इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शुक्रवार को एक बार फिर तनाव और दहशत का माहौल रहा। कुछ घंटे पहले छात्रसंघ उद्घाटन समारोह पर रोक लगाए जाने तथा सांसद योगी आदित्य नाथ को औराई में ही गिरफ्तार किए जाने से नाराज छात्रों ने जमकर हंगामा किया। सांसद केशव प्रसाद मौर्या और विनोद सोनकर को भी रोकने तथा उनकी गिरफ्तारी से छात्रों का गुस्सा और भड़क गया। इससे नाराज दोनों सांसद भी लक्ष्मी टाकीज चौराहे पर धरने पर बैठ गए। अचानक हजारों छात्रों के सड़क पर आने से दहशत का माहौल बन गया। ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद।
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योगी आदित्यनाथ के लिए एयू में चले पत्थर, लाठीचार्ज
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रोके जाने पर नाराज युवकों की ओर से फोर्स पर पत्थरबाजी भी हुई। लक्ष्मी टाकीज चौराहा पर हंगामा बढ़ता देख पुलिस ने छात्रों पर लाठीचार्ज कर दिया। इससे चारों तरफ भगदड़ मच गई। लाठीचार्ज और भगदड़ में छात्रों के अलावा आम नागरिक भी बुरी तरह से घायल हो गए। हालांकि राहत की बात यह रही कि छात्रों ने दुकानों तथा आम लोगों को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया।
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एबीवीपी के बैनर तले विजयी विश्वविद्यालय छात्रसंघ के चार पदाधिकारियों की ओर से समारोह की घोषणा की गई थी। योगी आदित्य नाथ को मुख्य अतिथि बनाया गया था लेकिन छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह समारोह के विरोध में रहीं। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसके लिए अनुमति दे दी थी। इसके विरोध में ऋचा तथा अन्य छात्रों ने बृहस्पतिवार को अनशन शुरू कर दिया। इसके बाद देर रात जिला प्रशासन ने कार्यक्रम निरस्त कर दिया। इससे छात्रों में जबरदस्त नाराजगी रही।
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जिला प्रशासन के रोक के बावजूद समारोह आयोजित हुआ। हजारों की संख्या में छात्र भी पहुंचे। परिसर एक दिन पहले से ही छावनी में तब्दील रहा, लेकिन शुरू में फोर्स ने छात्रों को नहीं रोका। हालांकि अफसरों के आदेश पर कुछ देर बाद छात्रों का परिसर में प्रवेश रोक दिया गया। इसी दौरान वहां सांसद केशव प्रसाद मौर्या भी पहुंच गए लेकिन उन्हें लक्ष्मी टाकीज चौराहा पर रोक दिया गया। कुछ देर बाद सांसद विनोद सोनकर छात्रसंघ भवन गेट तक पहुंच गए लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें भीतर नहीं जाने दिया। इसके बाद केशव प्रसाद से वार्ता के बाद विनोद भी लक्ष्मी टाकीज पहुंच गए और धरने में शामिल हो गए। वहां यातायात बाधित होता देख दोनों सांसद जीएन झा हॉस्टल के पास आकर धरना देने लगे।
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इन घटनाक्रम के बीच आयोजकों की ओर से विश्वविद्यालय परिसर में मंच से लगातार आदित्य नाथ के आने की सूचना दी जाती रही, लेकिन योगी को इलाहाबाद आते समय औराई के पास गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद योगी आदित्य नाथ ने मोबाइल पर छात्रों को संबोधित किया। आदित्य नाथ का संबोधन समाप्त होने के बाद छात्रों पर हुजूम सड़क पर आ गया। वे धरना दे रहे सांसदों के पास जा रहे थे। पुलिस की ओर से उन्हें छात्रसंघ भवन गेट पर भीतर ही रोकने की कोशिश की गई लेकिन छात्रों ने धक्का देकर गेट खोल दिया।
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नाराज छात्रों ने पत्थरबाजी भी की। इस तरह से हजारों युवकों के सड़क पर आ जाने से दहशत फैल गई। साथ में माहौल बिगड़ने की आशंका भी बन गई। छात्रों के धरना स्थल पर पहुंचने बाद पुलिस ने दोनों सांसदों तथा दर्जनों समर्थकों को गिरफ्तार कर लिया। इससे उनका गुस्सा और बढ़ गया और उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया। हंगामा बढ़ता देख पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। फोर्स ने छात्रों को नेतराम चौराहा, बैंक रोड, विश्वविद्यालय चारों तरफ छात्रों को खदेड़ा। इसमें कई लोगों को गंभीर रूप से चोट लग गई। इस दौरान आसपास के इलाके में भय और तनाव का माहौल रहा। बाद में सांसदों तथा अन्य छात्रों को छोड़ दिया गया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में छुट्टी तथा छात्रसंघ उद्घाटन समारोह के विरोध के बावजूद सांसद योगी आदित्य नाथ को सुनने के लिए बड़ी संख्या में छात्र पहुंचे। परिसर के अलावा विश्वविद्यालय के चारों तरफ भी छात्रों और युवाओं का झुंड जगह-जगह खड़ा रहा। हालांकि आदित्य नाथ को रास्ते में ही गिरफ्तार कर लिया गया। इसकी वजह से उन्होंने मोबाइल पर छात्रों को संबोधित किया।
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विरोध को देखते हुए बवाल की आशंका थी। इसके अलावा जिला प्रशासन ने आयोजन पर रोक भी लगा दी थी। इसके मद्देनजर परिसर तथा आसपास के इलाके में भारी फोर्स मौजूद रही। लक्ष्मी टाकीज चौराहा, बैंक रोड, बालसन चौराहा समेत विश्वविद्यालय की तरफ जाने वाली हर मार्ग पर बैरिकेडिंग की गई थी। चार पहिया वाहनों को रोका जा रहा था। इन सभी के बावजूद सुबह से ही छात्रों तथा युवाओं का विश्वविद्यालय के सीनेट परिसर की तरफ पहुंचने का क्रम शुरू हो गया था। सुबह 10 बजे तक बड़ी संख्या में छात्र परिसर में प्रवेश कर चुके थे लेकिन इसके बाद उन्हें रोका जाने लगा। इसकी वजह से बड़ी संख्या में छात्र बाहर ही रह गए। इस तरह से चारों तरफ से बैरिकेडिंग किए जाने से राहगिरों को भी काफी परेशानी उठानी पड़ी।
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योगी आदित्य नाथ के स्वागत के लिए बड़ी संख्या में छात्र सुबह ही मिर्जापुर पहुंच गए थे। नेता राणा यशवंत प्रताप सिंह के नेतृत्व में पहुंचे छात्र योगी के साथ ही विश्वविद्यालय आ रहे थे लेकिन आदित्य नाथ के साथ उन्हें भी औराई में रोक लिया गया। एबीवीपी के कार्यक्रम में आ रहे सांसद योगी आदित्यनाथ को रोकने के लिए इलाहाबाद की पुलिस ने बृहस्पतिवार रात से ही घेराबंदी कर ली थी। यहां से सीओ के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच को आधी रात वाराणसी रवाना कर दिया गया था। यह पुलिस टीम शुक्रवार सुबह सांसद योगी के काफिले के पीछे लगी रही। इधर, जिले की सीमाओं पर जगह-जगह बैरियर लगाया गया था ताकि सांसद किसी सूरत में जिले में घुसने नहीं पाएं।
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बृहस्पतिवार शाम छात्रसंघ अध्यक्ष के धरने और हंगामा के बाद ही जिला पुलिस-प्रशासन ने तय कर लिया था कि सांसद योगी को इलाहाबाद विश्वविद्यालय में नहीं आने दिया जाएगा। एक पुलिस अफसर ने बताया कि लखनऊ से स्पष्ट आदेश आया कि योगी आदित्यनाथ को जिले में नहीं आने देना है। इसके बाद देर रात सीओ अलका भटनागर के साथ क्राइम ब्रांच की टीम वाराणसी भेज दी गई। गोरखपुर से आकर योगी आदित्यनाथ रात में वाराणसी के आश्रम में ठहरे थे। शुक्रवार सुबह योगी आश्रम से निकलकर दो-तीन जगहों पर गए तो इलाहाबाद के अलावा वाराणसी पुलिस भी रोक-टोक करती रही।
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एक जगह पर योगी को एसपी सिटी वाराणसी ने रोका तो उन्होंने इस पर रोष जताया फिर विंध्याचल में दर्शन-पूजन के लिए रवाना हो गए। सांसद योगी के काफिले के पीछे लगी रही इलाहाबाद की क्राइम ब्रांच और सीओ अलका। यह टीम इलाहाबाद में अफसरों को लगातार योगी के मूवमेंट की जानकारी देती रही। विंध्याचल के बाद इलाहाबाद आते वक्त भदोही में पुलिस ने योगी को रोक लिया तो इलाहाबाद पुलिस टीम लौट आई। यहां भी भदोही और मिर्जापुर से सटी जिले की सीमा पर एसपी गंगापार समेत कई पुलिस अधिकारी बैरियर पर नाकाबंदी कर मौजूद रहे।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय बृहस्पतिवार को आधी रात के बाद शर्मनाक घटना हुई। अनशन पर बैठी छात्रसंघ अध्यक्ष ऋचा सिंह तथा समर्थकों को मनाने पहुंचे चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर एनके शुक्ला के साथ वहां मौजूद लोगों ने हाथापाई कर दी। इस तरह से चीफ प्रॉक्टर से बदतमीजी पर वहां मौजूद अन्य शिक्षक, सुरक्षा कर्मी और छात्र हतप्रभ रह गए। शिक्षकों त्रथा विश्वविद्यालय के अफसरों में इससे काफी नाराजगी है। विश्वविद्यालय प्रशासन की शुक्रवार को हुई बैठक में घटना में शामिल युवाओं को चिह्नित कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई का निर्णय लिया गया। सोमवार को विश्वविद्यालय खुलने पर इस पर मुद्दे पर फिर बैठक होगी।
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इससे इतर ऋचा के समर्थकों और एबीवीपी से जुड़े छात्रों के बीच कार्यक्रम स्थगित करने को लेकर पहले से बहस चल रही थी। चीफ प्रॉक्टर तथा अन्य शिक्षकों के साथ बदतमीजी के बाद विवाद और बढ़ गया। आयोजन के समर्थन में पहुंचे कुछ लोगों ने ऋचा तथा समर्थकों के साथ हाथापाई की। ऋचा का आरोप है कि चीफ प्रॉक्टर नशे में थे। उनमें निर्णय लेने की क्षमता नहीं थी। ऋचा का यह भी कहना है कि महामंत्री सिद्धार्थ सिंह गोलू के नेतृत्व में एबीवीपी के कार्यकर्ताओं ने अनशन कर रहे लोगों पर हमला बोल दिया लेकिन विश्वविद्यालय के अफसर और सुरक्षा कर्मी दूर खड़े होकर तमाशा देखते रहे। ऋचा ने कर्नलगंज थाने में एफआईआर भी लिखाई है। ऋचा के समर्थन में कई पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष भी धरना स्थल पर पहुंचे। आइसा, रुस्तम कुरैशी, सुनील मौर्य, शालू यादव, एआईडीएसओ के भीम सिंह चंदेल, ब्रिजमोहन, आईपीएफ के राजेश सचान, इंसाफ अभियान के सौरभ त्रिपाठी आदि ने ऋचा तथा समर्थकों पर हमले की निंदा की। एआईडीएसओ से जुड़े छात्रों ने चीफ प्रॉक्टर के इस्तीफे की भी मांग की।