फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक दूसरे का मांस तक खाते हैं जेल के कैदी, जानिए सलाखों के पीछे का सच

विज्ञापन
1 of 8
कहते हैं वेनेजुएला के ला साबानेटा जेल के अंदर लोगों के मरने की आशंका ज्यादा रहती है बजाए सड़कों पर मरने की। यहां जगह से ज्यादा कैदी रहते हैं, सुविधाओं के लिए पैसे नहीं मिलते और देखरेख के लिए लोग भी कम हैं। कैदियों के गैंग ही हुक्म चलाते हैं और रेप तो जैसे यहं आम बात होती हैं। 2013 में एक रेड पड़ी तो यहां से कई हथियार और कोकेन बरामद हुए थे।

विज्ञापन

एक दूसरे का मांस तक खाते हैं जेल के कैदी, जानिए सलाखों के पीछे का सच

2 of 8
रूस का व्लादिमिर सेंट्रल जेल तो बिमारियों का भंडार है। इस जेल में जरूरत से ज्यादा कैदी रहते हैं। यहां के गार्ड कैदियों को जबरन उनके कमरे से बाहर लाते हैं। दीवार पर हाथ रख तक उन्हें बुरी तरह पीटते हैं। हालत यह हो जाती है कि पीटने के बाद उन्हें जमीन पर घसीटते हुए वापस कमरे तक ले जाना पड़ता है। यही नहीं, कैदियों को एक दूसरे को भी मारने को कहा जाता है।
विज्ञापन

एक दूसरे का मांस तक खाते हैं जेल के कैदी, जानिए सलाखों के पीछे का सच

3 of 8
बैंग क्वांग जेल, थाईलैंड में अपनी सजा के शुरुआती तीन महीनों में कैदियों को बेड़ियों में रहना होता है। मौत की सजा का इंतजार कर रहे कैदियों को लोहे की हथकड़ियां पहनाई जाती हैं जो उनके पैरों को भी बांध कर रखती हैं। यहां कम से कम सजा 25 साल की है। खाने में सिर्फ एक बार एक कटोरी चावल और सब्जी मिलती है। इस कारण कैदी कुपोषण और बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। जेल में पानी की भी सुविधा बेकार है।

एक दूसरे का मांस तक खाते हैं जेल के कैदी, जानिए सलाखों के पीछे का सच

4 of 8
राइकर्स आईलैंड न्यू यॉर्क में 10 जेल हैं जहां लगभग 12 से 17 हजार कैदी रहते हैं। यहां जेल के अंदर भी कैदियों के साथ जेल के गार्ड और दूसरे कैदी रेप और मर्डर तक कर देते हैं। यहां कैदियों के मनोरंजन के लिए 'फाईट क्लब' होता है जिसमें कैदी आपस में लड़ते हैं और कई बार तो किसी न किसी की मौत भी हो जाती है।

विज्ञापन

एक दूसरे का मांस तक खाते हैं जेल के कैदी, जानिए सलाखों के पीछे का सच

5 of 8
पेटक आईलैंड जेल, रूस में हर कैदी को दिन मे 20 घंटे तक अकेले कालकोठरी में रखा जाता है जहां टायलेट तक की सुविधा नहीं होती। कैदियों को साल में सिर्फ 2 दिन ही अपनों से मिलने दिया जाता है। सुविधाओं की कमी और अकेलेपन के शिकार हो चुके कई कैदी सजा पूरी होने से पहले ही या तो पागल हो चुके होते हैं या मर जाते हैं।
विज्ञापन

एक दूसरे का मांस तक खाते हैं जेल के कैदी, जानिए सलाखों के पीछे का सच

6 of 8
गितारामा सेंट्रल जेल, रवांडा में जरा सी जगह में चार कैदियों को साथ ही सोना, जगना, खाना, पीना और जैसे तैसे रहना होता है। 400 लोगों के लिए बने इस जेल में 7000 से ज्यादा कैदी रहते हैं। इनके ऊपर छत तक नहीं होती और चाहे कैसा भी मौसम हो, इन्हें ऐसे ही रहना होता है। 1990 में यहां हुए जनसंहार में भी कई वक्त तक, लाशे भी यहीं पड़ी रही थीं। कैदी धुएं और मांस के सड़ाव की गंध के बीच यहां रहे थे। यहां तक कि भूख से तड़प रहे कैदी एक दूसरे का ही मांस खाने को मजबूर हो गए थे।
विज्ञापन

एक दूसरे का मांस तक खाते हैं जेल के कैदी, जानिए सलाखों के पीछे का सच

7 of 8
तुर्की का दियारबाकिर जेल 1980 में बना था। यहां सालों से खूनखराबा होता आ रहा है। कई कैदियों पर इतना अत्याचार किया गया कि इससे बचने के लिए उन्होंने खुद को ही आग लगा ली।
विज्ञापन

एक दूसरे का मांस तक खाते हैं जेल के कैदी, जानिए सलाखों के पीछे का सच

8 of 8
ला सांटे जेल, पेरिस 1867 में शुरू हुआ। इस जेल में दूसरे विश्व युद्ध के दौरान भी कई कैदियों को रखा गया था और उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया था। यहां इतनी कड़ी चौकसी रहती है कि आज तक केवल तीन ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें कैदी जेल से भाग पाने में सफल हुए हों।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें