सोमवार का दिन गोरखपुर यूनिवर्सिटी के लिए खास था। इस दिन दीक्षांत समारोह का नया इतिहास जो लिखा जाना था। देशी परिधान में पहली बार होने वाले इस महा उत्सव का गवाह बनने के लिए सैकड़ों कदम यूनिवर्सिटी गेट की ओर बढ़े जा रहे थे। (डॉ. राकेश राय/अमर उजाला, गोरखपुर)
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तस्वीरें: इतिहास बना गया देशी परिधान में पहला दीक्षांत
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10 बजते-बजते पूरा दीक्षांत पंडाल लोगों से भर गया। जैसे-जैसे समय बीता, लोगों की निगाहें मंच पर टिक गईं। तय दीर्घा में कंधे पर उत्तरीय डाले बैठे टॉपरों को तो एक-एक पल भारी पड़ रहा था। सभी के चेहरे पर राज्यपाल के हाथों गोल्ड मेडल हासिल करने की बेकरारी साफ महसूस की जा रही थी।
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पौने 11 बजे के करीब मंच से समारोह का संचालन कर रहीं प्रो. विपुला दुबे की आवाज गूंजी और उन्होंने मुख्य अतिथि गृह मंत्री राजनाथ सिंह और राज्यपाल राम नाईक के शहर में पहुंचने की जानकारी दी तो सभी के चेहरे चमक उठे। मुख्य अतिथि के आने की सूचना मिलते ही यूनिवर्सिटी प्रशासन विद्वत परियात्रा तैयारी में जुट गया। पौने 12 बजे गृहमंत्री और राज्यपाल ने परिसर में पहुंचकर एनसीसी कैडेटों का गार्ड ऑफ ऑनर लेना शुरू किया तो इधर विद्वत परियात्रा शुरू हो गई।
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सबसे आगे प्रभारी रजिस्ट्रार डॉ. अमरेंद्र कुमार सिंह थे। उनके पीछे विद्या परिषद व कार्य परिषद के सदस्य तथा सभी संकायों के डीन। इनके बीच कुलपति प्रो. अशोक कुमार के साथ राज्यपाल राम नाईक व मुख्य अतिथि राजनाथ सिंह। डीन व कार्य परिषद सदस्यों समेत मुख्य अतिथि व राज्यपाल मंचासीन हुए।
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कुलगीत के बाद कुलपति ने राज्यपाल से समारोह को शुरू करने की अनुमति मांगी। उसके बाद कुलपति ने माइक संभाल लिया। यूनिवर्सिटी के इतिहास की चर्चा के साथ ही उन्होंने भविष्य की योजनाओं पर भी बात की। इसके बाद शुरू हुआ पदक वितरण।
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कंधे पर तय रंग का उत्तरीय डाले मेधावी एक-एक कर मंच पर आते रहे और मेडल लेकर लौटते रहे। घंटे भर चले पदक वितरण के बाद स्मारिका का विमोचन किया गया। इसके बाद मुख्य अतिथि राजनाथ सिंह के व्यक्तित्व से उपस्थित जनसमूह को कुलपति ने रूबरू कराया और दीक्षांत संबोधन के लिए उन्हें आमंत्रित किया।
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45 मिनट के अपने संबोधन में गृह मंत्री ने डिग्री लेने वाले विद्यार्थियों की जमकर हौसलाफजाई की। साथ ही देश व समाज हित के लिए कार्य करते रहने का आह्वान भी किया। इसके बाद राज्यपाल का अध्यक्षीय संबोधन हुआ। उन्होंने भी विद्यार्थियों में हौसले की ताकत भरी। राज्यपाल की अनुमति से जब कुलपति ने समारोह के समापन की घोषणा की तो फिर शुरू हुआ फोटो सेशन का दौर।
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हर कोई इस अविस्मरणीय पल को तस्वीरों में कैद करता दिखा। कोई दोस्तों के साथ फोटो सेशन करा रहा था तो कोई अपने अभिभावकों के साथ। सेल्फी लेने की तो होड़ सी दिखी। एक-दूसरे के साथ खुशी बांटने और बधाई व धन्यवाद का सिलसिला काफी देर तक चलता रहा।
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यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में शिरकत के बाद गृहमंत्री राजनाथ सिंह गोरखनाथ मंदिर पहुंचे। गुरु गोरक्षनाथ के पूजन करने के बाद उन्होंने ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि स्थल पर पुष्प अर्पित किए और फिर मंदिर परिसर के अतिथि कक्ष में मौजूद भाजपा नेताओं व गणमान्य लोगों से मुलाकात की। जलपान के क्रम में जब पूछा गया कि चाय लेंगे या मट्ठा, तो जवाब देने के क्रम में राजनाथ सिंह के बीच से भी सवाल उठा। पूछा, क्या मट्ठा तैयार है क्या।
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सांसद एवं महंत के हामी भरते ही बोले, तब वही मंगाइए, देश के अधिकांश हिस्सों में घूमते हुए दही, दूध का जायका लेने का अवसर मिला लेकिन मंदिर जैसा मट्ठा कहां मिलता है। इस दौरान वीरबहादुर सिंह विश्वविद्यालय जौनपुर के पूर्व कुलपति डा. यूपी सिंह, नगर विधायक राधामोहनदास अग्रवाल, कामेश्वर सिंह, विनय सिंह बिन्नू, जर्नादन तिवारी, धर्मेंद्र सिंह, भानु प्रताप, कृष्णपाल सिंह, शशितेष सिंह सहित तमाम लोग मौजूद थे।