोर्ट पर जमावड़ा हुआ।

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प्रतियोगी वहां से इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ भवन पहुंचे। वहां पहले से बड़ी संख्या में छात्र और प्रतियोगी मौजूद रहे और फिर जो जश्न शुरू हुआ तो शाम तक जारी रहा। छात्रों ने मिठाई खिलाकर एक-दूसरे को बधाई दी तो जश्न में होली से पहले गुलाल भी उड़ा।
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छात्रसंघ भवन पर नगाड़ा भी मंगा लिया गया तथा छात्र उसकी थाप पर जमकर झूमे। इस लड़ाई की अगुवाई करने वाले अवनीश को छात्रों ने कंधे पर उठाकर घुमाया। जश्न का यह माहौल लक्ष्मी टाकीज, चंद्र शेखर आजाद पार्क, मनमोहन पार्क चौराहा समेत कई जगह रहा।
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शहर भर में जहां भी कुछ छात्र जुट गए वहीं जश्न शुरू हो गया। इस जश्न में आम शहरी भी खुलकर शामिल हुए। जो, शामिल नहीं हुए वे भी हाईकोर्ट के इस फैसले की चर्चा में मशगूल रहे। हर जगह अनिल यादव की बर्खास्तगी की चर्चा रही।
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अनिल यादव की विदाई पर आखिर क्यों मना ये जश्न?

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हाईकोर्ट के फैसले को लेकर लोक सेवा आयोग में दिन भर चर्चा होती रही। हालांकि  अफसर और कर्मचारी इस फैसले की बाबत सामूहिक चर्चा में कुछ भी बोलने से बचते रहे। कुछ खास लोगों के बीच ही वे अपनी राय रखते। दिन में तकरीबन दो बजे तक अनिल यादव भी कार्यालय में मौजूद रहे, लेकिन इसके बाद वह बिना किसी से कुछ कहे चले गए।
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