मुरादाबाद पुलिस अकादमी का संग्रहालय गौरव का एहसास कराने के साथ ही क्रांति का इतिहास भी समेटे है। (स्टोरी- पुनीत शर्मा, अमर उजाला)
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तस्वीरें: क्रांतिकारियों के वे हथियार, जिनसे कांपते थे अंग्रेज
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जिन हथियारों को छीनकर क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों के दांत खट्टे किए थे...आजादी दिलाने में जिन हथियारों की कहीं न कहीं भूमिका रही वह असलहे यहां आज भी अपनी चमक बिखेर रहे हैं।
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छड़ी वाली रायफल, खिलौने जैसी दिखने वाली पिस्टल, हैंड ग्रेनेड और वह तमंचे भी यहां मौजूद हैं जिनको हाथों में लेकर आजादी के दिवानों ने अंग्रेजों को न जाने कितनी बार डराया होगा।
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आजादी की जंग जीतने और देश का संविधान बनने तक क्रांतिकारियों के त्याग और बलिदान के तमाम चिह्न देश के हिस्सों से जमा किए जा रहे थे।
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थानों और पुलिस के दफ्तरों में वह तमाम हथियार और उपकरण थे जिन्हें क्रांतिकारियों ने छीने तो अंग्रेजों से ही थे लेकिन बाद में अंग्रेजों ने हासिल कर उन्हें जब्त किया था। आजादी के बाद यह हथियार मुरादाबाद की पुलिस अकादमी में भेज दिए गए।
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सबसे पहला शस्त्र यहां 10 अगस्त 1912 को इलाहाबाद पुलिस द्वारा बरामद किया गया खिलौने जैसा पिस्तौल है।
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फतेहगढ़ पुलिस ने 1943 में छड़ी जैसी बंदूक बरामद की थी जिसे अकादमी में रखवाया गया है।
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आजमगढ़ के पुलिस कप्तान ने 4 अक्तूबर 1949 को इंग्लिश रिवाल्वर अकादमी के संग्रहालय में जमा कराई।
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मथुरा पुलिस ने तो बड़ी संख्या में असलहे और कारतूस 30 अगस्त 1948 को जमा कराए।
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मुजफ्फरनगर पुलिस द्वारा बरामद की गईं बंदूकें यहां 1949 में जमा कराई गईं थीं।
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बहराइच पुलिस ने 1949 में रिवाल्वर यहां रखवाए। बुलंदशहर पुलिस ने भी 24 मार्च 1954 को बंदूकें यहां रखवाईं। यह बंदूकें 1948 में बरामद हुईं थीं।
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रायबरेली, लखनऊ, आगरा, कानपुर, बरेली, मेरठ, गाजियाबाद, दिल्ली, देहरादून, हरिद्वार और रुड़की पुलिस ने वर्ष 1948 से 49 तक बरामद किए गए असलहे पुलिस अकादमी के संग्रहालय में जमा कराए हैं।