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EXCLUSIVE: कहीं आप की B.ed की डिग्री भी तो नहीं है फर्जी

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डा. बीआर अंबेडकर विश्वविद्यालय के फर्जी डिग्री प्रकरण में इसी सप्ताह एक और एफआईआर दर्ज कराई जा सकती है। एसआईटी ने इसके लिए शासन से अनुमति मांगी है। बताया जा रहा है कि इसमें विवि के बड़े अधिकारियों को नामजद कराया जाएगा। इन पर मामले को छुपाने के लिए विवि का रिकार्ड गायब कराने का आरोप है।
ब्यूरो/अमर उजाला, आगरा।
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EXCLUSIVE: कहीं आप की B.ed की डिग्री भी तो नहीं है फर्जी

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एसआईटी ने जांच में पाया कि विवि से 2005 से 2009 तक का बीएड का रिकार्ड गायब हुआ नहीं, बल्कि जान बूझकर कराया गया है। इसमें वे अधिकारी शामिल रहे हैं, जिनकी गर्दन इस घोटाले में फंसी हुई है। एसआईटी सूत्रों की मानें तो एक बड़े अफसर ने दलालों के माध्यम से बीएड की फर्जी डिग्रियां बनवाकर बोली लगाकर बेची थीं। यह रिपोर्ट हाईकोर्ट के सामने रखी जा चुकी है। इस पर सुनवाई के लिए 27 अक्तूबर की तारीख लगी है।
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एसआईटी की तैयारी इससे पहले ही एफआईआर दर्ज कराने की है। इसमें आठ से 10 लोगों के नाम शामिल हो सकते हैं। जांच में यह तथ्य भी सामने आ चुका है कि विवि के अफसरों ने 2005 से 2009 का ही नहीं, बल्कि 1999 से 2014 तक का पूरा बैक डाटा ही गायब करा दिया है।

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हालांकि अभी जांच 2005 से 2009 तक की हो रही है। इसका दायरा बढ़ने पर और भी अधिकारी लपेटे में आ सकते हैं। इस खुलासे के बाद उन लोगों की धड़कनें भी बढ़ रही हैं जिन्होंने फर्जी डिग्रियों के 10 पर सरकारी नौकरी हासिल की है।
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विवि अधिकारी इस प्रकरण से जुड़े रिकार्ड गायब होने के मामले में दो कारणों से साफ तौर पर फंस रहे हैं। एक तो विवि की ओर से रिकार्ड गायब होने की एफआईआर नहीं कराई गई। दूसरा, न कोई विभागीय जांच हुई और न ही कोई कार्रवाई।
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