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यूपी की इस बहू ने किया ऐसा काम, आप भी करेंगे सलाम

Fri, 13 Mar 2015 03:30 PM IST
सत्येन्द्र राय/अमर उजाला, वाराणसी
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टॉयलेट के लिए बेटियों को इसी तरह से आवाज उठानी चाहिए। मुझे इस बात का ज्यादा दुख था कि मेरे ससुराल वालों का बेटियों की इस पीड़ा की ओर कभी ध्यान ही नहीं गया। यह कह रही हैं काशी भेलूपुर की खुशबू शर्मा, जो घर में टॉयलेट न होने के कारण अपनी ससुराल भदोही गांव चकबीरा (शुकुलपुर) छोड़कर अपने मायके आ गईं। उनकी प्रेरणा स्वच्छता अभियान की ब्रांड अंबेसडर विद्या बालन की विज्ञापन में सीख हो या फिर मध्य प्रदेश से सिहोर अनीता नारे, मगर यह तो तय है खुशबू की खुशबू तो फैल चुकी है। इसमें पूर्वांचल ही नहीं सभी के लिए स्वच्छता और उससे भी जरूरी सुरक्षा के लिए स्पष्ट संदेश है।
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खुशबू ने ससुराल वालों को शौचालय बनवाने के लिए पूरा वक्त दिया कि मगर ऐसा हुआ नहीं। खुशबू की शादी के तो करीब दो साल होने जा रहे हैं मगर जब गौने के बाद ससुराल स्थायी रूप से रहने पहुंचीं तो तमाम कमियों को उन्होंने नजरअंदाज कर ससुराल वालों से अगर कुछ मांगा तो यही कि वे उसके लिए घर में एक टॉयलेट बनवा दें। खुशबू कहती हैं कि खुले में शौच करने की बात तो मैंने कभी सोची भी नहीं थी। मुंह अंधेरे उठना और रात का इंतजार करना बेहद अखरता था। ऐसे में बाहर न जाना पड़े इसके लिए मैंने खाना-पीना तक छोड़ दिया, जिसका असर मेरी सेहत पर भी पड़ा। मैं अक्सर बीमार रहने लगी।
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खुशबू ने ससुराल वालों को टॉयलेट बनवाने का पूरा मौका दिया। ससुराल वालों के कहने पर ही अपने घरवालों को भी ये बात नहीं बताई। ससुराल वाले उसकी विदाई के लिए आए तो उसने टॉयलेट बनवाने की बात रख ससुराल जाने से मना कर दिया। ससुराल वालों का टालमटोल चलता रहा और आखिरकार वादों और मानमनौव्वल पर गईं। जब देखा इस ओर किसी का ध्यान नहीं तो ससुराल छोड़कर मायके चली आईं। आखिरकार ससुरालियों को उसकी बात माननी पड़ी। ससुराल में अब टॉयलेट बन रहा है।
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घर में शौचालय का होना कितना जरूरी है, इसका अहसास आज हमें हुआ है, बहू ने आंख खोल दी है, अब जब तक घर में शौचालय नहीं बनेगा, कोई दूसरा काम नहीं करूंगा। यह कहना है औराई विकास खंड के चकबीरा (शुकुलपुर) गांव के शर्मा बस्ती निवासी खुशबू के ससुर प्रेम सागर शर्मा का। उन्होंने कहा बहू की इस जिद पर पहले गुस्सा आया पर अब बात समझ में आ गई है। गांव वालों के लिए भी खुशबू प्रेरणा बन चुकी है उन्होंने भी कहा कि हम भी अपने घरों में टॉयलेट बनवाने जा रहे हैं, बहुओं के साथ अब बेटियों के लिए भी इस सुविधा के बारे में हमें सोचना है।
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