नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद सबसे ज़्यादा उम्मीदें बनारस की जनता को थीं। मोदी से पहले और मोदी के बाद के बनारस को हम तस्वीरों के माध्यम से बता रहे हैं। यह तस्वीर मोदी के आने से पहले का बनारस है।
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हाल-ए-बनारस: मोदी के पहले और मोदी के बाद
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यह तस्वीर मोदी के आने के बाद की है। इस तस्वीर में साफ़ है कि मोदी के आने के बाद बनारस के प्रथम घाट आदि केशव घाट पर बना लकड़ी का पुल डूब चुका है।
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बीबीसी हिंदी की इस ख़ास सीरीज़ के लिए ये तस्वीरें मनीष खत्री ने ली हैं। गंगा और वरुण के संगम पर बने आदि केशव घाट पर लंबे समय से पुल बनाने की मांग होती रही है।
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मोदी के आने से उम्मीद बंधी थी। लेकिन पहले लकड़ी के पुल के सहारे यात्रा करने वाले लोग अभी नावों में यात्रा करने को मज़बूर हैं।
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बनारस के घाटों पर इतना कूड़ा देखने को मिलता है कि आप इसे कूड़ा घाट भी कह सकते हैं।
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मोदी के प्रधानमंत्री बनने से उम्मीद जगी थी कि कूड़े की सफ़ाई होगी, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ है।
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बनारस की कालोनी, सडकें, गलियां हो या घाट हर जगह एक जैसे हालात हैं।
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गंदगी मोदी के बनारस से सांसद बनने से पहले भी थी। और उनके सांसद बनने के बाद भी हालात नहीं बदले हैं।
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काशी के घाट ही शहर को एक अनोखी पहचान देते है।. इन घाटों की देख रेख और सफ़ाई पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।