हिंद महासागर में चीनी पनडुब्बियों की गतिविधियों पर निगाह रखने के लिए भारत ने सबमरीन हंटर्स 'पोसाइडन-8I' की तैनाती की है। जानिए क्या है इन सबमरीन हंटर्स की खूबियां--
विज्ञापन
सबमरीन हंटर्स, हवा से समंदर की निगहबानी करते हैं ये विमान
2 of 9
ये एयरक्राफ्ट एंटी-सबमरीन और एंटी-सरफेस वारफेयर को अंजाम देने में सक्षम हैं। लंबी दूरी पर समुद्री पेट्रोलिंग के मद्देनजर अंडमान-निकोबार द्वीप पर बने मिलिट्री बेस पर पोसाइडन-8I की तैनाती की पीछे अहम वजह इसकी मारक क्षमता है।
विज्ञापन
सबमरीन हंटर्स, हवा से समंदर की निगहबानी करते हैं ये विमान
3 of 9
इसकी ऑपरेटिंग रेंज 1,200 नॉटिकल माइल है। इस एयरक्राफ्ट की अधिकतम रफ्तार 907 किलोमीटर प्रति घंटा है। रडार से लैस ये एयरक्राफ्ट खुफिया और किसी भी तरह के जोखिमों से निपटने में सक्षम है। इसमें खतरनाक हारपून ब्लॉक-II मिसाइलें, MK-54 कम वजन वाले विध्वंसक मौजूद हैं।
सबमरीन हंटर्स, हवा से समंदर की निगहबानी करते हैं ये विमान
4 of 9
इसके साथ-साथ ये एयरक्राफ्ट रॉकेट और बारूदों से भी लैस हैं। ये किसी भी गंभीर स्थिति को भांपकर दुश्मन की पनडुब्बियों और युद्धपोतों पर हमला कर सकते हैं। ये एयरक्राफ्ट अमेरिकी कंपनी बोइंग ने तैयार किए हैं। इनका पहला सौदा साल 2009 में अमेरिकी कंपनी बोइंग से 2.1 बिलियन डॉलर में किया गया था, जिसमें 8 विमान खरीदे गए। जिन्हें हाल ही में नौसेना बेड़े में शामिल किया गया।
विज्ञापन
सबमरीन हंटर्स, हवा से समंदर की निगहबानी करते हैं ये विमान
5 of 9
इनकी तैनाती तमिलनाडु के अराक्कोनम स्थित आईएनएस रजाली नेवल एयर स्टेशन पर की गई। अभी चार और पोसाइडन-8I को शामिल करने की प्रक्रिया आखिरी दौर में है। पोर्ट ब्लेयर में इसकी तैनाती के जरिए भारतीय नेवी की योजना इसके आस-पास पूरे क्षेत्र पर नजर रखने की है।
विज्ञापन
सबमरीन हंटर्स, हवा से समंदर की निगहबानी करते हैं ये विमान
6 of 9
इस एयरक्राफ्ट की योजना सबसे पहले अमेरिकन नेवी ने बनाई। उन्होंने अगली पीढ़ी के समुद्री निगरानी विमान बनाने की योजना के तहत जून 2004 में बोइंग को इसकी जिम्मेदारी सौंपी। मार्च 2005 में पहला पोसाइडन-8A एयरक्राफ्ट डिजाइन किया गया।
विज्ञापन
सबमरीन हंटर्स, हवा से समंदर की निगहबानी करते हैं ये विमान
7 of 9
इसके बाद करीब 117 पोसाइडन-8A एयरक्राफ्ट को अमेरिकन नेवी ने अपने बेड़े में शामिल किया। फरवरी 2014 में ऑस्ट्रेलियन सरकार ने पोसाइडन-8A की खरीदी की। इस सौदे में 4 बिलियन डॉलर के 4 और एयरक्रॉफ्ट का कॉन्ट्रैक्ट दिया गया।
सबमरीन हंटर्स, हवा से समंदर की निगहबानी करते हैं ये विमान
8 of 9
इस एयरक्राफ्ट की तैनाती से पहले अंडमान निकोबार द्वीप समूह में बने नौसेना के बेस की जिम्मेदारी सेना के करीब तीन हजार सैनिकों, बीस युद्धपोतों, कुछ जहाजों, हेलीकॉप्टरों और विमानों तक ही सीमित था। वहीं सूत्रों के मुताबिक यहां युद्धपोतों में से सिर्फ एक युद्धपोत ही काम कर रहा है।
सबमरीन हंटर्स, हवा से समंदर की निगहबानी करते हैं ये विमान
9 of 9
हालांकि अंडमान निकोबार स्थित बेस की सुरक्षा को लेकर केंद्र की मोदी सरकार ने खास योजना बनाई थी। प्राथमिकता के बावजूद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा सका। फिलहाल यहां टेक्नॉलॉजी और इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देकर हिंद महासागर के सबसे अहम पड़ाव को सुरक्षित करना सरकार के लिए बेहद जरूरी है। इस बेस को सुरक्षित करके ही चीन की चालों पर नजर रखी जा सकती है।