बिहार के ईस्ट चंपारण में बनने वाले दुनिया के सबसे बड़े मंदिर पर निर्माण से पहले ही बड़ी मुसीबत आ गई है। बनने से पहले ही देश दुनिया की चर्चा बटोर चुका है यह मंदिर अपने खास मॉडल को लेकर काफी चर्चा में है।
विज्ञापन
बिहार में बन रहे भव्य मंदिर का कंबोडिया कर रहा विरोध
2 of 9
कुछ दिन पहले मंदिर इस लिए चर्चाओं में आया था कि 200 एकड़ भूमि पर बनने वाले इस मंदिर के निर्माण के लिए मुस्लिम परिवारों ने अपनी जमीन दान में देने का सराहनीय फैसला किया था।
विज्ञापन
बिहार में बन रहे भव्य मंदिर का कंबोडिया कर रहा विरोध
3 of 9
लगभग 500 करोड़ की लागत से बनने वाले इस मंदिर का मॉडल काफी कुछ कंबोडिया के विश्व प्रसिद्ध अंगकोरवाट मंदिर की तर्ज पर बताया जा रहा है। पूर्व में इसका नाम भी रामायण अंगकोरवाट मंदिर रखा गया था।
बिहार में बन रहे भव्य मंदिर का कंबोडिया कर रहा विरोध
4 of 9
बाद में इसे बदल दिया गया था। लेकिन अब इस मंदिर पर फिर नया संकट खड़ा हो गया है। असल में कंबोडिया सरकार ने अपनी विश्व प्रसिद्ध धरोहर को सहेजने के मकसद से भारत में बन रहे इस मंदिर के निर्माण पर आपत्ति जता दी है।
विज्ञापन
बिहार में बन रहे भव्य मंदिर का कंबोडिया कर रहा विरोध
5 of 9
भारत में बनने वाले इस मंदिर को लेकर काफी उत्सुकता जताई जा रही थी। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इसमें काफी दिलचस्पी ले रहे थे।
विज्ञापन
बिहार में बन रहे भव्य मंदिर का कंबोडिया कर रहा विरोध
6 of 9
लेकिन अब कंबोडिया सरकार ने इसके डिजायन पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इसकी डिजायन हुबहू 12वीं शताब्दी में बने अंगकोरवाट मंदिर की नकल है। इसलिए इसका डिजायन बदला जाए।
विज्ञापन
बिहार में बन रहे भव्य मंदिर का कंबोडिया कर रहा विरोध
7 of 9
असल में कंबोडिया सरकार को डर है कि अगर भारत में भी लगभग वैसे ही मंदिर का निर्माण हो गया तो फिर उनके यहां हर साल मंदिर के दर्शन को आने वाले लाखों पर्यटकों की संख्या में कमी आ जाएगी।
बिहार में बन रहे भव्य मंदिर का कंबोडिया कर रहा विरोध
8 of 9
इसलिए कंबोडिया नहीं चाहता कि उनके जैसे मंदिर का कोई बड़ा अक्स कहीं ओर बने। यही कारण है कि कंबोडिया के कार्यवाहक राजदूत हुन हैन ने बीते रविवार को बिहार के ईस्ट चंपारण के केसरिया में बनने वाले इस मंदिर के प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया।
बिहार में बन रहे भव्य मंदिर का कंबोडिया कर रहा विरोध
9 of 9
निरीक्षण के बाद पत्रकारों से बात करते हुए हैन ने कहा कि कंबोडिया सरकार ने भारतीय मीडिया में इस मंदिर पर आई खबरों के बाद इस मुद्दे को गंभीरता से लिया है। उन्होंने बताया कि पूर्व में भी साल 2012 में जब इस मंदिर के निर्माण की बात उठी थी तब भी अंगकोरवाट मंदिर से मिलती जुलती इसकी प्रतिकृति पर आपत्ति जताई गई थी। उस समय बिहार के मुख्य सचिव ने इस संबंध में लिखित आश्वासन दिया था कि यह मंदिर अंगकोरवाट मंदिर की शक्ल पर नहीं होगा।