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सपने अधूरा छोड़ गए रवींद्र जैन, जानें क्या था उनका सपना

Sat, 10 Oct 2015 08:00 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, अलीगढ़
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संगीत के सुरों में अध्यात्म का अहसास पिरोने वाले प्रसिद्ध संगीतकार रविंद्र जैन का शुक्रवार को मुंबई में बीमारी के बाद निधन हो गया। वह 71 वर्ष के थे। उनके निधन का समाचार सुनकर मुंबई से अलीगढ़ तक शोक की लहर दौड़ गई। अलीगढ़ में कनवरी गंज में रह रहे उनके परिजन मुंबई के लिए रवाना हो गए हैं। (ब्यूरो/अमर उजाला,अलीगढ़)
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रविंद्र जैन के परिवार में उनकी पत्नी श्रीमती दिव्या जैन और बेटा आयुष्मान जैन है, जो कि मुंबई में ही कक्षा 12 में पढ़ रहा है। सात भाई और एक बहन में रविंद्र जैन चौथे नंबर के थे। संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें इसी वर्ष पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
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28 फरवरी 1944 को कनवरी गंज के मशहूर वैद्य इंद्रमणि जैन और श्रीमती किरन जैन के यहां रविंद्र जैन का जन्म हुआ था। वह भले ही दिन के उजाले को नहीं देख सकते थे लेकिन बचपन से ही वह संगीत की अलौकिक लौ को पहचान गए थे। बचपन में रविंद्र जैन प्रसिद्ध जैन संत ध्यानांत्रजी और बुधजैन जी के भजन गाया करते थे।

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इसको देखते हुए परिजनों ने उनको संगीत की विधिवत शिक्षा दिलवाने का इंतजाम किया। संगीत की प्रारंभिक शिक्षा उन्होंने पंडित जीएल जैन और पंडित जनार्धन शर्मा से हासिल की। फिल्मों में रविंद्र जैन का सफर 1960 में कोलकाता से शुरू हुआ। इसके 10 साल बाद प्रतिभूषण भट्टाचार्य उन्हें मुंबई ले आए और अपनी फिल्म क्रांति और बलिदान में बतौर संगीतकार मौका दिया।
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फिल्म चितचोर के लिए उन्हें बेस्ट म्यूजिक डायरेक्ट का फिल्म फेयर अवार्ड भी दिया गया। चोर मचाए शोर (1974), गीत गाता चल (1975), चितचोर (1976), अखियों के झरोखों से (1978), राम तेरी गंगा मैली (1986), दो जासूस, हिना आदि उनकी प्रसिद्ध फिल्में हैं जिनके संगीत ने धूम मचाई।
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हिंदी फिल्मों के अलावा उन्हें सैकड़ों पंजाबी, मराठी, भोजपुरी और क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों में संगीत दिया। प्राइवेट एलबम रिलीज किए। रामानंद सागर के मशहूर टीवी धारावाहिक रामायण में संगीत दिया।वह स्वयं बहुत अच्छे गायक और गीतकार भी थे। प्रसिद्ध गायक यशुदास के साथ रविंद्र जैन के गहरे संबंध रहे। राजश्री प्रोडक्शन और राजकपूर की आर के प्रोडक्शन के साथ रविंद्र जैन के गहरे संबंध थे।
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कुछ महीने पहले दिल्ली में पद्मश्री सम्मान प्रदान किया गया था। उसे प्राप्त कर सबसे पहले अलीगढ़ आए और सम्मान को अलीगढ़ को समर्पित किया। उस समय उन्होंने कहा था कि अलीगढ़ में एक संगीत एकेडमी खोलने की तैयारी है। उसके लिए पनैठी के पास जमीन भी देखी थी।

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इसी मौके पर रविंद्र जैन अलीगढ़ में हो रही कलात्मक गतिविधियों के विषय में जानकारी भी की थी। इसके अलावा गांधी पार्क पर वह अपने पिता की स्मृति में स्थापित होने वाली मूर्ति का उद्घाटन भी करने की इच्छा व्यक्त करते । उसका निर्माण अभी चल ही रहा है। इसका शिलान्यास कुछ दिन पहले रविंद्र जैन ने ही किया था।

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रविंद्र जैन आखिरी सांस तक संगीत के लिए समर्पित रहे। नागपुर में उनका शो होना था। चार दिन पहले वह वहीं थे। अचानक तबियत खराब हुई तो उन्हें एयर एंबुलेंस से मुंबई के लीलावती अस्पताल में लाया गया। यहां पर उनका उपचार हो रहा था। उनके नाती विशाल जैन ने बताया कि शुक्रवार को चार बजे उनके निधन का समाचार मिला।

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अलीगढ़ से वह स्वयं, उनकी मां त्रिशाला नगेंद्र जैन, युवराज जैन, अरुण जैन आदि मुंबई जा रहे हैं। रविंद्र जैन के एक भाई तरुण जैन एडीए सासनी गेट में रहते हैं। वह बिजली विभाग से रिटायर वरिष्ठ अभियंता हैं।फिल्मी दुनिया में लंबा वक्त गुजार चुके प्रसिद्ध गीतकार गोपाल दास नीरज कहते हैं कि मुझे पता चला है कि गुर्दे की बीमारी के चलते रविंद्र जैन का निधन हो गया। यह जानकर बहुत धक्का लगा। वह बहुत ही जीनियस थे।

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वे केवल संगीतकार और गायक ही नहीं बल्कि कवि, कलाकार और गजलकार भी थे। इसके साथ ही विनम्र और सच्चे इंसान भी थे। फिल्मों में लोकप्रियता हासिल करने के बाद भी उन्होंने अपनी शालीनता नहीं छोड़ी। उन्होंने दोहों के माध्यम से रामायण की विभिन्न विभिन्न स्थितियों का वर्णन किया है।रामायण सीरियल में दिया गया उनका संगीत और उनके  बोल हमेशा अमर रहेंगे। कुछ दिन पहले उनकी लिखी एक किताब की भूमिका मैंने ही लिखी थी।
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अब ये विश्वास नहीं होता है कि वह इतनी जल्दी साथ छोड़कर चले जाएंगे। ऐसा शायद इसलिए है कि ‘सिर्फ बिछुड़ने के लिए है ये मेल मिलाप, एक मुसाफिर हम यहां, एक मुसाफिर आप’। उनके जाने से मुंबई का एक संगीतकार ही नहीं बल्कि शहर का गौरव भी चला गया। मैं उनके निधन पर शोक व्यक्त करता हूं। ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि  उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे। साथ ही परिजनों को यह आघात सहन करने की क्षमता प्रदान करे। (सभी तस्वीरें रवींद्र जैन के फेसबुक पेज से साभार)
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