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एयरफोर्स के गरुड़ कमांडो, जानिए कैसे तैयार होते हैं ये जांबाज

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पंजाब के पठानकोट में शनिवार तड़के एयरफोर्स स्टेशन पर हुए आतंकी हमले को नाकाम करने में वायुसेना के गरुड़ कमांडो ने अहम भूमिका निभाई। इन कमांडो ने एयरफोर्स स्टेशन के अंदर दाखिल हुए चार आतंकियों को मार गिराया। आइए जानते हैं कौन हैं गरुड़ कमांडो?
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एयरफोर्स के गरुड़ कमांडो, जानिए कैसे तैयार होते हैं ये जांबाज

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इसका गठन सितंबर 2004 में किया गया था। इस स्पेशल फोर्स में करीब 2000 कमांडो शामिल है। इनका मुख्य काम देशभर में मौजूद वायुसेना के हवाई अड्डों की सुरक्षा करना है।
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इस कमांडो फोर्स की जरूरत सबसे पहले 2001 में महसूस हुई थी जब जम्मू-कश्मीर में स्थित वायु सेना के दो हवाई अड्डों पर आतंकियों ने हमला किया। उसके बाद वायुसेना के कमांडरों ने ऐसी किसी स्पेशल फोर्स को बनाने का फैसला किया था।

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पहले इस कमांडो फोर्स का नाम 'टाइगर फोर्स' रखा गया था लेकिन बाद में इसे बदलकर 'गरुड़ कमांडो फोर्स' कर दिया गया। शनिवार को पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर हुए आतंकी हमले में इन्होंने अपनी जांबाजी का नमूना दिखाया और महज कुछ घंटों में चार आतंकियों को मार गिराया।
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गरुड़ कमांडो भारतीय वायु सेना के एक स्पेशल फोर्स का नाम है जिसमें में कुछ चुनिंदा लोगों को कड़ी ट्रेनिंग के बाद शामिल किया जाता है।
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गरुड़ कमांडो की ट्रेनिंग देश में पहले से ही मौजूद दूसरे स्पेशल फोर्सेज के जैसे दी जाती है जिसमें पैरा कमांडो और मार्कोज कमांडो फोर्स के नाम शामिल हैं।
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ये वायु सेना पुलिस की तरह तकनीकी संस्थानों की सुरक्षा नहीं करते बल्कि वायु सेना के अहम अभियानों में यह अहम भूमिका निभाते हैं।

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गरुड़ कमांडो की शुरुआती ट्रेनिंग 72 हफ्तों की होती है। इसका मतलब करीब डेढ़ साल तक। लेकिन इनकी पूरी ट्रेनिंग खत्म होने में करीब तीन साल का लंबा वक्त लगता है।

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गरुड़ कमांडो की ट्रेनिंग के दौरान इन्हें आतंकवादियों से निपटने के अलावा तरह की ट्रेनिंग दी जाती है।

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शुरुआत के पहले तीन महीनों की ट्रेनिंग के दौरान उन लोगों को छांट कर बाहर निकाल दिया जाता है जो पहले से निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरते या फिर उनकी क्षमता जवाब दे जाती है।

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दूर दराज के इलाकों में आसानी से पहुंचने के लिए इन्हें पैरा जंपिंग की भी ट्रेनिंग दी जाती है। इतने ऊंचाई कूदते समय इन्हें थोड़ा भी डर नहीं लगता।
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संयुक्त राष्ट्र शांति सेना का हिस्सा होने की वजह से गरुड़ कमांडोज केवल देश की सुरक्षा ही नहीं करते बल्कि ये दुनिया के दूर दराज इलाकों में जाकर संकट में फंसे लोगों की मदद भी करते हैं।
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