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कबाड़ हो चुके विमानों के भरोसे एयरफोर्स, कैसे बनेंगे महाशक्ति?

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सीएजी ने शुक्रवार को संसद में भारतीय सेना द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे विमानों और हेलिकॉप्टर पर एक रिपोर्ट पेश की जिसमें उनके पुराने हो जाने और उनके रखरखाव जैसे अहम मुद्दों से सदन को अवगत कराया। इसके अलावा पुरानी पड़ चुके विमानों को जल्द से जल्द बदलने की बात भी कही। जानिए कौन हैं ये विमान।
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कबाड़ हो चुके विमानों के भरोसे एयरफोर्स, कैसे बनेंगे महाशक्ति?

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चीता हेलिकॉप्टर- इस हेलिकॉप्टर निर्माण फ्रांस ने किया था जिसका इस्तेमाल दुनिया के कई अन्य देश भी करते थे। फिलहाल भारतीय वायु सेना में भी इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। इसे 1986 में सेना में शामिल किया गया था। तब से लेकर अबतक यह निरंतर अपनी सेवाएं देता आया है लेकिन सीएजी ने इसके सेवा की अवधि को लेकर सवाल उठाया है।
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सीएजी ने शुक्रवार को सदन के सामने जो रिपोर्ट रखी उसके मुताबिक चीता हेलिकॉप्टर के बेड़े में मौजूद 181 हेलिकॉप्टरों में से 129 ऐसे हैं जो 30 साल से भी ज्यादा पुराने हैं जिसको बदलने की जरूरत है। रिपोर्ट के मुताबिक 2010 से लेकर अबतक 30 मिलिटरी हेलिकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हुए जिनमें 50 लोगों की जान जा चुकी है।

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चेतक हेलिकॉप्टर- सीएजी की इस सूची में चेतक हेलिकॉप्टर का भी नाम शामिल है। इस मल्टिरोल हेलिकॉप्टर पिछले 40 सालों से भारतीय वायु सेना को अपनी सेवा दे रहा है।
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जगुआर बॉम्बर- यह एक एंग्लो-फ्रेंच लड़ाकू विमान है जिसने पहली बार 1968 में उड़ान भरा था। उसके बाद हिंदुस्तान एयरोनॉटिकल लिमिटेड ने लाइसेंस एग्रीमेंट के तहत इसका निर्माण भारत में ही शुरू कर दिया। 1981 में इसका पहला किट भारत आया था जिसको यहीं पर असेम्बल किया गया।
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इसका मुख्य काम बॉम्बर के तौर पर लिया जाता है। जिसका इस्तेमाल ब्रिटेन, फ्रांस और ओमान जैसे देश भी करते थे। इन देशों ने इस विमान की सेवा बंद कर दी है लेकिन भारत अभी भी इसका इस्तेमाल कर रहा है।
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मिराज 2000- इसी क्रम में मिराज 2000 का भी नाम आता है। फ्रांस निर्मित इस विमान ने पहली बार 80 के दशक में उड़ान भरी थी उसके बाद 1980 में इसे भारतीय वायु सेना में शामिल कर लिया गया था। करीब 35 साल पुराने इस विमान को अब नए तकनीक की जरूरत है।

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सुखोई-30 एमकेआई- सुखोई भारतीय वायु सेना का सबसे अत्याधुनिक लड़ाकू विमान है। इस निर्माण रूस में हुआ था। भारत और रूस के बीच हुए एक करार के बाद हिंदुस्तान एयरोनाटिकल लिमिटेड ने साल 1995 में स्वदेश में ही इसके निर्माण की प्रक्रिया शुरू की। इसके निर्माण में रूस ने पूरी मदद की।

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इस विमान को 2002 में पहली बार परीक्षण के लिए उतारा गया था और साल 2004 में इसे भारतीय वायु सेना के बेड़े में शामिल किया गया था। करीब 20 साल पुराने इस प्रोजेक्ट पर भी सीएजी ने सवाल उठाए हैं।

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सीएजी के मुताबिक सुखोई की सर्विस क्षमता 55-60 फीसदी ही रह गई है जबकि इसके लिए निर्धारित मानक 75 फीसदी है। फिलहाल इसकी गिनती दुनिया के सबसे खतरनाक और आधुनिक लड़ाकू विमानों में होती है।

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अवाक्स- सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक अवाक्स भारतीय वायु सेना के लिए एक बड़ा ही महत्वपूर्ण तकनीक है जिसे आईएल-76 पर लगाया गया है। यह एयरबॉर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम है जो हवा में उड़ते हुए दुश्मनों के जहाज पर नजर रख सकता है। इसके अलावा यहां से देश के अन्य महत्वपूर्ण उड़ान पर भी नियंत्रण किया जा सकता है।
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सीएजी रिपोर्ट में इसे देश का सबसे महंगी और महत्वपूर्ण संपत्ति है। भारत के पास महज 3 ही फॉल्कन रडार सिस्टम हैं और इसनी तय सीमा के अनुपात में सालाना महज 43 फीसदी ही इसकी सेवा ली जाती है। इसकी सेवा सीमा बढ़ाने की जरूरत है।
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