ये वो लोग हैं जिन्होंने पूरे दुनिया में न केवल अपना नाम रोशन किया बल्कि देश का नाम भी ऊंचा किया।
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भारत के वो लाल, जो अपने पहले प्रयास में हो गए थे असफल
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एपीजे अब्दुल कलाम: भारत के पूर्व राष्ट्रपति और प्रसिद्ध वैज्ञानिक एपीजे अब्दुल कलाम भारतीय वायु सेना में फाइटर पायलट बनना जाहते थे लेकिन आठ रिक्त पदों को भरने के लिए हुई परीक्षा में कुछ ही अंतर से पीछे रहे गए। मेरिट में उनका नौंवा स्थान था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और एक दिन ऐसा आया कि वे भारत के 'मिसाइल मैन' बन गए।
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भारत के वो लाल, जो अपने पहले प्रयास में हो गए थे असफल
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धीरुभाई अंबानी:इस सूची में दूसरा नाम है धीरुभाई अंबानी का जिसने रिलांयस इंडस्ट्रीज को खड़ा किया। अपने व्यवस्या के शुरुआती दिनों में उन्होंने एक साक्षा धंधे की शुरुआत की लेकिन वह सफल नहीं हो पाया। उसने बाद महज 32 साल के उम्र में उन्होंने विमल इंडस्ट्रीज की शुरुआत की और आगे जो हुआ उसका इतिहास गवाह है।
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अमिताभ बच्चन: अमिताभ जब फिल्मों में अपने अभिनय की शुरुआत की तो उनकी कई फिल्में लगातार फ्लॉप हुई। 1973 में आई 'जंजीर' फिल्म जबरदस्त हिट हुई। उनकी आवाज की वजह से पहले उन्हें यह फिल्म नहीं मिल रही थी। लेकिन वही आवाज आगे चलकर उनकी पहचान बन गई। उनके जीवन में 90 की दशक में एक बार फिर उतार देखा गया लेकिन अपनी दूसरी पारी में वह फिर एक चट्टान की तरह खड़े हुए और आज भी वहीं कायम हैं।
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रतन टाटा: टाटा ग्रुप के मालिक रतन टाटा भी उन लोगों में से एक हैं जिन्होंने असफलता का कड़वा स्वाद चखा है। उन्होंने टाटा का कार्यभार संभाला तो सबसे पहले रिटायरमेंट की उम्र 70 साल से घटाकर 65 साल कर दी जिसका कर्मचारियों ने विरोध भी किया। उस वक्त उनको अपने दो कंपनियां को दिवालिया घोषित करना पड़ा था लेकिन वह फिर उठे और टाटा को एक नए मुकाम पर लेकर गए।
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शिव खेरा: शिव खेरा एक प्रेरक लेखक हैं जिन पर उनकी किताबों में साहित्यिक चोरी करने का आरोप लगाया गया। मामला कोर्ट में पहुंचा और उन्होंने अपने शोध को कोर्ट के सामने रखा। कोर्ट ने मामले को यह कहते हुए खत्म कर दिया की उन्होंने ऐसी कोई चोरी नहीं है। इस केस खत्म हुआ और उधर शिव खेरा बन गए बेस्टसेलर लेखक।
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नरेंद्र मोदी:इस सूची में नरेंद्र मोदी का भी नाम शामिल है। अपने राजनीतिक जीवन के शुरुआत में उन्हें गोधरा में हुए हिंसा के लिए विरोधियों ने जमकर घेरा लेकिन उन्होंने इस बात की परवाह नहीं की और गुजरात को विकास के रास्ते पर इतना आगे लेकर गए कि वह पूरे देश के लिए एक विकास का मॉडल बन गया। इस वक्त वह दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश भारत के प्रधानमंत्री हैं।
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शाहरुख खान: जानेमाने फिल्म अभिनेता शाहरुख खान ने भी फिल्मों में आने से पहले अपने अभिनय को लेकर काफी संघर्ष किया। उन्होंने मौके की तलाश में टीवी सीरियल के धारावाहिक में कई छोटे बड़े किरदार निभाए और एक समय वह आया जब उन्हें फिल्मों में चांस मिलने लगा। लोग उन्हें 'किंग ऑफ रोमान्स' के नाम से पुकारते हैं।
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मंसूर अली खान पटौदी: इस सूची में भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मंसूर अली खान पटौदी का नाम भी शामिल है जिन्हें हम 'नवाब पटौदी' के नाम से भी जानते हैं। पटौदी की एक आंख बचपन में ही खराब हो गई थी जिसकी वजह से उनकी देखने की क्षमता थोड़ी कम हो गई थी लेकिन उन्होंने अपनी इस कमी को कभी आगे नहीं आने दिया और भारतीय क्रिकेट टीम के बेहतरीन कप्तानों के रूप में खुद का स्थापित किया।
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सचिन तेंडुलकर: सचिन तेंडुलकर को पूरी दुनिया 'क्रिकेट के भगवान' के नाम से जानती है। उन्होंने क्रिकेट के इतिहास में कई ऐसे पन्ने जोड़े जो शायद ही कोई दूसरा जोड़ पाए लेकिन उनका क्रिकेट करियर भी कई बार हिचकोले खा चुका है। उन्हें कई बार भारतीय टीम का कप्तान बनाया गया लेकिन वह उसमें सफल नहीं हो पाए। एक समय वह अपने करियर के सबसे खराब फॉर्म से गुजर रहे थे लेकिन वह उससे भी उबर कर बाहर आ गए।
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नवाजुद्दीन सिद्दीकी: बॉलीवुड में नवोदित कलाकारों में गिने जाने वाले और अपने दमदार अभिनय का लोहा मनवा चुके नवाजुद्दीन सिद्दीकी का नाम भी इस सूची में शामिल है। बॉलीवुड में आने से पहले उन्होंने मेडिकल स्टोर, छोटी दुकान और यहां तक की चौकीदार का भी काम किया। उनके इसी संघर्ष की ही देन है कि उनके अभिनय में गंभीरता दिखाई देती है।
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महेंद्र सिंह धोनी: महेंद्र सिंह धोनी को भारतीय क्रिकेट टीम का सबसे सफलतम कप्तान माना जाता है। लेकिन उनकी इस सफलता के पीछे भी एक बड़ा संघर्ष है। धोनी क्रिकेट टीम में आने से पहले भारतीय रेलवे में बतौर टीटीई काम किया लेकिन एक क्रिकेटर बनने का सपना उनके मन में लगातार हिलोरे मारता रहा। उन्हें तलाश थी बस एक मौके जो उन्हें श्रीलंका के खिलाफ खेले गए एक मैच में मिला। उसके बाद जो हुआ वो तो सब जानते ही हैं।