आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने एक साल पहले बंधक बनाए गए हजारों लोगों में से 200 को रिहा कर दिया। रिहाई के बाद ये लोग खुली हवा के नीचे मिले तो फूट-फूट कर रो पड़े। (तस्वीरें- डेली मेल से)
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एक साल तक बनाए रखा 'यौन गुलाम', रिहाई पर फूट पड़े आंसू
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आतंकियों ने हजारों महिलाओं को 'सेक्स स्लेव' बनाकर रखा है, जो धार्मिक रूप से पिछड़े तबकों की हैं। यहां महिलाएं और मासूम लड़कियां कैदियों जैसा जीवन जीती हैं, और आतंकी उनका यौन उत्पीड़न करते हैं।
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बीते साल आतंकियों ने करीब 40000 लोगों को बंदूक की नोंक पर अगवा किया था। इनमें से कुछ लोग वहां से भागने में कामयाब रहे जबकि 200 लोगों को आतंकियों ने अब रिहा कर दिया।
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9 साल की एक लड़की जो आतंकियों के चंगुल से आजाद हुई, उसके साथ एक साल तक 10 आतंकियों ने कई बार सामूहिक बलात्कार किया, जिसके चलते वह गर्भवती हो गई।
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लड़कियों और महिलाओं के साथ दरिंदगी करने वाले ज्यादातर आतंकी या तो संगठन के प्रमुख चेहरों में से थे या फिर आत्मघाती हमलावर, जिन्हें लड़कियां तोहफे के तौर पर दी जाती थीं।
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लड़की की देखभाल कर रहे यूसिफ दाऊद ने कहा कि वह गर्भवती है और अगर उसने बच्चे को जन्म दिया तो उसकी जिंदगी भी खतरे में पड़ जाएगी। लगातार यौन उत्पीड़न और टॉर्चर के चलते वह अपना मानसिक संतुलन खो बैठी है।
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आतंकियों के चंगुल से रिहा हुए 215 अन्य लोगों ने कहा कि उन्होंने जीने की उम्मीद छोड़ दी थी। उन्हें लगता था कि आतंकी उनकी हत्या कर देंगे लेकिन वह बच गए। उन्हें के मिनी बस में भरकर छोड़ा गया था।
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आतंकियों की जेल से आजाद हुए उन सभी लोगों के जिस्म में उत्पीड़न के निशान साफ देखे जा सकते हैं। आतंकियों ने इन लोगों को क्यों रिहा किया है, इसके पीछे भी कोई वजह नहीं पता चल सकी है।
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सेना ने इन सभी को एंबुलेंस के जरिए इलाज के लिए भेजा है। एक महिला ने अपनी कहानी बयां करते हुए कहा कि उसने अपने बच्चों को किसी तरह वहां से फरार होने के लिए उकसाया था और वो भाग निकले थे।
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लोगों ने बताया कि इस्लामिक स्टेट ज्यादातर महिलाओं को अगवा करके बंधक बनाता है और फिर उनका सामूहिक यौन उत्पीड़न होता है। यूएन ने भी अपनी रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया है कि आतंकी संगठन पिछले तबकों की महिलाओं का यौन उत्पीड़न कर रहा है।