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आतंकी कासिम को मारकर शहीद हुआ 'यूपी का शेर', तस्वीरें

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जब तक सूरज चांद रहेगा, समोद तेरा नाम रहेगा...। यूपी के ब्रज में भवनपुरा की गलियां गगन भेदी नारों से गूंज रही थी। गांव के लाल शहीद समोद चौधरी के सम्मान में जैसे पूरा गोवर्धन उमड़ पड़ा था। आंखें नम थीं लेकिन छाती एक गौरव की अनुभूति से चौड़ी। राजकीय सम्मान के साथ शहीद के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया। (सभी फोटो: अमर उजाला ब्यूरो, आगरा)
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जम्मू के वादीपुरा में आतंकियों से लोहा लेते हुए दो दिन पूर्व भवनपुरा का लाल समोद चौधरी शहीद हो गया था। शनिवार को सुबह 8:20 बजे सेना की गाड़ी से शहीद सैनिक का पार्थिव शरीर जैसे ही मथुरा से जमुनावता चौराहे पर पहुंचा, वहां पहले से राह देख रहे हजारों लोगों ने ‘समोद चौधरी अमर रहे’ के नारे लगाने शुरू कर दिए।
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पार्थिव शरीर को लाने वाली सेना की गाड़ी पर पुष्प वर्षा होने लगी। जमुनावता चौराहे से गांव भवनपुरा तक गाड़ी के आगे-पीछे हजारों लोग शहीद के सम्मान में नारे लगाते हुए पैदल ही आगे बढ़ लिए। नौ बजे शहीद का शव हजारों लोगों के साथ उसके घर पहुंचा। जहां अपने लाल के अंतिम दर्शन को पूरा गांव उमड़ा हुआ था।

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वादीपुरा से शहीद समोद के पार्थिव शरीर के साथ आए सेकेंड लांसर जोधपुर के नायब सूबेदार सीबी सिंह ने उनकी वीरता की दास्तां सुनाई। उन्होंने बताया कि वादीपुरा के सेक्टर पांच स्थित पूंछ की पहाड़ियों पर आतंकवादी अबू कासिम और साथियों से मुठभेड़ हुई थी। समोद ने 20 लाख के इनामी आतंकी अबू कासिम को मार गिराया।
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सेकेंड लांसर जोधपुर के रिटायर्ड सैनिक अशोक कुमार भी अपने को रोक नहीं पाए। उन्होंने भी मुठभेड़ में समोद की बहादुरी के बारे में बताया। बोले, अबू कासिम को गोली लगने के बाद आतंकियों की तरफ से गोलीबारी बंद हो गई थी। छह घंटे तक खामोशी बनी रही। सैनिक डटे हुए थे। एक बार समोद ने उठकर देखना चाहा लेकिन साथियों ने रोक दिया। तभी दूसरी ओर एक आतंकी की झलक दिखी तो समोद ने उसे मारने के लिए सिर उठाया।
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आतंकी घात लगाए थे, उन पर फायरिंग शुरू कर दी। सेकेंड लांसर के रिटायर्ड हवलदार हरकिशन ने बताया कि अपने साथी की मौत से बौखलाए आतंकियों की ओर से समोद के सीने और सिर पर फायरिंग की गई। ये गोलियां जैकेट और हेलमेट से टकरा कर निकल गईं। अभी समोद जवाबी फायर करते कि एक आतंकी ने साइड फायर किया, ये गोली चेहरे पर लगी।
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शहीद समोद के अंतिम संस्कार के समय उसके बड़े बेटे शिवम ने चिता को मुखाग्नि देने से पहले सिर पर पिता की फौजी टोपी पहनी तो पूरा वातावरण तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

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जवान बेटे के शहीद होने से पिता बच्चू सिंह बुरी तरह टूट चुके हैं। बावजूद इसके बोले कि देश के लिए ऐसी वीरता भरी शहादत को वह और भी शहीद समोद के अंतिम संस्कार के दौरान ग्रामीणों के बीच प्रदेश सरकार की ओर से कोई भी घोषणा नहीं किए जाने से मायूसी रही। सांसद हेमामालिनी ने शहीद के परिवार को भेजे शोक संदेश में कहा कि उनकी शहादत पर देश को गर्व है।

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शहीद समोद के पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने पर हर आंख नम थी। मां मीना, पत्नी सीमा देवी, भाई प्रमोद और अन्य परिजनों के तो आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। शवयात्रा के गांव से गुजरने के दौरान अपने घर के दरवाजों पर खड़ी महिलाएं और युवतियों की आंखों से भी आंसू नहीं रुक रहे थे।

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यहां से शहीद का पार्थिव शरीर भीड़ के साथ सैन्य अफसरों की अगुवाई में गांव के श्मशान के निकट ही शहीद के खेत पर ले जाया गया। अंतिम संस्कार स्थल पर ‘जय जवान, जय किसान, भारत माता की जय, जब तक सूरज चांद रहेगा, समोद तेरा नाम रहेगा’ के नारों से वातावरण गूंज उठा।

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सेना के अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों और राजनेताओं ने शहीद के शव पर पुष्पचक्र चढ़ाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। सेकेंड लांसर जोधपुर से आए सैन्य कर्मियों ने शहीद को सलामी दी। शहीद के बड़े पुत्र शिवम ने अपने पिता की चिता को मुखाग्नि दी। इस गमगीन माहौल में सैन्य अधिकारी भी अपने भाव नहीं रोक सके। उनकी आंखें भी नम हो गईं।

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नायब सूबेदार योगेश शर्मा ने बताया कि समोद कुश्ती के अच्छे खिलाड़ी थे। शरीर से मिट्टी लगने से पहले ही वह दांव मारकर खेल खत्म कर देते। उनका हंसमुख, हरफनमौला स्वभाव सभी को भाता। मेजर जयराम सिंह ने बताया कि कई साल से वेस्ट स्पोर्ट्समैन खिताब पर उन्हीं का कब्जा था।

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शहीद समोद के गांव के मित्र अमरचंद के आंसू थम नहीं रहे। उन्होंने बताया कि वह और समोद साथ पढ़े थे। गत 27 सितंबर को छुट्टी काटने के बाद वह समोद को ड्यूटी पर जाने के लिए मथुरा स्टेशन तक छोड़ने गए थे। नहीं पता था कि यह उनका आखिरी साथ होगा। अमरचंद ने बताया कि समोद को शुरू से ही सेना में जाने की चाह थी। वे बोले, दोस्त की इस गौरवशाली शहादत पर गर्व है।
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शहीद समोद के पार्थिव शरीर के गांव पहुंचने पर मथुरा के ब्रिगेडियर एसबीके सिंह, कर्नल संदीप शर्मा, कर्नल सरित प्रकाश सेना मैडल जोधपुर, मेजर ब्रिजेन्द्र सिंह, कैप्टन धीरज सैमुल जे, डीएम राजेश कुमार, एसडीएम विश्व भूषण मिश्रा, एसपी देहात अजय कुमार, एसपी यातायात आशुतोष द्विवेदी, सीओ सदर संजय कुमार, तहसीलदार बृजपाल यादव, बीडीओ राजपाल सिंह, पूर्व मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी, पूर्व मंत्री रविकांत गर्ग, विधायक पूरन प्रकाश, राजकुमार रावत, कांग्रेसी नेता कुंवर नरेन्द्र सिंह सहित कई गणमान्य लोगों ने श्रद्धांजलि दी।
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