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खत्म हुआ खट्टा का खौफ, जानिए कितना खतरनाक था खट्टा

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राहुल खट्टा और उसके साथी बिन्ते का एनकाउंटर होने से मेरठ से भी इस गिरोह के खौफ और आतंक का सफाया हो गया। राहुल खट्टा गैंग ने मेरठ जिले में कई सनसनीखेज वारदातों को अंजाम दिया, जिसके चलते यहां की पुलिस की नींद भी उड़ी रहती थी। वारदात चाहे मुजफ्फरनगर, सहारनपुर या बागपत में हो, लेकिन गैंग मेरठ की तरफ भागता था तो चेकिंग यहां जरूर होती थी। (सभी फोटो: अमर उजाला ब्यूरो, मेरठ)
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पुलिस को पता था कि राहुल खट्टा के पास कारबाइन, एसएलआर और पिस्टल रहती हैं। सरधना क्षेत्र के गांव में खट्टा की मौजूदगी का पता चला था। तब राहुल खट्टा की गिरफ्तारी के ऑपरेशन में लगे पुलिसकर्मियों ने उच्चाधिकारियों से पूछा था कि क्या मुठभेड़ कर ली जाए, तो उन्हें जवाब दिया गया कि पुलिसवाले कम हो, तो लौट जाओ क्योंकि राहुल खट्टा और उसके साथी अत्याधुनिक असलहों से लैस रहते हैं, यदि गोलियां चल गई तो पुलिसकर्मियों की जान खतरे में पड़ जाएगी।
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बागपत और मुजफ्फरनगर जिले की सीमा मेरठ से जुड़ती है। राहुल खट्टा के ठिकाने भी इन तीनों जिलों में बने हुए थे। लिहाजा जब भी राहुल खट्टा गैंग अपना ठिकाना बदलकर दूसरे स्थान की तरफ चलता, तो पुलिस को भनक लगती थी। कभी आई-10 तो कभी फॉरच्यूनर और अन्य लग्जरी गाड़ियों के बारे में सूचना आती तो पुलिस की चिंता बढ़ जाती थी।

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वेस्ट यूपी में बड़ी वारदात में खट्टा गैंग का नाम पुलिस महकमे में सबसे पहले आता था। उसकी सटीक लोकेशन सरधना इलाके में लगातार मिलती थी। इसके बावजूद पुलिस और एसटीएफ उसको पकड़ने में नाकाम हो रही थी।
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कारबाइन, .30 और .32 बोर की पिस्टलें, मुजफ्फरनगर से लूटी गई दो एसएलआर के अलावा इस गैंग के पास एके 47 रहने की आशंका थी। इसके चलते राहुल खट्टा की घेराबंदी में पुलिस खुद को असुरक्षित महसूस करती थी। राहुल खट्टा की लोकेशन मिलने पर कभी भी पुलिस ने एकाएक से मुकाबला करने का प्रयास नहीं किया।
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राहुल खट्टा बागपत के खट्टा गांव का निवासी था लेकिन वह अधिकांश सरधना इलाके में अपने रिश्तेदारों के यहां पर रहा। सरधना में चप्पे चप्पे से खट्टा पूरी तरह वाकिफ था। पुलिस कौन से रास्ते से आती व उसको कौन से रास्ते से भागना है, यह जानकारी उसको थी, लेकिन सहारनपुर इलाके में अनजान होने के चलते खट्टा को भागने का मौका ही नहीं मिला।
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राहुल खट्टा के नाम से रजिस्टर्ड गैंग में 18 बदमाश वो हैं, जो पूर्व से कई वारदातों में राहुल खट्टा के साथ रहे। बाद में पुलिस ने 12 नाम और चिन्हित किए, लेकिन रजिस्टर्ड गैंग में उनका नाम शामिल नहीं किया गया।

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कुख्यात बदमाश राहुल खट्टा वेस्ट यूपी का डॉन बनने की ख्वाहिश पाल बैठा था। वेस्ट यूपी के कारोबारियों और व्यापारियों से रंगदारी मांगने का मकसद भी यही था कि उसके नाम पर ज्यादा से ज्यादा इनाम हो। ऑपरेशन खट्टा से जुड़े एक अफसर की मानें तो कम समय में जरायम का सबसे बड़ा खिलाड़ी बनने का नापाक मंसूबा उसे ले डूबा।

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मेरठ के मोदीपुरम से बैंक की कैश वैन लूटी गई। इसमें बदमाशों ने फॉरच्यूनर गाड़ी का इस्तेमाल किया था। पुलिस का दावा था कि राहुल खट्टा गैंग ने ही यह वारदात की। इसके अलावा परतापुर और जानी में लूट, सरधना में बलवा और जानलेवा हमले की रिपोर्ट राहुल खट्टा गैंग के खिलाफ दर्ज हुई।
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खट्टा के हर बार बच निकलने की वजह भी खास थी, जो था उसका मुखबिर तंत्र। यह बदमाशों का नहीं, बल्कि खुद पुलिस का था। खट्टा की घेरेबंदी के लिए किसी ऑपरेशनल कार्रवाई या प्लान की सूचना सबसे पहले खट्टा तक पहुंचती थी। यही वजह रही कि मेरठ और बागपत में सक्रिय रहे खट्टा को पुलिस छू तक नहीं पाई।
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