प्रधानमंत्री आवास पर मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठक में खेती-किसानी पर खूब चर्चा हुई और उद्योग जगत को इस क्षेत्र में भी निवेश का सुझाव भी दिया गया। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि कि बैठक में किसी किसान नेता या किसान की तरफदारी करने वाले चिंतक को नहीं बुलाया गया था।
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मोदी ने की खेती पर चर्चा, लेकिन किसानों को नहीं बुलाया
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जबकि बैठक में देश के नामचीन उद्योगपतियों, उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों, बैंकरों, अर्थशास्त्रियों को बुलाया गया था।
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बैठक के बाद संवाददाताओं से बातचीत में केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि इस दौरान प्रधानमंत्री ने खेती का विशेष तौर पर जिक्र किया।
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जेटली ने बताया कि बैठक में नरेंद्र मोदी ने कहा कि अब वक्त आ गया है खेतीबाड़ी, इसके लिए सिंचाई सुविधाओं के साथ साथ खाद्य प्रसंस्करण उद्योग में भी निवेश किया जाए।
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बैठक में शामिल एक उद्योगपति का कहना है प्रधानमंत्री ने कारपोरेट जगत को भी खेती से जुड़ने का संदेश दिया ताकि देश के किसानों का भला हो सके।
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इसलिए कुछ लोगों का कहना है किसानों के लिए कुछ चर्चा करनी थी तो बैठक में एक-आध किसानों या किसानों की पैरोकारी करने वाले चिंतक को ही बुला लिया जाता तो बेहतर रहता।
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प्रधानमंत्री की बैठक में जा रहे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व डिप्टी गवर्नर सुबीर विट्ठल गोकर्ण। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्योगपतियों से जोखिम लेने और रोजगार पैदा करने वाले सेक्टरों में निवेश बढ़ाने की अपील की है
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प्रधानमंत्री की बैठक में जा रहे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व डिप्टी गवर्नर सुबीर विट्ठल गोकर्ण। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उद्योगपतियों से जोखिम लेने और रोजगार पैदा करने वाले सेक्टरों में निवेश बढ़ाने की अपील की है।
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पीएम ने कहा है कि उनकी सरकार खर्च बढ़ाने और विदेशी पूंजी आकर्षित करने का माहौल बना कर अर्थव्यवस्था में रफ्तार लाने को प्रतिबद्ध है। लिहाजा उद्योगपतियों को भी वैश्विक अर्थव्यवस्था में आई उथल-पुथल को भारत के लिए अवसर में बदलने का माहौल तैयार करने और पूंजी निवेश की पहल करनी होगी।