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मुंबई के वो ...'अबू सलेम', जिनके गुनाहों से कांपा भारत

Fri, 16 Jun 2017 01:50 PM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
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देश के मोस्टवॉन्टेड डॉन, जिनके बारे कहा जाता है कि इन्हें पकड़ना मुमकिन ही नहीं नामुमकिन है। फिलहाल एक पुलिस की गिरफ्त में है। देखिए लिस्ट।
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PICS: मायानगरी के वो डॉन, जिन्होंने अपराध से भारत को दहलाया

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चालीस के दशक में पेशावर के जरिए करीम लाला ने जब मायानगरी के समंदर में दस्तक दी तब किसी को अंदाजा भी नहीं था कि अफगानिस्तान का ये पठान हिंदुस्तान में उस जरायम की दुनिया की नींव रख देगा जिसके खौफ का साया वर्षों तक लोगों को दहलाता रहेगा। अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में जन्मे करीम लाला का पूरा नाम अब्दुल करीम शेर खान था, जो अपने साथ हाजी मस्तान और बरदराजन के साथ मुंबई धंधा करने आया था। लेकिन उस धंधे की शक्ल स्मगलिंग, जुआं, शराब-अय्याशी के अड्डो, हत्या और अपहरण ने ले ली। करीम लाला को देश में माफियाओं का पहला डॉन और पठानों का आखिरी बादशाह कहा जाता है।
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PICS: मायानगरी के वो डॉन, जिन्होंने अपराध से भारत को दहलाया

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अगर आपने फिल्म वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई देखी है तो अजय देवगन की शक्ल में सुल्तान मिर्जा का किरदार याद होंगा। वो सुल्तान मिर्जा कोई और नहीं, हाजी मस्तान का ही दूसरा नाम है, जिसका असली नाम मस्तान हैदर मिर्जा था। मस्तान हैदर मिर्जा ने अर्से तक मुंबई में फिल्मों में पैसा लगाया और खुद भी फिल्में बनाईं। हाजी मस्तान ने किसी की हत्या तो नहीं की लेकिन स्मलिंग में जरूर हाथ आजमाया। साल 1955 से 1975 तक करीब 20 साल के लिए मस्तान ने अंडरवर्ल्ड से इस्तीफा दे दिया था। आपातकाल लगने के वक्त हाजी भी जेल गया जहां उसने हिंदी सीखी। बाद में सन 1984 तक हाजी मस्तान मुसलमानों का बड़ा नेता बन गया और 1985 में दलित मुस्लिम सुरक्षा महासंघ की नींव रखी। सन 1975 अमिताभ अभिनीत फिल्म दीवार भी मस्तान की जिंदगी पर आधारित थी।

PICS: मायानगरी के वो डॉन, जिन्होंने अपराध से भारत को दहलाया

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मुंबई की डी कंपनी का सरगना दाऊद इब्राहिम इंटरपोल की लिस्ट में है। इस कुख्यात अपराधी की तलाश भारत को अर्से से है। साल 2011 में फोर्ब्स की लिस्ट में दाऊद को दुनिया के सबसे कुख्यात अपराधियों में तीसरे नंबर पर रखा गया था। साल 1993 में मुंबई में हुए श्रंखलाबद्ध धमाकों में दाऊद का हाथ माना जाता है। अमेरिकी जांच एजेंसियों के मुताबिक दाऊद के संबंध ओसामा बिन लादेन वाले आतंकी संगठन अल कायदा से भी हैं। इसलिए अमेरिका ने दाऊद को साल 2003 में वैश्विक आतंकी घोषित किया और उसकी संपत्ति भी सीज कर दी। दाऊद की पिता इब्राहिम कासकर क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट में हेड कॉन्सटेबल थे। हाजी मस्तान के संपर्क में आकर दाऊद ने स्मगलिंग शुरू की और अपने भाई शबीर इब्राहिम कास्कर के साथ मिलकर डी-कंपनी की शुरुआत की।
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PICS: मायानगरी के वो डॉन, जिन्होंने अपराध से भारत को दहलाया

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आजमगढ़ के सराय मीर गांव से मुंबई में दाऊद की डी कंपनी तक के सफर में अबू सलेम अब्दुल कय्यूम अंसारी उर्फ अबू सलेम ने कई हत्याओं, जबरन वसूली जैसे न जाने कितने ही अपराधों को अंजाम दिया। उत्तप्रदेश में अबू की दहशत तो थी ही मुंबई में दाऊद की गैंग में शामिल होते ही सलेम की दहशत का डंका और बजने लगा। साल 2002 में अबू सलेम को पुर्तगाल से गिरफ्तार किया गया और उम्रकैद की सजा हुई।
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बड़ा राजन के लिए काम करते हुए गुनाह की दुनिया में छोटा राजन ने कदम तो छोटी-मोटी वारदातों को अंजाम देकर रखा लेकिन देखते ही देखते दाऊद का बायां हाथ बन गया। बड़ा राजन की हत्या के बाद छोटा राजन ने बडे़ राजन की जगह ले ली और डी कंपनी के साये में उसने ढेरों हत्याओं, जबरन वसूली, ड्रग्स की तस्करी और दर्जनों गैर-कानूनी कामों को अंजाम दिया। साल 1988 में छोटा राजन दुबई चला गया। और भारत से बाहर रहकर क्राइम सिंडिकेट चलाता रहा। बीते 25 अक्टूबर को छोटा राजन को इंडोनेशिया की पुलिस ने धर दबोचा।
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शकील बाबूमिया शेख उर्फ छोटा शकील भी दाऊद गैग का कुख्यात है। छोटा शकील की ज्यादा तस्वीरें उपलब्ध नहीं हैं। दाऊद की दूसरी तरफ छोटा शकील ही है। साल 2000 में छोटा शकील ने इंडिया टुडे मैग्जीन तो साक्षात्कार देते हुए कबूल किया था कि उसने छोटा राजन पर हमला करवाया था। 2001 में छोटा शकील ने भारतीय फिल्मों में पैसा लगाने की बात भी कबूली थी।
 

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मनोहर अर्जुन सुर्वे उर्फ मान्या सुर्वे शहरी डाकू की संज्ञा दी जाती है। सुर्वे ने इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी भी की थी। कॉलेज के दौरान ही मान्या ने अपने कुछ दोस्तों संग एक गैंग बना ली थी। इसके बाद सुर्वे ने हत्या और अन्य अपराधों में भी कदम रख दिया। मान्या के संबंध अंडरवर्ल्ड से भी रहे। साल 1982 में मान्या सुर्वे माहाराष्ट्र पुलिस से हुई मुठभेड़ में मारा गया।
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राजन महादेव नैयर उर्फ बडा़ राजन जरायम की दुनिया का वो नाम है जिसने अपने घर से ही मुंबई पर राज किया। बड़ा राजन ने अपना ठिकाना चेंबुर के तिलकनगर में ही बना रखा था। बोड़ा राज के संपर्क में जब छोटा राज यानी राजन सदाशिव निखलजे आया तो दोनों ने फिल्मों के टिकट की ब्लैक मार्केटिंग शुरू कर दी। टिकटों की ब्लैकमार्केटिंग से शुरू हुआ अवैध कारोबार का धंधा ड्रग्स तस्करी से लेकर हत्याओं, जबरन वसूली, जुआं और शराब के अड्डों तक पहुंच गया। तस्वीर में आप दाऊद के साथ बड़ा राजन को बैठा हुआ देख सकते हैं। साल 1983 में कोर्ट में पेशी के दौरान बड़ा राजन की हत्या कर दी गई।
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