मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आखिरकार छठवें दिन सैफई महोत्सव में शरीक हुए। उन्होंने पर्यावरण बचाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग का सबसे ज्यादा असर गरीबों और किसानों पर पड़ रहा है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार गंगा-यमुना की सफाई के नाम पर सिर्फ ढिंढोरा पीटा रही है। हकीकत में कोई काम नहीं हो रहा है। (ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा)
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छठें दिन सैफई महोत्सव में पहुंचे अखिलेश, ऐसा था अंदाज
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मालूम हो कि सैफई महोत्सव से ठीक पहले पार्टी के अंदरखाने में खींचतान चली। कुछ युवा नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई होने पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई और सैफई महोत्सव से दूरी बना ली। महोत्सव में उनकी अनुपस्थिति को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं। दो दिन पहले कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह यादव और सांसद धर्मेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री से लखनऊ में मुलाकात की। इसके बाद मुख्यमंत्री सैफई पहुंचे।
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महोत्सव के दौरान पत्रकारों से बातचीत के दौरान सीएम अखिलेश यादव ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग का सर्वाधिक असर गरीबों एवं किसानों पर पड़ रहा है। बदलते परिवेश में प्रकृति की ओर से मुफ्त मिलने वाली चीजें खत्म हो रही हैं। खाद्यान्न पर असर पड़ा है। पर्यावरण बचाने के लिए सभी को सामूहिक भागीदारी करनी होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण सरकार की जिम्मेदारी है। लेकिन जब तक आम आदमी जागरुक नहीं होगा, तब तक पर्यावरण को नहीं बचाया जा सकता है।
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पर्यावरण संरक्षण व महिला सशक्तीकरण के प्रति जागरूक करने के लिए काठमांडू नेपाल से चली साइकिल यात्रा बृहस्पतिवार को सैफई पहुंची। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सैफई में हरी झंडी दिखाकर इस दल को आगे के लिए रवाना किया। मुख्यमंत्री ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनता को जागरूक करने के प्रयासों की सराहना भी की। देश के विभिन्न प्रांतों तथा नेपाल व भूटान की बौद्ध अनुयायी छात्राओं व महिलाओं का एक दल साइकिल यात्रा पर निकला हुआ है। बुधवार को संकिसा होते हुए यह दल सैफई पहुंचा।
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बौद्ध अनुयायी छात्रा जिगमे यूडोन ने बताया कि उनकी साइकिल यात्रा 18 नवंबर को काठमांडू नेपाल से शुरू हुई थी। वहां से कुशीनगर, वाराणसी, नालंदा, इलाहाबाद, कानपुर, कन्नौज से संकिसा तीर्थ होते हुए सैफई पहुंची। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में उनकी यात्रा का शासन प्रशासन से पूरा सहयोग मिल रहा है।