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यहां रची गई थी 9/11 की साजिश, सामने आईं दुर्लभ तस्वीरें

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अमेरिका पर हुए 9/11 से पहले ओसामा बिन लादेन जिस जगह पर रहता था, वहां की दुर्लभ तस्वीरें सामने आई हैं। बेहद सुनसान जगह पर बने उसके घर की तस्वीरे न्यूयॉर्क में अलकायदा आतंकी खालिद-अल-फव्वाज के मामले में सुनवाई के दौरान पेश की गईं। (तस्वीरें- डेली मेल से)

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ये तस्वीरें, फिलिस्तीन के फोटोग्राफर अब्देल बारी अटवान (Abdel Barri Atwan) ने 1996 में ली थीं, जब उसे लादेन की ओर से बुलाया गया था।
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लादेन ने उसे अपना संदेश सुनाने के लिए बुलाया था, जिसके जरिए वह पश्चिमी देशों को धमकाने की कोशिश कर रहा था।

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9/11 के मास्टरमाइंड ओसामा ने उस समय अंतर्राष्ट्रीय ख्याति बटोरने के लिए अमेरिका के खिलाफ युद्ध की घोषणा कर दी थी।
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अफगानिस्तान एक इलाके में बने घर में ओसामा कई साल तक रहा और यहीं से आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता रहा।
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यहां से बाहर आने-जाने के लिए एक सुरंग बनाई गई थी। घर के चारों ओर आतंकियों का कड़ा पहरा होता था।
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ओसामा अपना संदेश रिकॉर्ड करने से पहले इस्लाम धर्म की किताबों से भरी लाइब्रेरी के सामने बैठता था और वहीं सबकुछ रिकॉर्ड करता था। वह ऐसा इसलिए करता था ताकि लोग उसे बुद्धिमान और जानकार समझें।

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इसी जगह पर ओसामा ने 1997 में पहला टीवी इंटरव्यू दिया था। जिसे सीएनएन के पीटर आर्नेट और पीटर बर्गेन ने लिया था।

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ओसामा यह जताना चाहता था कि वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छाया है और अमेरिका के लिए बड़ा सिरदर्द बन चुका है।

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उसने इस जगह को 1980 में एंटी सोवियत युद्ध के समय खोज निकाला था और यहीं पर बसने का फैसला लिया था। यह करीब 14000 फीट की उंचाई पर पहाड़ों के बीच है।

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इसने इस जगह को इसलिए चुना था क्योंकि यह पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बॉर्डर के पास थी।

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गुफाओं और सुरंगों से निकलने वाले रास्तों के कारण वह इस जगह पर किसी भी तरह के हवाई हमले से भी सुरक्षित था।

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रिपोर्ट के मुताबिक लादेन इन पहाड़ों की चोटियों पर घंटों बिताता था और हमेशा अपने साथ रूस की बनी राइफल रखता था।

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उसके चारों ओर बॉडीगार्ड, आतंकी लड़ाके और बच्चे होते थे। वे सभी हमेशा ठहरने के नए ठिकानों की तलाश में रहते थे। इसमें उसके बेटे भी शामिल होते थे।।

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वह अपने परिवार के लोगों को सुरंग से निकलने वाले रास्तों और छुपने वाली जगहों के बारे में भी आगाह करता रहता था।

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यह जगह ज्यादातर बर्फ से ढकी रहती थी और रोड के जरिए यहां से जलालाबाद जाना आसान था।

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ओसामा से मिलने के दौरान फोटोग्राफर ने घर और उसके आसपास की कई तस्वीरें लीं। यहां ओसामा की पत्नियां भी रहती थीं।

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वह 2001 तक इसी जगह पर बना रहा और यहीं से समय समय पर अपने संदेश जारी करता और धमकी देता रहता।

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11 सितंबर को अमेरिका हमले से कुछ महीने पहले उस पर हमला हुआ तो वह घोड़े पर सवार होकर वहां से भाग निकला और पाकिस्तान पहुंच गया।

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स्थानीय मौलवी और अन्य लोग हमेशा उसकी मदद के लिए तत्पर रहते थे। ओसामा को मारने के लिए लगातार तीन दिन तक उस जगह पर बमबारी की गई लेकिन वह बच गया।

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जानकारों का कहना है कि इस ऑपरेशन में अमेरिका अपनी दूरदर्शिता न दिखा सका और ओसामा को मारने में नाकाम रहा। करीब 10 साल तक ओसामा की खोज में भटकते रहे अमेरिका को 2 मई 2011 में सफलता मिली और अमेरिकी सेना ने बेहद गुप्त ऑपरेशन में पाकिस्तान के एबटाबाद में उसे मार गिराया।

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