‘देश की धड़कन’ थमने वाली है। दशकों से कलाई पर वक्त का अहसास कराने वाली एचएमटी की घड़ियां अब नहीं दिखेंगी। रोचक तस्वीरों इतिहास।
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थम जाएगी HMT की टिक-टिक, तस्वीरों में देखिए पीछे छूटा वक्त
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28 जनवरी 1961 की तारीख वक्त के लिए खास है। इसी दिन उस समय के औद्योगिक मामलों के मंत्री मनुभाई शाह ने बैंगलुरु में हिंदुस्तान मशीन टूल्स के पहले कारखाने का उद्घाटन किया। तस्वीर में एचएमटी के मैनेजिंग डायरेक्टर एमके मथुला भी देखे जा सकते हैं।
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बैंगलुरु के पहले कारखाने में बनी पहली घड़ी देश के पहले प्रधानमंत्री की कलाई पर सजी।
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28 अक्टूबर 1971 में दूसरे कारखाने की बुनियाद रखी कंपनी के डायरेक्टर एसएम पाटिल ने रखी।
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कारखाने में काम करने वाले कर्मचारियों को जापानी एक्सपर्ट्स ने खास ट्रेनिंग दी थी।
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साल 1970 में कंपनी का दौरा करने पहुंचे मुख्य न्यायाधीश एएन राय।
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घड़ियों तैयार किया जाने वाला कंपनी का सब-असेंबली कंपाउंड।
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साल 1970 में ही कश्मीर में एक और कारखाना खोलने की रणनीति तैयार हुई।
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घड़ी विशेषज्ञों द्वारा बारीकी से जांच की जाती हुई।
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कारखाने में रोजाना 13 हजार घड़ियां तैयार होती थीं।
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लोगों की कलाई पर सजाने के लिए तैयार किए गए घड़ियों के कुछ डिजाइन।
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साल 1983 में कर्नाटक के गवर्नर ने बैंगलुरु के लालबाग बगीचे में एचएमटी सिटीजन फ्लॉवर क्लॉक का उद्घाटन किया।
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साल 1998 में जब एचएमटी की घड़ियों की संख्या 5 करोड़ हुई तो वो घड़ी राष्ट्रपति आर वेंकटरमन को भेंट की गई।
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एचएमटी ने दृष्टिहीनों के लिए भी घड़ियां बनाईं।
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एचएमटी का शेरपा मॉडल।
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मैसूर के चामुडेश्वरी मंदिर में एचएमटी घड़ी और इश्तेहार की एक प्लेट लगाई गई।
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साल 2002 में बैंगलुरु के ओंकार हिल्स में बने घंटाघर में एचएमटी की घड़ी लगाई गई। इस घंटाघर को लंदन के बिग बेन से बड़ा बनाने की योजना थी।
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साल 2006 में दिल्ली में लगे क्लॉक फेयर की एक तस्वीर।
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साल 1980 के दौरान एचएमटी ने तिरुपति बाला जी वाली घड़ी निकाली तो स्विस कंपनी राडो ने भी इसकी नकल कर ली। जिस पर विवाद भी हुआ।
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बैंगलुरु के गंगानगर स्थित एचएमटी भवन का बाहरी दृश्य।
सोर्स-द हिंदू
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ये था वक्त बताने वाली ये घड़ियों का रोचक इतिहास। लेकिन अफसोस अब सुईयां थमने वाली है।
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गौरतलब है कि केंद्रीय कैबिनेट पहले ही भारी उद्योग मंत्रालय के तहत आने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की पांच इकाइयों (पीएसयू) को बंद करने की सैद्धांतिक मंजूरी दे चुकी है।
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बंद की जाने वाली एचएमटी की इन तीनों ही इकाइयों की सभी चल-अचल संपत्तियों का निस्तारण सरकारी नीतियों के अनुरूप किया जाएगा।
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इस राशि का इस्तेमाल इन इकाइयों में कार्यरत करीब एक हजार कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना और स्वैच्छिक विभक्तिकरण योजना (वीएसएस) की राशि देने और उनकी बकाया राशि के भुगतान में किया जाएगा।
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एचएमटी की घाटे वाली इन तीनों इकाइयों की बंदी के लिए 427.48 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी।
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कर्मचारियों को वर्ष 2007 के वेतनमान के अनुरूप स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (वीआरएस) का विकल्प दिया गया है।
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केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एचएमटी की लगातार घाटे में चल रही तीन इकाइयों को बंद करने का फैसला किया है। बंद की जाने वाली इन तीन यूनिटों में एचएमटी वॉचेज, एचएमटी चिनार वॉचेज और एचएमटी बेयरिंग्स शामिल हैं।
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दशकों तक देश के घड़ी बाजार में दबदबा रखने वाली एचएमडी घड़ियों के तीन कारखाने आखिरकार अब बंद होने वाले हैं। इसके साथ ही ‘देश की धड़कन’ के रूप में जाने वाले एक दमदार ब्रांड के एक युग का समापन भी हो जाएगा।