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तस्वीरें: कुछ इस तरह से होती है भारत के विभिन्न समाजों में शादियां

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यूं तो भारत उत्तर से लेकर दक्षिण और पूर्व सेलेकर पश्चिम तक अपनी एकता में अनेकता के लिए प्रसिद्ध है लेकिन इस भारत के कई ऐसे भी रंग हैं जो खास तौर से यहां की शादियों में दिखते हैं। तरह तरह के रीति- रिवाज और सबके अलग अंदाज। आगे की तस्वीरों में देखें भारत की शादियां (सभी तस्वीरें हफिंग्टन पोस्ट से साभार)
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ये है तेलगू रीति रिवाजों के माध्यम से होने वाली शादी। यहां दूल्हा दुल्हन एक दूसरे के सर पर घी, जीरा और गुण का मिश्रण छिड़कते हैं। इसके बाद दूल्हा इसका दिखावा करता है कि वो सभी सांसारिक सुख और मोह त्याग रहा है जिसे काशी यात्रा भी कहते हैं।
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मुख्य कार्यक्रम के बाद दुल्हन को 10 शादी शुदा महिलाएं घेर लेती हैं, जिनमें से 10 महिलाओं के हाथों में प्लेट होती है जिसमें चावल और हल्दी का मिश्रण रखा होता है।वहीं अन्य महिलाओं के हाथों में छोटे जलते हुए लैंप होते हैं। जहां चावल जीवन प्रचुरता का संकेत है वहीं जलते हुए लैंप जीवन में प्रकाश का संकेत है।

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गुजराती शादियों में भी अलग रीति रिवाज होता है। दूल्हा जब दुल्हन के घर आता है तो उसे पोन्खवनु कहा जाता है और यहीं से शादी वैधानिक रुप से शुरु मान ली जाती है।
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इस दौरान जब दूल्हा दूल्हन के घर में अन्दर जाने से पहले मिट्टी का घड़ा फोड़ता है। जो यह प्रदर्शित करता है कि वो सभी बाधाओं को पार कर के अपनी पति होने का दायित्व निर्वहित करेगा।
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मारवारी शादियों में दूल्हे का जनेऊ होना एक महत्वपूर्ण रिवाद है। जहां दूल्हा जनेऊ पहन कर शादी से भागने का दिखावा करदता है। यहां उनके मामा का दायित्व होता है कि वे दूल्हे का मना कर वापस ले आएं।
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यहां शादी की शुरुआत गणेश पूजा से होती है। जिससे जोडे़ सभी बुराइयों से दूर रहते हैं और उन्हें आशीर्वद भी मिलता है।

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इस दौरान दूल्हा और दूल्हन के मामा जोड़े को तोहफे के साथ-साथ आशीर्वाद भी देते हैं।

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मारवड़ी शादी में दूल्हा और दूल्हन एक दूसरे को वर माला पहनाते हैं। जिसमें दूल्हा और दूल्हन के परिवार के लोग यह कोशिश करते हैं कि दोनों को वरमाला पहनाने में खासी मशक्कत करनी पड़े।

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सिख समाज की शादी में किसी तरह के कुंडली, शादी की तारीख अथवा शादी के समय के मूहूर्त के निर्धारण अथवा किसी भी अन्य अंधविश्वास को नहीं मानते।

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इनकी शादी गुरुद्वारे में होते हैं जहां दूल्हन, दूल्हे के बांई ओर बैठती है।

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मलयाली शादियों में दूल्हा और दूल्हन शादी में उपस्थित अपने से बड़े लोगों को पान के पत्ते और सुपारी के साथ एक रुपए की दक्षिणा भेंट करते हैं।

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बंगाली शादियों में दूल्हन एक लकड़ी के पाट पर उसके भाइयों द्वारा बैठा कर लाई जाती है जिसे पिदि कहा जाता है। इस दौरान दूल्हन के भाई उसे दूल्हे के फेरे पूरे करवाते हैं। इसे सात पाक भी कहा जाता है।

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अग्नि के फेरे लेने के बाद दूल्हा, दूल्हन का हाथ पकड़ता है और दूल्हन के हाथ में मुर मुरे होते हैं जिन्हें वो पवित्र अग्नि में डाल देते हैं।

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मराठी शादी में दूल्हे की मां जोडे़ का स्वागत जोड़े का पैर पानी और दूध से धुल कर करती हैं। उसके बाद दूल्हन अपने नए घर में प्रवेश से पहले चावल से भरे एक गिलास को अंदर की ओर ढकेलती है।

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बंट समाज में शादी में दूल्हा और दुल्हन अपने परिवारीजनों से घिरे हुए होते हैं। जिस दौरान पहले दूल्हन दूल्हे के आगे चलती है और कुछ देर बाद यही काम दूल्हा करता है। ये मूलतः कन्नड़ होते हैं और इनकी शादियों में पुजारियों को नहीं बुलाया जाता है।

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असम में विवाह के समय जुरुन, बिया और रिसेप्शन होता है। जुरुन के दौरान दूल्हे की मां दूल्हन के घर ढेर सारे तोहफों और अपने सभी सगे संबंधियों के साथ जाती हैं। लेकिन सगे संबंधियों में केवल महिलाएं ही होती है। दूल्हन को हर तोहफा देने से पहले यह निश्चित किया जाता है कि उसे दूल्हे ने छूआ है।

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शादी के मुख्य रिवाज के दौरान दूल्हा अपने पारंपरिक परिधान, धोती, कुर्ता, और चेलांग ( पारंपरिक शॉल) पहन कर आता है। जो उसे दूल्हन गिफ्ट में देती है।

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यहां तस्वीर में जो आप देख रहे हैं वो हैं वनउन। शादी की यह रस्म डोगरी समाज में निभाई जाती है। शादी के कार्यक्रम में दूल्हा और दूल्हन दोनो के घर संगीत का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।

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इस तस्वीर में नेहा और जेम्स वॉटर हैं। जो अगली तस्वीर में आपको कैथोलिक रीति रिवाज से शादी करते दिखेंगे। लेकिन जेम्स का कहना है पुरोहित द्वारा उच्चारित किए जा रहे संस्कृत को श्लोक उन्हें उर्जा प्रदान कर रहे थे।

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ये तस्वीर भी नेहा और जेम्स की है। जिसमें वो कैथोलिक रीति रिवाज से शादी कर रहे हैं। इन शादियों में यह खास बात है कि दूल्हन या तो अपने पति के साथ चलती दिखेगी अथवा दोनों के परिवारी जन उसके साथ रहेंगे।

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ये एक और तस्वीर कैथोलिक समाज के शादी की है।

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सिंधी समाज में शादी की सबसे पहली रस्म होती है घड़ी पूजा। इस दौरान घर की कोई भी शादी शुदा महिला दू्ल्हे पर पिसा हुआ गेहूं लगाती हैं। ताकि जोड़ा हमेशा सुखी और समृद्ध रहे।
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उड़िया समाज में शादी के दौरान सभी रीतिरिवाजों का खासा ख्याल रखा जाता है। ये तस्वीर नोवेना की है। इन्होंने बताया कि मेरे पिता क्रिश्चियन थे लेकिन मेरी मां पांरपरिक हिन्दू परिवार से ताल्लुक रखती थी। इस दो विभिन्न रीतिरिवाजों में समन्वय बना कर चलना बहुत आश्चर्यजनक रहा।
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