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सुनामी का दर्द, तस्वीरें देख कर रो पड़ेगे आप

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दस साल पहले 26 दिसंबर 2004 को इंडोनेशिया के तटीय इलाक़े के पास समुद्र में रिक्टर स्केल पर 9.15 तीव्रता का भूकंप आया। उसके बाद इंडोनेशिया, थाईलैंड, भारत और श्रीलंका समेत नौ एशियाई देशों में विनाशकारी सूनामी ने लाखों लोगों की जान ले ली थी।
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सुनामी का दर्द, तस्वीरें देख कर रो पड़ेगे आप

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एक फ़ोटोजर्नलिस्ट की ज़िंदगी जीते हुए मुझे इतिहास को क़रीब से देखने का मौका मिलता है। यह ऐसा अनुभव है जो कभी पैसे से नहीं ख़रीदा जा सकता। लेकिन ऐसा भी वक़्त आता है जब आपका सामना लगातार दुख, कष्ट और मृत्यु से होता है और यह काम असहनीय हो जाता है।
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इंडोनेशिया के समुद्र तटीय इलाके का 10 जनवरी 2003 की तस्वीर। सुनामी आने के बाद 29 दिसम्बर 2004 को ली गई तस्वीर। उन लोगों पर अपना लेंस फ़ोकस करना कोई आसान बात नहीं, जो भूकंप या इमारत ढहने में दब गए हों और मर सकते थे।

सुनामी का दर्द, तस्वीरें देख कर रो पड़ेगे आप

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28 दिसंबर 2004 को ऐसा कुछ मेरे साथ घटा। यह तमिलनाडु के कुडालोर में आई एशियाई सूनामी कवर करने का मेरा दूसरा दिन था। मैंने इतने बड़े पैमाने पर मौतें देखीं जिसकी कल्पना भी नहीं की थी।
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तभी एक शव को लेकर नौका लौटी। भीड़ में एक पुरुष और महिला तुरंत मृतक महिला को पहचान कर क़रीब आ गए। मृतक महिला का पति अचानक ज़मीन पर गिर गया, जबकि उसके साथ आई पीड़िता की ननद शव के पास गई और निढाल होकर उन्होंने रेत पर अपने दोनों असहाय हाथ फैला दिए।
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असल में उस महिला को पता भी नहीं चला कि उसकी तस्वीर ली गई है। यह बात उसने बाद में एक साक्षात्कार में बताई थी। मुझे लगता था कि मैं अर्ध-मूर्छा में काम कर रहा हूं। चारों ओर जितना दुख पसरा था, उसके मुक़ाबले मेरी तस्वीरों के कोई मायने नहीं थे। छह महीने बाद मैं उस महिला को तलाशने लौटा, जिसकी मैंने तस्वीर ली थी।
(आर्को दत्ता मुंबई मिरर में फ़ोटो एडिटर हैं और उड़ान स्कूल ऑफ़ फ़ोटोग्राफ़ी के संस्थापक हैं।)
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