देश में बढ़ रही असहिष्णुता को लेकर खड़े विवाद के बीच केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कलाकारों और विद्वानों से कहा कि वे आगे आएं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलें। उन्हें इस संकट के समाधान के लिए सुझाव दें।
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'पुरस्कार लौटाना गलत, पीएम से मिलकर दें सुझाव'
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हालांकि राजनाथ ने हैरानी जताते हुए कहा कि आखिर क्यों पीएम और एनडीए सरकार को इस मुद्दे को लेकर निशाना बनाया जा रहा है। दादरी घटना और कुलबर्गी हत्याकांड सहित तमाम मुद्दों पर साहित्यकारों और कलाकारों के सम्मान वापसी से जुड़े सवाल पर गृहमंत्री ने कहा कि कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दे राज्य सरकारों के अंतर्गत आते हैं।
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'पुरस्कार लौटाना गलत, पीएम से मिलकर दें सुझाव'
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अखिल भारतीय काशी विद्वत परिषद की ओर से आयोजित अभिनंदन समारोह में शिरकत करने के लिए वाराणसी पहुंचे राजनाथ ने कहा कि राज्य सरकारों से ये अपेक्षा की जाती है कि वे इसे रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाएं। इन मुद्दों को लेकर सम्मान वापस करना और पीएम के साथ केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराना मेरी समझ से परे है। जिन्हें ये लगता है कि देश में असहिष्णुता बढ़ी है तो वे लोग सरकार को सुझाव दें ताकि सरकार उस पर गंभीरता से विचार कर सके। राजनाथ ने कहा कि पुरस्कार लौटाना सही चीज नहीं है।
राजनाथ ने उम्मीद जताई कि माफिया डान छोटा राजन के बाद सरकार मोस्ट वांटेड दाऊद इब्राहिम को भी भारत लाने में कामयाब होगी। उन्होंने कहा कि छोटा राजन आ रहा है। उसके बाद दाऊद की ही बारी है। बस थोड़ा सब्र कीजिए। गृहमंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बेहतर ढंग से काम कर रही है। पड़ोसी देशों से रिश्ते सुधरे हैं। वैश्विक मंच पर भारत की स्थिति मजबूत हुई है। केंद्रीय गृहमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पड़ोसी देशों के साथ हम बेहतर संबंध बनाना चाहते हैं। हम अपनी ओर से कोई गोली नहीं चलाना चाहते हैं मगर सीमा पार से हम पर गोली चलेगी तो उसका मुंहतोड़ जवाब देने में सेना पीछे नहीं रहेगी।