प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा से एक दिन पहले सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी ने अमेरिकी कंपनी बोइंग के साथ 2.5 बिलियन डॉलर यानि करीब 165 अरब रुपये के रक्षा सौदे को मंजूरी दे दी।
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मोदी अमेरिका से लाएंगे भारत के लिए ये दो बेहतरीन हेलीकॉप्टर
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यह रकम वायु सेना के लिए 22 अपाचे और 15 चिनूक हेलीकॉप्टर की खरीद पर खर्च की जाएगी। मोदी सरकार के 16 महीने के कार्यकाल में यह सबसे बड़ा रक्षा सौदा है। रूस निर्मित पुराने हेलीकॉप्टरों की परेशानियों से जूझ रही वायु सेना के लिए यह राहत भरा फैसला है। अपाचे हेलीकॉप्टर आक्रमण के लिए और चिनूक भारी सामान उठाने के लिए होगा।
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रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक इस सौदे में मौजूदा दाम पर ही भविष्य में 11 और अपाचे तथा चार अतिरिक्त चिनूक हेलीकॉप्टर की खरीद का भी प्रावधान है। इन हेलीकॉप्टरों की खरीद के लिए 2012 से ही भारत और अमेरिका के बीच बातचीत चल रही है।
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अपाचे वायुसेना के एमआई-35 की जगह तैनात किया जाएगा। इसमें घातक हेलफायर मिसाइल लगाने का प्रावधान है, जबकि चिनूक को चीन के खतरों के मद्देनजर नवगठित माउंटेन कोर में शामिल किया जाएगा। यूपीए कार्यकाल में ही थल सेना के लिए 39 अपाचे की खरीद को मंजूरी मिल गई थी। यह सौदा 2013 से अटका हुआ था। बोइंग कंपनी ने भारत सरकार के अनुरोध पर 10 बार हेलीकॉप्टरों के दाम में फेरबदल किया है।
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सूत्रों के मुताबिक बोइंग ने मुद्रास्फीति के बावजूद अपना दाम 2013 के ही आधार पर रखा है। हालांकि आखिर में कंपनी ने हाथ खड़े करते हुए कहा कि वह सितंबर से आगे अपने पुराने दाम पर कायम नहीं रह पाएगी। इस सौदे को हरी झंडी के बाद पांच साल के भीतर ये हेलीकॉप्टर वायुसेना में शामिल होना शुरू हो जाएंगे।
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इन दोनों हेलीकॉप्टरों के खूबियों पर गौर करें तो बोइंग सीएच-47 चिनूक हेलीकॉप्टर अमेरिकी वायुसेना का एक जबर्दस्त हेलीकॉप्टर है जो भारी से भारी सामान उठाने के साथ ही एक बार में कई जवानों को किसी भी जगह आसानी से पहुंचाने में सक्षम है। इस हेलीकॉप्टर में दो इंजन लगे हैं जो इसे बेजोड़ ताकत और रफ्तार देते हैं। यह हेलीकॉप्टर 315 किमी/घंटे की रफ्तार से उड़ सकता है।
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चिनूक हेलीकॉप्टर थल सीमा से लेकर समुद्री सीमा की भी निगरानी करने में सक्षम है। अगर भारत-अमेरिका की डील होती है तो जाहिर सी बात है कि इसके भारतीय वायु सेना की ताकत में अप्रत्याशित रुप से बढ़ोतरी होगी।
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इसकी क्षमता का अंजादा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह टैंकर को भी आसानी से उठा सकता है। इससे भारतीय थल सेना को ऊंचे पहाड़ियों पर टैंकर और भारी सामान ले जाने में काफी मदद मिलेगी। यह हेलीकॉप्टर फाइटर प्लेन का भी आसानी से उठा सकता है। इस चित्र में चिनूक एक एफ-15 लड़ाकू विमान को उठाता हुआ।
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इसके अलावा भारत जिस दूसरे हेलीकॉप्टर को खरीदने के लिए प्रयासरत है उसका नाम बोइंग एएच-64 अपाचे है। यह एक युद्धक हेलीकॉप्टर है जिसमें दो क्रू मेंबर बैठते हैं। इसे एएच-1 कोबरा हेलिकॉप्टर को विस्थापित करने के उद्देश्य से बनाया गया था।
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इस हेलीकॉप्टर में दो पायलट बैठ सकते हैं और दोनों ही इसे उड़ा सकते हैं। इसके अलावा यह अत्याधुनिक हथियारों से लैस है जो दुश्मन के इलाके में घुसकर तबाही मचाने में सक्षम है। यह हेलीकॉप्टर आगे तो उड़ता ही है साथ यह पीछे भी उड़ने में सक्षम है। जो इसकी मारक क्षमता अप्रत्याशित रूप से बढ़ा देती है।
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यह दुनिया का ऐसा हेलीकॉप्टर है जो 'इंवर्टेड' करने में भी सक्षम है। इसका मतलब यह है कि यह उल्टा भी हो सकता है। अगर अपाचे और चिनूक हेलीकॉप्टर भारतीय सेना के बेड़े में शामिल हो जाएंगे तो जाहिर तौर पर दुश्मन भारत की तरफ आंख उठाकर देखने की भी कोशिश नहीं करेगा।