वृंदावन में परिक्रमा मार्ग स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर में प्रभु को ज्येष्ठ मास की भीषण गर्मी से राहत दिलाने के लिए मंगलवार को एकादश फल और 108 घड़ों के जल से स्नान कराया गया। (सभी फोटो: अमर उजाला ब्यूरो, वृंदावन, मथुरा, वाराणसी)
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'गर्मी से बेहाल' हुए जगन्नाथ, 108 घड़ों के जल से हुआ स्नान
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मंदिर सेवायत स्वामी ज्ञानप्रकाश महाराज ने बताया कि जेठ की भीषण तपिश झेलने के कारण भगवान को ठंडक प्रदान करने के लिए ज्येष्ठ पूर्णिमा को जलयात्रा सेवा का आयोजन होता है। इसमें विधिविधान से भगवान जगन्नाथ को सहस्र धारा स्नान कराया जाता है। जिससे प्रभु को गर्मी से राहत मिल सके।
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मान्यता है कि स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ को बुखार चढ़ जाता है और प्रभु अस्वस्थ हो जाते हैं। ज्ञानप्रकाश महाराज ने बताया कि भगवान को स्वस्थ करने के लिए परंपरानुसार उनका जड़ी-बूटी, औषधि और गर्म पदार्थों के सेवन आदि से इलाज किया जाता है। तब कहीं जाकर भगवान 15 दिन पश्चात भक्तों को दर्शन देते हैं। इस वर्ष पुरुषोत्तम मास पड़ने के कारण भगवान जगन्नाथ 45 दिन बाद आगामी 18 जुलाई को दर्शन देंगे।
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पूर्णिमा के अवसर पर मंगलवार को शाह बिहारी मंदिर में सायंकाल हुए जल उत्सव में ठाकुर राधा रमणलालजू (श्रीजी) ने जलविहार किया। इस मौके पर भव्य जलमहल सजाया गया। मंदिर प्रांगण में ठाकुरजी की झांकी के दर्शनों को श्रद्धालुओं में भारी भीड़ रही। ठाकुरजी को शीतलजल पेय और फलों का विशेष भोग भी लगाया गया।
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जलविहार उत्सव की शृंखला में शाह विहारी मंदिर के बगीचे में फव्वारे चलाए गए और विभिन्न प्रकार के फूलों से भव्य बंगला सजाया गया। जिस सिंहासन पर ठाकुरजी बिराजे हुए थे उसके नीचे जल झालर बह रही थी। ठाकुरजी जलविहार निकुंज में जलयात्रा के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं में होड़ देखी गई। प्रशांत शाह ने बताया कि यह आयोजन हर वर्ष ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा पर आयोजित होता है।
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मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर मंगलवार को भगवान जगन्नाथ की परंपरागत स्नान यात्रा हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। भागवत भवन स्थित भगवान जगन्नाथजी के मंदिर में पूर्णिमा के दिन स्नान यात्रा का शुभारंभ शाम पांच बजे वैदिक रीति से हुआ। ठाकुरजी को फल भोग के बाद शाम साढ़े पांच बजे विग्रह को मंदिर की परिक्रमा कराकर पूजा आचार्यों द्वारा पंचामृत से दिव्य अभिषेक कराया गया। शाम छह बजे विशेष शृंगार आरती की गई।
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गणेश जी के शृंगार में भगवान जगन्नाथ ने भक्तों को दर्शन दिए। इस यात्रा के बाद भगवान जगन्नाथ के दर्शन अब 18 जुलाई को होंगे। इस अवसर पर प्रबंध समिति के सदस्य गोपेश्वर नाथ, संयुक्त मुख्य अधिशासी राजीव श्रीवास्तव, विशेष कार्याधिकारी गिर्राज शरण गौतम, अनुराग पाठक, पूजाचार्य विंध्येश्वरी प्रसाद अवस्थी आदि उपस्थित थे।