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लोकसभा में नेताजी का कुनबा, हम पांच-पांच हैं

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समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह की राजनीति समाजवाद की पटरी से उतर कर परिवारवाद की पटरी पर चल पड़ी है। इसका परिणाम संसद में देखने को मिलता है।
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लोकसभा में नेताजी का कुनबा, हम पांच-पांच हैं

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लोकसभा चुनावों में मिली करारी शिकस्त ने समाजवादी पार्टी के हौसलों को पस्त कर दिया है। लोकसभा चुनावों में सिर्फ मुलायम का परिवारवाद ही काम आया। क्योंकि सभी सीटें उनके परिवार के सदस्य ही जीत पाए। मुलायम ने आजमगढ़ और मैनपुरी दोनों सीटों पर विजय प्राप्त की। बाद में उन्होंने मैनपुरी की सींट छोड़ दी।

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मुलायम के बाद उनके भतीजे धर्मेन्द्र यादव ने लोकसभा चुनावों में पार्टी की इज्जत रखी। बदांयू से सांसद धर्मेद्र यादव ने अपनी सीट सुरक्षित रखी और लोकसभा चुनावों में विजयी हुए।

लोकसभा में नेताजी का कुनबा, हम पांच-पांच हैं

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मुलायम की बहू डिंपल यादव को भी लोकसभा चुनावों में कड़ी टक्कर मिली। कन्‍नौज से लोकसभा सांसद डिंपल का लोकसभा चुनाव 2014 को जीतने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। इससे पहले डिंपल फिरोजाबाद में लोकसभा का चुनाव हार चुकी थीं।

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मुलायम सिंह यादव के भाई प्रो.राम गोपाल यादव के पुत्र अक्षय यादव ने लोकसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी की लाज रखी। लोकसभा चुनाव 2014 में अक्षय ने फिरोजाबाद संसदीय क्षेत्र में विजय प्राप्त की।

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लोकसभा चुनावों में दो सीटों पर जीतने वाले सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी की संसदीय सीट से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देने के बाद इस सीट से मुलायम सिंह यादव के बड़े भाई स्वर्गीय रतन सिंह यादव के पौत्र तेज प्रताप ने चुनाव लड़ा। 13 सितंबर को हुए उपचुनावों में तेजप्रताप ने अपने निकटतम प्रतिद्घंदी प्रेम सिंह शाक्य को 3.21 लाख वोटों से पराजित किया। अब संसद में मुलायम का कुनबा बढ़ गया है।
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