यह सूचना डराने के लिए नहीं बल्कि सतर्क रहने के लिए है। जिस कुरकुरे बिस्कुट के लजीज स्वाद में आप आनंदित होते हैं, उसमें भी हानिकारक पदार्थों की मिलावट हो रही है। मिलावटखोर अपना माल बेचने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। ऐसे में अधिक सावधान रहने की जरूरत है। (रिपोर्ट: अमर उजाला ब्यूरो, दिल्ली)
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खबरदार! कहीं आप भी तो नहीं खा रहे मिलावटी बिस्कुट
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ब्रांड पर न करें यकीन: ब्रांड पर जान छिड़कना उपभोक्ताओं की आदत बन गई है। जबकि नेस्ले की मैगी, मदर डेरी के दूध, अमूल के दूध के सैंपल फेल हो रहे हैं। ब्लू बेरी की आइसक्रीम का नमूना फेल हुआ है। इसलिए सावधानी और शिकायत ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय है।
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10 में पांच नमूने फेल: गत वर्ष उत्तराखंड में एक बिस्कुट की कंपनी के 10 में से पांच नमूने गुणवत्ता में फेल हो गए। मुरादाबाद में भी एक कंपनी का बिस्कुट मानकों पर फेल पाया गया। केक, चाकलेट व बेकरी में अरारोट की मिलावट होती है। कॉफी, चाकलेट में चिकोरी की मिलावट होती है।
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मिलावटी मैदे का प्रयोग: बिस्कुट बनाने में मैदे का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल होता है। ऐसे में मिलावटखोर मुनाफे के लिए इसमें सफेद पाउडर, दूसरे अनाजों के पाउडर मिला देते हैं। दूसरे अनाज का पाउडर नुकसान नहीं करता लेकिन सफेद पाउडर से पाचन तंत्र खराब हो जाता है।
कैसे करें पहचान: बने पदार्थ की पहचान थोड़ा मुश्किल है। इसके लिए प्रयोगशाला की मदद लेनी होगा। इसका सबसे अच्छा उपाय खाद्य सुरक्षा एवं संरक्षण विभाग में शिकायत ही है।