नए राइफल की खोज और विकास के लिए साल 2011 में शुरू हुई सेना की कवायद अब पुराने राइफल में कई और महत्वपूर्ण बदलाव करने में बदल गई है।
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इसी राइफल के सहारे भारतीय सेना करेगी दुश्मनों का सीना छलनी
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नए हथियार को बनाने की जिम्मेदारी एक बार फिर भारतीय रक्षा अनुसंधान अनुसंधान संगठन (डीआरडीओ) ने उठाई थी लेकिन वह उसे पूरा नहीं कर पाई। हालांकि उसने इंसास का एक उन्नत संस्करण जरूर पेश किया।
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विगत चार सालों में डीआरडीओ जब नए राइफल का विकास करने में असफल रही तो सरकार ने उसके साथ अनुबंध का खत्म कर दिया। तो आइए जानते हैं क्या है इंसास राइफल और आखिर क्यों सेना इसे बदलना चाहती है।
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क्या है इंसास और क्या हैं खामियां: इंडियन स्माल आर्म्स सिस्टम (इंसास) को भारतीय रक्षा अनुसंधान संगठन ने बनाया था। यह पूरी तरह से स्वदेश में निर्मित हथियार है।
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इसका इस्तेमाल 1996 में शुरू हुआ था लेकिन यह कभी भी सेना के उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया। सेना अभी भी इसी राइफल का इस्तेमाल करती है।
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यह राइफल इस्तेमाल के दौरान जाम हो जाता है जिसकी मुख्य वजह ऑयल स्प्रे का ठीक से काम न करना है।
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इसके अलावा फायरिंग के दौरान इसका गैस रिकवर सिस्टम भी कभी कभी ठीक से काम नहीं करता।
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इंसास के इस्तेमाल की सबसे बड़ी खामी उसकी मैगजीन भी है। मैगजीन प्लास्टिक की बनी होने के कारण कई बार टूट जाती थी जिससे युद्ध के दौरान सैनिकों की जान पर खतरा बन सकता है।
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इन सभी परेशानियों को ध्यान में रखते हुए सेना ने 2011 में एक नए राइफल की खोज शुरू की लेकिन चार साल बाद भी वह इंसास का विकल्प खोजने में सफल नहीं हो पाई।
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डीआरडीओ ने इंसास में ही कई अहम बदलाव करके दो नए 'एक्सकैलिबर' राइफल बनाए हैं जिसका दो स्थानों पर परीक्षण चर रहा है लेकिन वह भी पूरी तरह से सेना के मानकों पर खरा नहीं उतर पाया है।
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कुछ अधिकारियों का यह मानना है कि इंसास राइफल को बदलने की सख्त जरूरत है लेकिन सेना को विश्वस्तरीय राइफल की खोज है। इस दौरान एक्सकैलिबर इंसास से बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।