केंद्र ने एक अधिसूचना जारी कर तमिलनाडु में सांड़ों को काबू करने के खेल जल्लीकट्टू पर लगी रोक हटा दी है। मुख्यमंत्री जयललिता ने इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद कहा है। इस पारंपरिक खेल को फिर से अनुमति मिलने की खुशी में शुक्रवार को पूरे राज्य में जश्न मनाया गया।
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केंद्र सरकार ने आदमी को सांड से लड़ने की दी अनुमति
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इसके अलावा पंजाब के किला रायपुर तथा कई अन्य राज्यों में होने वाली बैलगाड़ी दौड़ को भी अनुमति दे दी गई है। केंद्रीय
मंत्री पोन राधाकृष्णन ने एक ट्वीट कर सरकार के इस फैसले की जानकारी दी।
हालांकि अनुमति के साथ कुछ शर्तें भी लगाई गई हैं।
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इसके अनुसार सांड़ को
खेल में उतारने से पहले एनिमल हसबेंडरी एंड वेटेरिनेरी डिपार्टमेंट के
परीक्षण से गुजरना होगा ताकि यह पता चल सके कि वह आयोजन के लिए पूरी तरह
स्वस्थ है या नहीं। इसके साथ ही लोगों को सांड़ को 15 मीटर के दायरे में ही
काबू में करना होगा।
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उसका प्रदर्शन बढ़ाने के लिए उसे किसी तरह की दवा
नहीं दी जाएगी। तमिलनाडु के साथ महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा,
केरल तथा गुजरात में बैलगाड़ी दौड़ के पारंपरिक खेल को पसंद करने वालों के
लिए भी खुशखबरी है।
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सरकार ने कुछ शर्तों के साथ इस खेल को मंजूरी दे दी है। केंद्र के इस फैसले से पंजाब के किला रायपुर में हर साल होने वाले ग्रामीण ओलंपिक की रौनक फिर से लौटने की उम्मीद है। दरअसल इस आयोजन का मुख्य आकर्षण बैलगाड़ी दौड़ ही होती है लेकिन प्रतिबंध के कारण पिछले दो सालों से यह नहीं हो पा रही थी।
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सरकार ने जो शर्तें गिनाई हैं, उसके मुताबिक
बैलगाड़ी दौड़ एक निश्चित ट्रैक पर ही होगी और यह दो किलोमीटर से लंबा नहीं
होना चाहिए। दोनों आयोजनों से पहले जिला प्रशासन से अनुमति लेनी होगी और
राज्य पशु कल्याण बोर्ड या जिला प्रशासन के अधिकारी यह देखेंगे कि कहीं
पशुओं के साथ क्रूरता तो नहीं हो रही।
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हाल ही में तमिलनाडु सरकार ने केंद्र से आग्रह किया था कि वह जल्लीकट्टू के आयोजन के लिए कानून में बदलाव को बिल लाए। वैसे राज्य में चुनाव भी होने हैं। ऐसे में सरकार के इस कदम को बेहद अहम माना जा रहा है। जानवरों के लिए काम करने वाली संस्था पेटा ने जल्लीकट्टू पर लगी रोक हटाने
का विरोध किया है। संस्था के अनुसार क्रूरता से रोक हटाना राष्ट्र पर एक
धब्बा है और वह इस लड़ाई को सुप्रीम कोर्ट ले जाएगी। कई दूसरी संस्थाओं ने
भी सरकार के निर्णय पर सवाल उठाए हैं।
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वहीं केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने सरकार का बचाव करते हुए कहा है कि पारंपरिक खेल को कई सुरक्षा उपायों और बंदिशों के साथ मंजूरी दी गई है।तमिलनाडु में पोंगल के त्योहार में मुख्य रूप से सांड़ की पूजा होती है। खेती में बैल की उपयोगिता के चलते यहां बैल दौड़ का भी आयोजन किया जाता है। इस समारोह को जल्लीकट्टू के नाम से जानते हैं। कहीं-कहीं सांडों को खुला छोड़ दिया जाता है और युवाओं को प्रतिस्पर्धा करते हुए उन्हें वश में करना होता है। हालांकि पशु प्रेमी संगठन इस खेल का लंबे अर्से से विरोध करते रहे हैं।