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एक साथ गूंजा नाराः गे सेक्स गुनाह नहीं!

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समलैंगिकता को अपराध की परिधि में डालने वाले कानून को सही ठहराने से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसले का विरोध करते हुए लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल एंड ट्रांसजेंडर (एलजीबीटी) समुदाय के सदस्यों और समर्थकों ने यहां प्रदर्शन किया। सभी फोटोः अरूण शर्मा
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प्रदर्शनकारियों में एलजीबीटी समुदाय के सदस्य, उनके परिवारजन, महिला यौनकर्मी और महिला अधिकारवादी संगठन के सदस्य शामिल थे, जो फैसले को अविलंब वापस लिए जाने की मांग कर रहे थे।
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समलैंगिक कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ ‘विश्व नाराजगी दिवस’ मनाते हुए रविवार को जंतर मंतर पर, देश के 16 शहरों और दुनिया के 17 शहरों में प्रदर्शन किया।

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उन्होंने पोस्टर और बैनर लहराए, जिन पर ‘हम अपराधी नहीं हैं’ और ‘दूसरे मनुष्य से प्यार करना अपराध नहीं है’ जैसे नारे लिखे थे।
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वे नारा लगा रहे थे, ‘‘कौन सा कानून बदतर, धारा तीन सौ सतहत्तर।’’इन प्रदर्शनकारियों ने काली पट्टी बांधी रखी थी और तख्तियां ले रखी थीं।
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सर्वोच्च न्यायालय ने 11 दिसंबर के फैसले में भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को बरकरार रखा। यह धारा समलैंगिक संबंधों पर पाबंदी लगाती है।
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विरोध प्रदर्शन का आयोजन करने वाले संगठन सोसायटी फॉर पीपुल्स अवेयरनेस, केयर एंड एंपावरमेंट (स्पेस) के संस्थापक सदस्य अंजन जोशी ने कहा कि ‘हम व्यक्तिगत आजादी और मानवाधिकार के विरुद्ध इस फैसले का कड़ा विरोध करते हैं।’

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स्पेस के मुताबिक सरकार पर दबाव डालने के लिए दिल्ली में विभिन्न स्थानों पर सप्ताह भर प्रदर्शन किया जाएगा।

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जोशी ने कहा, ‘हमने विरोध का एक खंभा खड़ा किया है और हमें समर्थन देने वाले लोग इस पर एक धागा बांध कर अपना विरोध जता सकते हैं।

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सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली उच्च न्यायालय के 2009 के उस फैसले को रद्द कर दिया, जिसमें कहा गया था कि यह धारा एलजीबीटी समुदाय के अधिकार का उल्लंघन करती है।

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सर्वोच्च न्यायालय ने 11 दिसंबर के फैसले में भारतीय दंड संहिता की धारा 377 lको बरकरार रखा। यह धारा समलैंगिक संबंधों पर पाबंदी लगाती है। सभी फोटोः अरूण शर्मा
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जोशी ने कहा ‌कि यह सभी स्थानों पर हमारे साथ जाएगा और आखिरकार अभियान के अंत में इसे कानून मंत्री को सौंपा जाएगा।
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