ऑक्सफैम की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जलवायु परिवर्तन का सर्वाधिक दुष्प्रभाव एशिया में ही पड़ेगा। प्रकृति जलवायु परिवर्तन से होने वाली विनाश लीला का ट्रेलर बार-बार दिखाती रहती है लेकिन इंसान है कि चेतने को तैयार ही नहीं। पढ़िए पिछले चंद सालों में प्रकृति ने कब-कब ढाया कहर।
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डराते हैं तबाही के ये 10 दृश्य, हम सब के लिए हैं चेतावनी
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2013-14 की सर्दियों में अमेरिका और कनाडा में शीत लहर का कहर टूटा। भारी बर्फबारी और बारिश ने जीना दूभर कर दिया। भयंकर ठंड के कारण अमेरिका और कनाडा के स्कूल, कॉलेज बंद करने पड़े, दर्जनों उड़ानें रदद कर दी गई। नियाग्रा फाल की ये तस्वीर उन्हीं दिनों की है। आम दिनों में जहां पानी झरझर करता है, जलवायु परिवर्तन ने उन सर्दियों में उसे बर्फ बना डाला।
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नियाग्रा फाल आम दिनों में ऐसा दिखता है। ग्लोबल वार्मिंग ग्लेशियरों की बर्फ पिघला सकती है, तो झरनों का पानी भी जमा सकती है। जलवायु परिवर्तन का संकट यही है।
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18 अप्रैल, 2015 को माउंट एवरेस्ट के बेस कैंप के पास आए बर्फीले तूफान से 16 नेपानी गाइडों की मौत हो गई थी। ये गाइड पर्वतारोहियों को रास्ता दिखाते थे। एवरेस्ट पर आया बर्फीला तूफान जलवायु परिवर्तना का नतीजा थी। हिमालय में बार्फीले तूफानों की आवृत्ति पिछले कई सालों से बढ़े हैं।
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2013 में उत्तराखंड में बाढ़ ने भारी तबाही मचाई थी, 5000 से अधिक लोग लापता हो गए और लाखों बेघर। उत्तराखंड की तबाही भारत में जलवायु परिवर्तन होने वाली 21वीं सदी की सबसे भयावह विभीषिका थी।
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तमिलनाडु में पखवाड़े भर से हो रही बारिश ने बता दिया है कि मनुष्य प्रकृति के आगे निरीह है। फिर भी उसने प्रकृति से खिलवाड़ बंद नहीं किया।
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ये तस्वीर अफगानिस्तान में तकरीबन डेढ़ साल पहले हुए भूस्खलन की है। पिछल साल 2 मई को भयंकर बारिश के उत्तरपूर्वी अफगानिस्तान में जमीन दरक गई और 300 घर दफ्न हो गए। सरकार 2100 लापता लोगों को ढूंढ़ने में नाकामयाब रही और उन्हें मृत मान लिय गया। हालांकि संयुक्त राष्ट्र औपचारिक रूप से 350 को मृत माना।
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उस दिन एक बस वहां से गुजरी नहीं होती तो दुनिया को कानोंकान खबर नहीं होती कि मालिन को धरती ने निगल लिया है। 30 जुलाई, 2014 की सुबह पुणे अंबेगांव तालुका के मालिन गांव में में भूस्खलन हुआ। एक रात पहले से ही वहां भारी बारिश हो रही थी और सुबह होते-होते पूरा का पूरा गांव मिट्टी में दफ्न हो गया। जब ये हादसा लोग सो रहे थे, लगभग 151 ग्रामीण हादसे में मारे गए। दो दिनों तक लगातार बारिश होती रही है, जिसकी वजह से राहत कार्य भी देर से शुरु हो पाया।
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पिछले साल सितंबर में जम्मू-कश्मीर भयानक बाढ़ का शिकार हुआ। सूबे में ये तबाही बारिश ने मचाई। बाढ़ से पाकिस्तान भी प्रभावित हुआ। दोनों मुल्कों में 500 से ज्यादा लोग बाढ़ से मारे गए। इस साल भी कश्मीर में बाढ़ ने तबाही मचाई थी।
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2010 में पाकिस्तान के बडे़ हिस्से में बाढ़ ने तबाही मचाई। सिंधु नदी में आई बाढ़ से पाकिस्तान का तकरीबन पांचवा हिस्सा डूब गया। सरकारी आंकड़ों के मुतबिक, 2 करोड़ लोग बाढ़ से प्रभावित हुए और लगभग 200 लोग मारे गए।
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अमेरिका का कैलिफोर्निया राज्य तीन सालों सूखें की चपेट में हैं। वहां के जंगलों में कई बार आग लग चुकी है, जिसे जलवायु परिवर्तन का ही दुष्परिणाम माना जाता है।
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हुदहुद तूफान ने पिछले वर्ष उत्तर भारत और नेपाल में भारी तबाही मचाई थी। अक्टूबर में बंगाल की खाड़ी में उठे तूफान ने पहले आंध्र प्रदेश को चपेट में लिया और बाद में उत्तर प्रदेश और नेपाल में भारी बारिश का कारण बना। तूफान से जन और धन की भारी हानि हुई थी।