सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर की गई टिप्पणी के बाद गिरफ्तारी के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने धारा 66A को निरस्त करने का फैसला सुनाया है। इसके साथ ही अब फेसबुक-ट्विटर पर कोई भी कमेंट करने पर आनन-फानन में किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं सकेगी।
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सोशल मीडिया में बोलने पर कब-कब जाना पड़ा जेल
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सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से पहले सोशल साइट्स खासकर फेसबुक में कमेंट करने को लेकर कई लोगों पर कार्रवाई की गई। कुछ मामलों में गिरफ्तारी भी हुई।
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सोशल साइट्स पर कमेंट के खिलाफ कार्रवाई का मामला साल 2012 में देश की
सर्वोच्च अदालत पहुंचा था। जब शिवसेना के नेता बाल ठाकरे के निधन के बाद
मुंबई के ताजा हालात पर वहां की दो छात्राओं ने फेसबुक पर कुछ कमेंट किया
था। जिसको लेकर हंगामा बढ़ा और दोनों छात्राओं को गिरफ्तार कर लिया गया।
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बाल ठाकरे को लेकर फेसबुक पर कमेंट करने वाली रिनू श्रीनिवासन ने सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि वो कोर्ट के फैसले से बेहद खुश हैं। आखिरकार उन्हें दो साल बाद न्याय मिला है।
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कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी भी ऐसे ही मामले में फंसे थे। उन पर साल 2011 में अन्ना हजारे की रैली के दौरान संविधान मजाक उड़ाते हुए कार्टून बनाने और पोस्ट करने के आरोप लगे थे। जिसमें मुंबई पुलिस ने उन पर देशद्रोह का आरोप लगाते हुए गिरफ्तार कर लिया।
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असीम त्रिवेदी के खिलाफ रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के एक सदस्य ने शिकायत दर्ज कराई थी। जिसके बाद उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 124 यानी राजद्रोह, आईटी कानून की धारा 66A और राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान की रोकथाम अधिनियम की धारा 2 के तहत कार्रवाई की गई। हालांकि इसको लेकर काफी हंगामे के बाद असीम को रिहा कर दिया गया।
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धारा 66A की शिकार एक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर भी हुए हैं। जिन पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ आपत्तिजनक कार्टून बनाकर उन्हें सोशल नेटवर्किंग साइट पर सार्वजनिक करने के आरोप लगे थे।
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कोलकाता से सटे दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित जादवपुर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अम्बिकेश महापात्रा पर आरोप था कि उन्होंने ऐसा कार्टून बनाया जिसमें ममता बनर्जी के साथ-साथ पूर्व रेलमंत्री दिनेश त्रिवेदी और तत्कालीन रेलमंत्री मुकुल रॉय को दर्शाया गया।
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इस मुद्दे पर प्रोफेसर अम्बिकेश महापात्रा के खिलाफ धारा 66A के तहत मामला दर्ज किया गया था।
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इस कानून के तहत गिरफ्तारी का सबसे ताजा मामला हाल ही में सामने आया जब
उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री आजम खान को लेकर बरेली के एक छात्र
ने फेसबुक पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी।
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11वीं की इस छात्र के कमेंट के बाद उसे जेल भेज दिया गया। हालांकि बाद में
इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से कारण बताओ नोटिस मांगा था।
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इसके साथ-साथ सोशल साइट्स पर कमेंट को लेकर आगरा में भी एक शख्स को गिरफ्तार किया गया। उस पर पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल और सपा के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के खिलाफ आपत्तिजनक कार्टून पोस्ट करने के आरोप लगे थे।
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ऐसा ही मामला पॉन्डिचेरी में भी सामने आया था। जिसमें पुलिस ने एक कारोबारी रवि श्रीनिवासन को पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम की आलोचना के चलते गिरफ्तार किया गया था।
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ऐसा ही एक मामला नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भी सामने आया था
जब गोवा के एक शिपिंग प्रोफेशनल देवू चोदानकर ने फेसबुक कुछ कमेंट किए थे।
जिसके बाद उस पर गिरफ्तारी की तलवार लटकने लगी थी।
देवू ने अपने फेसबुक कमेंट में लिखा था कि अगर मोदी की सरकार बनी तो दक्षिण गोवा में ईसाई अपनी पहचान खो देंगे। इस टिप्पणी के बाद पुलिस ने देवू के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया।