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तस्वीरें: मां-बाप ने चार साल से खंभे से बांध रखा है बच्चे को

Wed, 11 Feb 2015 01:31 PM IST
उमेंद्र भदौरिया/अमर उजाला, बाह (आगरा)
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दो बेटे, दोनों मानसिक मंदित और बीमार। मां-बाप का कलेजा फटता है, फिर भी कहीं भाग न जाएं इसलिए एक को रस्सी से तो दूसरे को घर में बंद करके रखते हैं। थोड़े दिन नहीं चार साल से यही दशा है। रोज उनका और अपना पेट भरने के लिए रोटी जुटाने की जद्दोजहद ही इतनी भारी कि वह उनके इलाज का इंतजाम नहीं कर पा रहे। ऐसा भी नहीं ‘कैद’ में इस बचपन के बारे में किसी को खबर न हो, इस दृश्य को रोजाना सैकड़ों लोग देखते हैं लेकिन अब तक किसी का दिल उसकी मदद के लिए नहीं पसीजा।
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तस्वीरें: मां-बाप ने चार साल से खंभे से बांध रखा है बच्चे को

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आगरा जिले के खेड़ा राठौर क्षेत्र के लोहिया गांव गोहरा नदी से कुछ गज की दूरी पर चंबल के टीले पर बसा है। इसी गांव में शौकीराम और उनकी पत्नी गुड्डी देवी रहते हैं। उनका छह साल का बेटा विष्णु है। जन्म से ही वह मानसिक मंदित है। दो साल की उम्र में घर से बाहर निकलकर एक बार बीहड़ में गुम हो गया। बाद में फिर निकला तो टीले से सरक कर गिरा और चोटिल हुआ। इससे परेशान मां-बाप ने बचपन से ही उसे घर में खंभे से बांधकर रखना शुरू कर दिया। बीते चार साल से एक ही खंभे से बंधे विष्णु का खाना-सोना सब यहीं होता है। सिर पर छप्पर जरूर है। जब सो जाता है तो कुछ ओढ़ा दिया जाता है। सिर्फ शौच के लिए उसे खोला जाता है। हालांकि इसके बाद भी कपड़े गंदे कर लेता है। इसलिए प्राय: नंगा ही रहता है।
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इस बारे में शौकीराम और गुड्डी ने कहा, ‘भला कौन मां-बाप चाहेगा कि अपने छोटे से बेटे को इस तरह बांधकर रखे। उसके साथ कोई अनहोनी न हो जाए इसलिए मजबूरी में ऐसा कदम उठाना पड़ा है।’ मजदूरी करने वाले ये विवश मां-बाप बताते हैं कि इलाज के लिए कम से कम भी जितने धन की जरूरत होगी, वह भी वे जुटा नहीं पाते। रोटी खिलाना ही बड़ी चुनौती है, इस कारण उनका इलाज भी नहीं करा पाए।
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शौकीराम का बड़ा बेटा अंकित (8) भी मानसिक रोगी है। उसे भी पहले बांधकर ही रखा जाता था। थोड़ा बड़ा हुआ तो वह बंधन खोलकर भाग जाता। वह भागने न पाए इसलिए मां-बाप उसे घर के भीतर बंद करके रखने को विवश हैं। बाह के एसडीएम उमाशंकर को जब अमर उजाला ने यह बताया कि गांव में डाक्टरों की टीम और जांच के लिए राजस्व निरीक्षक को भेजा जा रहा है। प्रशासन बच्चे के इलाज में हर संभव मदद करेगा।
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