मांझी की पार्टी हम के प्रदेश अध्यक्ष शकुनी चौधरी की राजनीतिक रणभूमि होने के कारण तारापुर सीट चर्चाओं में है। शकुनी यहां से कई बार विधायक रह चुके हैं। इस बार उनके सामने मैदान में हैं सबौर कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और जेडीयू उम्मीदवार मेवालाल। 1985 से 1998 तक विधायक रहे 70 साल के शकुनी चौधरी का मुकाबला जिन मेवालाल से है उनकी पत्नी पिछले चुनावों में उन्हें शिकस्त दे चुकी हैं।
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बिहारः पहले चरण में इनकी किस्मत पर लगी सबकी निगाहें
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भागलपुर की कहलगांव सीट से कांग्रेस के सदानंद सिंह लगातार आठ चुनाव जीत चुके हैं। उनके जलवे का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 1969 से इस सीट पर जीत दर्ज करते आ रहे सदानंद नौंवी बार फिर कांग्रेस के बैनर तले चुनाव मैदान में हैं। इस बार उनका मुकाबला राजग गठबंधन में सहयोगी लोक जनशक्ति पार्टी के नीरज मंडल से है।
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खगड़िया जिले की अलौली विधानसभा सीट पर इस बार सबकी निगाहें जमी हुई हैं। कारण, केन्द्रीय मंत्री राम विलास पासवान के छोटे भाई पशुपति पारस इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका मुकाबला है राष्ट्रीय जनता दल के चंदनराम से। पारस यहां से सात बार विधायक रहे हैं, लेकिन पिछले चुनाव में जेडीयू के नए नवेले चेहरे रामचंद्र सदा ने उन्हें लगभग 17 हजार वोटों से मात दे दी थी।
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जमुई सीट एनडीए गठबंधन के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुकी है। भाजपा ने यहां से पूर्व मंत्री नरेन्द्र सिंह के बेटे अजय प्रताप को मैदान में उतारा है। राजद के विजय प्रताप सिंह उन्हें टक्कर दे रहे हैं। दिलचस्प बात ये है कि अजय प्रताप पिछली बार जेडीयू के टिकट पर जीते थे तो अब वह जीतन राम मांझी के हिंदुस्तान अवाम मोर्चा में हैं। इस बार वह हम की ओर से भाजपा के निशान पर चुनाव लड़ रहे हैं।
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भागलपुर वैसे भाजपा की पारंपरिक सीट मानी जाती है लेकिन बीते लोकसभा चुनावों में भाजपा के शाहनवाज हुसैन को यहां से हार का मुंह देखना पड़ा था। इस बार के चुनावों में भाजपा ने वरिष्ठ नेता और सांसद अश्विनी चौबे के पुत्र अर्जित शास्वत को यहां से टिकट दिया है तो उनके सामने हैं कांग्रेस के अजीत शर्मा। एक युवा नेता के तौर पर हर किसी की निगहों अर्जित पर टिकी हुई हैं।
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भागलपुर सीट पर अर्जित सारस्वत के सामने है कांग्रेस उम्मीदवार अजित शर्मा। इस सीट पर इसलिए भी सबकी निगाहें जमी हुई हैं क्योंकि लोकसभा चुनाव में अर्जित के पिता अश्वनी चौबे सांसद चुने गए। उपचुनाव हुआ तो पार्टी अपनी सीट नहीं बचा सकी और अजीत शर्मा ने भाजपा उम्मीदवार को शिकस्त देकर यह सीट छीन ली।
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पहले चरण में रेणु कुशवाहा अकेली महिला उम्मीदवार हैं जिन पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। वह समस्तीपुर की निवर्तमान विधायक हैं। पूर्व में जेडीयू से चुनाव लड़ने वाली रेणु ने हाल ही में नीतीश का दामन छोड़कर भाजपा की सदस्यता ले ली। पार्टी ने भी उन्हें समस्तीपुर से टिकट देकर उन पर विश्वास जताया।