शमसाबाद कस्बा में फेसबुक पर समुदाय विशेष के खिलाफ टिप्पणी को लेकर गुरुवार को भड़की सांप्रदायिक हिंसा ने शुक्रवार सुबह आसपास के गांवों को भी अपनी चपेट में ले लिया। पुलिस की ढिलाई के चलते बेकाबू बलवाइयों ने धमैना रोड पर दो तथा ऊंचा गांव और नया बांस गांव में एक-एक धर्मस्थलों में तोड़फोड़ और आगजनी की। (अमर उजाला ब्यूरो, आगरा/शमसाबाद)
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आगरा: राहगीरों के नाम और धर्म पूछ-पूछकर की गई पिटाई
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नया बांस में तो धर्मस्थल को पूरी तरह से तहस नहस कर आग के हवाले कर दिया गया। यहां एक मेकेनिक का खोखा भी जलाया गया। कई रास्तों पर वाहनों में तोड़फोड़ की गई, राहगीरों के नाम पूछकर उन पर हमले किए गए। शमसाबाद कस्बा में अघोषित कर्फ्यू की स्थिति रही। न स्कूल खुले, न बाजार। पुलिस ने लोगों की आवाजाही बंद कर दी।
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एसओ से लेकर आईजी तक कस्बा के हालात संभालने में लगे थे, जबकि शुक्रवार दिन निकलते ही आसपास के गांवों में हिंसा की आग बड़ी तेजी के साथ फैल गई। हाथों में सब्बल और हथौड़े लेकर बाइकों पर निकले उपद्रवियों ने एक के बाद एक तीन धर्मस्थलों को निशाना बना लिया। कहीं भी पुलिस नजर नहीं आई।
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शमसाबाद से आगरा जा रहे तीन टैंकरों में बाकलपुर के पास तोड़फोड़ की गई। यहीं पर राहगीरों को नाम पूछकर पीटा गया। एक आटो से तीन सवारियों तो उतारकर उनका धर्म पूछकर पिटाई की गई। हालात बुरी तरह बिगड़ते देख अफसरों के हाथ पांव फूलने लगे।
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दोपहर को डीआईजी लक्ष्मी सिंह और एसएसपी राजेश डी मोड़क ने खुद दबिश देकर उपद्रवियों की धरपकड़ शुरू की। लेकिन शाम चार बजे ऊंचा गांव में एक और धर्मस्थल में तोड़फोड़ कर दी गई।
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उधर, बाकलपुर से लौटाए गए सांसद बाबूलाल ने आरोप लगाया कि एक समुदाय के लोगों का उत्पीड़न किया जा रहा है। निर्दोष लोग गिरफ्तार किए जा रहे हैं। अगर 72 घंटे में पुलिस प्रशासन ने निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की तो भाजपा सड़कों पर आएगी।
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शमसाबाद में गुरुवार को हुए बवाल के पीछे मुख्य रूप से थाना पुलिस जिम्मेदार रही, लेकिन शुक्रवार को हिंसा की आंच देहात तक फैली तो यह चूक आला अफसरों की रही। कस्बे के बिगड़े हालात सामान्य होने से पहले ही अधिकारी रात में अपने घर लौट आए थे।
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जरूरत वहीं पर रुककर माहौल पर नजर रखने की थी। अफसरों के जाते ही पुलिस भी आराम की मुद्रा में आ गई। नतीजा यह रहा कि बलवाइयों को धर्मस्थलों को निशाना बनाने का मौका मिल गया।
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अगर बलवाइयों की गिरफ्तारी के प्रयास ठीक से किए गए होते तो हालात इतने नहीं बिगड़ते। अगर अफसर रात में कस्बा में ही रुककर ताबड़तोड़ दबिश डलवाते तो पुलिस का खौफ रहता। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। रास्तों की नाकाबंदी भी नहीं की गई थी।
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कस्बा से बलवाई बड़े आराम से मोटरसाइकिलों से गांवों की ओर निकले। उनके हाथ में हथौड़े और सब्बल भी थे। इसके बावजूद पुलिस को पता नहीं चला। कस्बा से सटे मिश्रित आबादी वाले गांवों में पुलिस लगाने की जिम्मेदारी भी अफसरों की थी।
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पुलिस सूत्रों का कहना है कि शासन ने पूरे मामले की रिपोर्ट तलब की है। इसमें यह भी पूछा गया कि बलवे के पीछे किस किसकी लापरवाही रही। पहले दिन के बवाल में थाना पुलिस की लापरवाही सामने आने पर भी कोई एक्शन नहीं लिया गया।
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एक तो माहौल खराब था, दूसरा अफवाह खूब फैली। पुलिस पूरी तरह बेबस नजर आई। बवाल को लकर सोशल मीडिया पर भी दिन भर कई झूठी सूचनाएं चलती रहीं।
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एसएसपी राजेश डी मोड़क ने लोगों से अपील की है कि वे किसी तरह की अफवाह पर ध्यान नहीं दें। कुछ लोग अफवाहें फैलाकर अमन चैन बिगाड़ना चाहते हैं। त्योहार का सीजन है। लोग किसी के बहकावे में नहीं आएं। शमसाबाद में शांति है। पुलिस प्रशासन अफवाह फैलाने वालों पर भी कार्रवाई करेगा।