डकैतों का जैसा अंत होता है, चुन्नी पटेल का भी वही हश्र हुआ। मंगलवार भोर पहर पुलिस की गोली से मारा गया। उसकी मां जगिया भी जानती थी कि बेटे का यही अंजाम होगा। चुन्नी का जिक्र छेड़ते ही बोली- ‘जा दिन से घर से निकल गा और बागी बन गा, तबै से मोरे लाने मर गवा रहा चुन्नी’।
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डकैत चुन्नी के अंत पर बोली मां, 'जानती थी ऐसे ही मरेगा'
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चुन्नी के डकैत बनने पर उसकी पत्नी ने भी एक तरह से उससे संबंध खत्म कर लिए थे। वह बच्चों को लेकर दूसरे गांव में रह रही है। दूसरी ओर गांववालों में पुलिस को लेकर भय बना हुआ है कि कहीं उन्हें परेशान न किया जाए।
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भरतकूप से लगभग 12 किलोमीटर दूर घुरेटनपुर के मजरे बगहियापुरवा निवासी जगिया का चौथे नंबर का पुत्र था डकैत चुन्नी। उसे मध्य प्रदेश की पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया। चुन्नी की मौत के बाद से उसके गांव में सन्नाटा पसरा है। अगर बातें हो रही थीं तो सिर्फ चुन्नी की। गांववाले खुलकर कुछ नहीं बोल रहे हैं।
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एक ग्रामीण ने बताया कि चुन्नी मध्य प्रदेश के इलाके में ज्यादा रहता था। गांव में उसका आना-जाना बहुत कम था। गरीब की लड़की की शादी, मंदिर निर्माण जैसे कामों के लिए पैसा जरूर भिजवा देता था। गांववालों ने बताया कि डकैत बनने से पहले मजदूरी और खेती करके परिवार का पेट पालता था। शादी हो चुकी थी और उसके दो लड़के और तीन लड़कियां थीं, जिनमें एक की मौत हो चुकी है।
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चुन्नी की मां जगिया अब काफी बूढ़ी है। वह अपने सबसे छोटे लड़के बद्री प्रसाद के साथ रहती है। चुन्नी के बारे में बात करते उसकी आंखें छलछला गईं। बोली- ‘भइया कौन महतारी चाही के वहिकर लरिका डकैत बनै। पुलिस परेशान करिस त बागी हुई गा। वहिकै बाद से मैं मान लीन्हौं कि मोरे लाने वा मरि गा’।
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बागी हुआ तो उसकी पत्नी बाबूदेवी अपने बच्चों ताराबाबू, बेला, नवल, कल्पना को लेकर मझगवां चली गई। बताया गया कि वह वहीं मेहनत-मजदूरी करके परिवार का पेट पाल रही है। अब तक तीन बच्चों की शादी भी कर चुकी है। नवल कुंवारा है। बाबूदेवी का मायका भरतकूप चौकी क्षेत्र के लोखरिया गांव में है।
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घुरेटनपुर निवासी 60 साल के राममिलन ने आशंका जताई कि अब पुलिस गांव आकर परेशान तो नहीं करेगी। चुन्नी जब तक जिंदा था, एमपी और यूपी दोनों जगहों की पुलिस गाहे-बगाहे आ जाती थी और किसी न किसी को पूछताछ के बहाने ले जाती थी।
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चुन्नीलाल के हिस्से में आई लगभग डेढ़ बीघा जमीन परती पड़ी है। गांववालों ने बताया कि डकैत बनने के बाद से पुलिस ने इस जमीन को जोतने बोने से मना कर रखा है। गांव में उसका घर भी गिर चुका है। हालांकि गांव वालों का कहना है कि इसे पुलिस ने ही गिराया है। चुन्नी के पिता रामसजीवन पटेल की लगभग छह साल पहले मौत हो चुकी है। जगिया का सबसे बड़ा पुत्र लंबरी प्रसाद नि:शक्त है और उसकी शादी नहीं हुई है। दूसरे नंबर के सुखलाल प्रसाद हैं, जो सरकारी अध्यापक हैं और कर्वी में रहते हैं। तीसरा पुत्र कल्लू प्रसाद है। चुन्नी की दोनों बहनें मति देवी और कम्मा गांव में ही ब्याही हैं। कम्मा की मौत हो चुकी है।
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चुन्नीलाल के गांववाले हालांकि चुन्नी को बागी बनने से पहले काम से काम रखने वाला बताते हैं। इन लोगों ने नाम छिपाते हुए बताया कि जब ठोकिया और अन्य डाकुओं ने बगहियापुरवा में आगजनी की थी और इसमें कई लोगों की जानें गई थीं तब चुन्नीलाल और उसके भाई कल्लू और बद्री पर मामला दर्ज कराया गया था। इनका दावा था कि यह मुकदमा भी रंजिशन दर्ज कराया गया था।