एल्टो टुरियाकु इंडियन रिज़र्व के जंगल सालों से अवैध लकड़ी काटने वालों की पनाहगाह रहे हैं. कापोर लड़ाकों की एक छोटी सी टुकड़ी इन दिनों मरानहाओ प्रांत के उत्तर पूर्व में अमेज़न के इन्हीं जंगलों में अवैध लकड़ी काटने वालों के ख़िलाफ़ मुहिम चला रही है. (सभी तस्वीरें और कैप्शनः रायटर्स)
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लड़ाके जो बचाते हैं जंगल, देखिए तस्वीरें
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कापोर लड़ाकों के नेता इराकाड्जु कहते हैं कि उन्होंने ब्राज़ील की सेना से मदद मांगी थी पर नहीं मिल पाई. उन्होंने बताया कि हम सरकार का इंतज़ार करते-करते थक गए थे।
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Indian reserve
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कापोर लड़ाकों के मुखिया ओसिमर बताते हैं, "लकड़ी माफ़िया जहां लकड़ी काट रहे थे, हमने वहां पर स्थाई शिविर बनाए हैं." ऐसे एक अभियान में कापोर लड़ाकों ने अवैध लकड़हारों से उनके औजार और हथियार छीने, उनके ट्रकों में आग लगाई और उनकी पिटाई भी की।
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मई में सरकारी एजेंसियों ने कापोर लड़ाकों और अवैध लकड़ी चोरों के बीच संघर्ष पर रिपोर्ट दी थी और कहा गया था कि दस दिनों में ज़रूरी क़दम उठाए जाएं पर हालात नहीं बदले. इराकाड्जु कहते हैं कि अगर उनके बच्चों के पास जंगल न रहे तो क्या होगा।
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बिना सरकारी मदद के कापोर लड़ाके ख़ुद अवैध लकड़ी काटने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई का फैसला लेते हैं. इस आशंका में कि अवैध लकड़ी काटने वाले लौटकर न आ जाएं, वो इलाक़े को 'संरक्षित क्षेत्र' घोषित कर देते हैं।
बीते साल अवैध लकड़ी काटने वालों से परेशान कई लोग इकट्ठे हुए और ये मुहिम शुरू हुई. अमेज़न के जंगलों में न केवल प्राकृतिक संसाधनों का बेलगाम दोहन हुआ है बल्कि सदियों से इस जंगल के आसरे जी रहे लोगों की ज़िंदगी पर भी इसका असर पड़ा है. इराकाड्जु बताते हैं कि बीते साल नंवबर में अवैध लकड़ी काटने वालों ने एक गांव पर हमला बोल दिया था. फ़रवरी में एक मुठभेड़ में तीन कापोर लड़ाके मारे गए थे।