मायावती ने लखनऊ में अब तक की सबसे बड़ी रैली करके अपना जनाधार और लोकप्रियता का अहसास करा दिया।
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माया के हाथी की पूंछ बराबर भी नहीं थी मोदी की रैली!
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भाजपा ने नरेंद्र मोदी की लखनऊ रैली को 'महारैली' का नाम दिया था, लेकिन इस रैली में मायावती की रैली की आधी भीड़ भी नहीं जुट पाई।
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माया के हाथी की पूंछ बराबर भी नहीं थी मोदी की रैली!
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मायावती की रैली में लगभग 20 लाख की भीड़ इकट्ठा हुई थी, जबकि मोदी की रैली में महज तीन लाख लोग ही आए।
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मोदी की रैली के लिए महीना भर तैयारी की गई थी।
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रैली में मोदी ने कहा कि नेताजी (मुलायम सिंह यादव) ने विकास पर अपनी पराजय स्वीकार कर ली है। मोदी ने यह भी कहा कि वह दिल्ली में जाकर चौकीदार की भूमिका निभाएंगे।
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मोदी ने कहा कि सपा सिर्फ वोट बैंक की राजनीति करती है। उन्होंने कहा कि आज लखनऊ में तबले की थाप नहीं सुनाई देती है, सिर्फ गुंडे बदमाशों की बंदूकों की आवाजें आती हैं।
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मायावती ने सभी कार्यकर्ताओं का शुक्रिया अदा किया और कहा कि इस ठंड में यहां आकर सबने इतिहास रच दिया है।
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मायावती ने कहा कि भाजपा ने मुझे धमकी दी। तो मैंने कहा कि आपको समर्थन वापस लेने की जरूरत नहीं होगी। मैंने खुद ही मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
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कोई मायावती के लिए विशालकाय लालकिला बनाकर लाया तो कोई संसद। सभी का सिर्फ एक ही मकसद था कि मायावती को पीएम बनाने के लिए शक्ति प्रदर्शन करें।
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मायावती की रैली में भीड़ का ये आलम था कि लोगों को नयंत्रित कर पाना मुश्किल हो गया था।