समकालीन भारतीय राजनीति को अपने ब्रश से हास्य का रंग देने वाले और 2004 में पद्म श्री से सम्मानित प्रख्यात कार्टूनिस्ट सुधीर तैलंग का शनिवार को निधन हो गया। उन्होंने अपने कार्टून्स के जरिए जहां एक ओर लोगों को हसाया तो वहीं की बार राजनेताओं को रोने तक पर मजबूर कर दिया। आगे की स्लाइड्स में देखे सुधीर के बनाए हुए कार्टू्न्स।
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10 साल की उम्र में छपा पहला कार्टून और बन गए कार्टूनिस्ट
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तैलंग ने इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, अटल बिहारी वाजपेयी, पीवी नरसिंह राव, मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी सहित विभिन्न राजनेताओं पर तैलंग ने कार्टून बनाए।
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राजस्थान के बीकानेर में 26 फरवरी 1960 को जन्में तैलंग का पहला कार्टून अखबार में 1970 में प्रकाशित हुआ था।
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बचपन में तैलंग को टिनटिन फैंटम और ब्लॉन्डी जैसे कार्टून काफी पसंद थे और माना जाता है कि इसी से उत्साहित होकर उन्होंने कार्टून बनाना शुरू किया।
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तैलंग की ‘नो, प्राइम मिनिस्टर’ शीर्षक वाली कार्टून्स की एक किताब काफी प्रसिद्ध रही, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से जुड़े कार्टून्स की श्रृंखला थी।
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1982 में मुंबई में इलेस्ट्रेटेड वीकली ऑफ इंडिया से अपने कार्टूनिस्ट जीवन की शुरुआत करने वाले सुधीर 1983 में नवभारत टाइम्स में बतौर कार्टूनिस्ट बने और उसके बाद लगभग डेड़ दशक तक द हिंदुस्तान टाइम्स के कार्टूनिस्ट रहे।
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वो अपने कॉलम हियर एंड नाऊ के माध्यम से देश विशेष के राजनीतिक, सामाजिक और समसामयिक घटनाओं पर अपने कार्टूनों के माध्यम से व्यंग्य करते रहे।
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सुधीर ने अपने ट्विटर एकाउंट के बायो में लिखा है कि वे सि्नेमा गेट कीपर बनना चाहते थे लेकिन वो एक राजनीतिक कार्टूनिस्ट ही बन पाए।
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इस कार्टून में आप देख सकते हैं कि किस तरह से किसानों के नाम पर हो रही राजनीति पर सुधीर ने कटाक्ष किया है।
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इस कार्टून में तैलंग ने करप्शन और दिल्ली की राजनीति पर सवाल किए हैं।