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गुजरात के स्थानीय निकाय चुनाव परिणामों की ये रहीं 10 खास बातें

Thu, 03 Dec 2015 10:01 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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राजकोट जिले के भाजपा अध्यक्ष नगदान छावड़ा जो चुनावों पर लगातार अपनी निगाह गड़ाए हुए थे। यही नहीं पोलिंग बूथों पर उन्होंने बाउंसर तक लगा रखे थे। वो भी चुनाव हार गए।
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इस चुनाव में एक पति अपनी ही पत्नी के हाथों मात खा गया। राज्य के वलसाड़ जिले में कलवाड़ा तालुका पंचायत में उन्होंने अपने पति हरीश को हरा दिया। जय श्री कांग्रेस की उम्मीदवार थी और दोनों के बीच तलाक का मुकदमा बीते 9 साल से चल रहा है।
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कांग्रेस ने घर-घर की कहानी यानी सास बहु के झगड़े को राजनीति की दहलीज तक लाने में सफल रही । खादाधर तालुका पंचायत से कांग्रस ने 60 वर्षीय शांतुबेन को उनकी बहु 34 वर्षीय हीरेबेन के खिलाफ खड़ा किया जिसमें वो 97 मतों से जीत गईं।

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इतना ही नहीं पाटीदार हलचल भी कांग्रेस के लिए कुछ खास कामगर साबित नहीं हुआ। बापूनगर से भारत कॉलोनी से सटी सभी सीटे जहां पाटीदार समाज के लोग थे, वहां तो प्रभाव दिख रहा था। इसी प्रभाव के चलते इस वार्ड की सारी 4 सीटें कांग्रेस के पास गईं लेकिन अन्य किसी भी पाटीदार बहुल क्षेत्र से भाजपा के खिलाफ वोट नहीं गया।
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पटेल आरक्षण आंदोलन के सहारे हार्दिक पटेल गुजरात की राजनीति में तेजी से ऊभरे थे लेकिन उनका जादू उन्हीं के विरमगाम में नहीं चल पाया और इस तालुका पंचायत में कांग्रेस और भाजपा ने बराबर की सीटें निकाली।
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भाजपा अल्पसंख्यकों को रिझाने में भी असफल रही। उसने इन चुनावों में 500 मुस्लिम प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था जिसमें ऊना नगर पालिका को छोड़ दें तो बाकी सभी जगह यह प्रयोग असफल साबित हुआ।
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वहीं इस चुनाव में एक इतिहास भी रचा गया। अहमदाबाद म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन में 95 पुरूषों के मुकाबले 97 महिलाएं चुन कर आईं है। यूं तो इसमें महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत का आरक्षण भी एक महत्वपूर्ण तत्व है लेकिन यह अपने आप में एक इतिहास रच दिया गया।

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गुजरात के 8 जिलों में भाजपा के खाते में एक भी तालुका पंचायत की सीट नहीं आई वहीं कांग्रेसका खाता हर तालुका पंचायत में खुला है।

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सभी सीटों को मिलाकर देखे तो भाजपा और कांग्रेस की जीती हुई सीटों में नाम मात्र का अंतर है। जहां कांग्रेस ने 46 प्रतिशत सीटों पर अपनी जीत हासिल की वहीं भाजपा 48 प्रतिशत पर आ गिरी है।

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2010 में भारतीय जनता पार्टी ने 323 में से 269 सीटें जीती थी, वहीं 5 साल बाद पार्टी ने केवल 126 सीटें जीती जो कुल सीटों का केवल 44 प्रतिशत ही है।
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गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों में जहां सत्तारूढ़ दल भारतीय जनता पार्टी ने अपनी पकड़ बनाए रखी है वहीं कांग्रेस ने भाजपा को ग्रामीण इलाकों में झटका देते हुए शानदार वापसी की है। आईए आपको बताते हैं वो दस बाते जो इस चुनाव में खास मायने रखती हैं।
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