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125 साल पुरानी कोठी की छत गिरी, 3 लोगों की मौत

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मोहल्ला नंबरदार वाली मस्जिद के पास सोमवार देररात करीब ढाई बजे गनी खां की 125 साल पुरानी कोठी की छत भरभराकर गिर गई। मलबे में दबकर दादा-पोते और बहू समेत तीन की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पांच घायल हो गए। मलबा गिरने की आवाज और चीख पुकार पर लोगों की भीड़ जुट गई। घायलों को निजी चिकित्सक के यहां से हसनपुर ले जाया गया। (अमर उजाला ब्यूरो उझारी (अमरोहा))
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125 साल पुरानी कोठी की छत गिरी, 3 लोगों की मौत

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यहां से दो बच्चों की हालत गंभीर होने पर दिल्ली रेफर कर दिया गया। उधर, पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। उपजिलाधिकारी और सीओ ने भी मौका मुआयना किया है। मोहल्ला नंबरदार वाली मस्जिद के पास गनी खां की 125 साल पुरानी कोठी है, जो सुरखी चूना से बनी है। जिसमें गनी खां के परिवार के लोग रहते हैं, मगर देखरेख के अभाव में कोठी जर्जर हाल में है।
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बीती रात करीब ढाई बजे अचानक शबनम पत्नी महबूब के ऊपर छत का कुछ मलबा गिरा तो उसने परिवार के दूसरे सदस्यों को जगाया। इसी बीच छत की डाट भरभराकर गिरने लगी। मलबे में परिवार के कई सदस्य दब गए। चीख-पुकार मचने पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। लेकिन इमारत के पास जाने की किसी की हिम्मत नहीं हुई।

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परिवार के सदस्य जफर पुत्र इदरीश ने रोते हुए मदद की गुहार लगाई। इसके बाद ग्रामीणों ने हिम्मत कर मलबे में दबे अलीजा, रिहान, शबनम, शाने आलम, अंजुम को घायल अवस्था में निकाला। घायलों को निजी चिकित्सक के यहां से हसनपुर ले जाया गया। लेकिन बुजुर्ग इदरीस (75), उनके पोते फहद (5) और बेटे जमशेद की पत्नी तलअत परवीन(45) को जब तक निकाला गया, तब तक उनकी मौत हो गई थी।
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इधर, सूचना पर थानाध्यक्ष सुमन कुमार, उपजिलाधिकारी हसनपुर, सीओ भी मौके पर पहुंच गए और शवों का पंचनामा भर कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। एक ही परिवार के तीन पीढ़ियों के सदस्यों की मौत से कोहराम मचा है। इधर, अलीजा, रिहान को इलाज के बाद उझारी भेज दिया गया, जबकि शाने आलम और अंजुम को दिल्ली रेफर कर दिया गया।
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सौ साल पहले गनी खां नगर के जमींदार थे, लेकिन बाद में परिवार की आर्थिक स्थिति खराब होती गई। उनके बेटे इदरीस के छह बेटे और पांच बेटियां थीं। बड़ा बेटा जफर कढ़ाई कराकर बच्चों का पालन पोषण कर रहा था, जबकि महबूब दिल्ली में मजदूरी करता है।
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वहीं अन्य बेटे शाने आलम, मतलूब भी छोटे-मोटे काम करते हैं जबकि महफूज की मौत हो चुकी है और जमशेद लापता है। कभी परिवार शानोशौकत से रहता था, नौकर भी लगे रहते थे। मगर धीरे-धीरे सारी संपत्ति बिक गई। इदरीस के बड़े बेटे जफर के मुताबिक अब हमारी एक बीघा जमीन ही है, लेकिन वह भी हमारे कब्जे में नहीं है।
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