ऐसी कौन सी चीजें थी जिन्होंने 2015 में अपने पांव देश में ऐसे जमाए कि हर आम और खास उनकी चर्चा करता नजर आया? ये विषय सोशल मीडिया पर भी छाए रहे।
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साल 2015 में खूब छाए रहे ये 15 मुद्दे, जानें वजह
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असहिष्णुतासबसे पहले इस लिस्ट में नाम आता है 'असहिष्णुता'। ये शब्द ऐसा छाया कि हर किसी ने इसके बारे में बात की। इस साल सितंबर के महीने में उत्तर प्रदेश में दादरी के पास बिसाहड़ा गांव में देर रात लोगों के हुजूम ने एक मुसलमान, मोहम्मद अखलाक को गोमांस खाने की अफवाह पर मार डाला। इस मामले ने देश में असहिष्णुता को लेकर बहस छेड़ दी। लोगों में बढ़ती असहिष्णुता का असर साहित्यकारों पर भी दिखा और उन्होंने अपना विरोध दर्ज करवाते हुए अवार्ड-वापसी भी शुरू कर दी। दोनों सदनों से लेकर सोशल मीडिया, हर जगह 'असहिष्णुता' ही छाया रहा।
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भक्तदूसरा नाम जो लोगों के जिंदगियों में सिर चढ़ कर बोला वो था 'भक्त'। सोशल मीडिया में #bhakt शब्द तब वायरल हुआ जब हिंदुत्व के पक्ष में बोलने वाले आक्रामक फैंस ने सोशल मीडिया पर ही भारतीय जनता पार्टी और खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सच्चे सपोर्टर बनकर दिखे। इसके बाद से तो लोगों ने भक्त शब्द को इतना भुनाया कि आम जिंदगी में भी किसी को किसी का मुरीद होने की वजह से भक्त करार दे दिया।
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क्रिकेट में पिंक बॉलक्रिकेट में नए प्रयोग के लिए साल 2015 को भी याद किया जाएगा। कई सालों की मशक्कत के बाद 138 साल पुराने टेस्ट इतिहास में पहली बार रेड बॉल (लाल गेंद) की जगह पिंक बॉल का प्रयोग शुरू किया गया। पिंक बॉल के जरिए 27 नवंबर को पहला टेस्ट मैच एडिलेड में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया। पहला पिंक बॉल खेलने का श्रेय मिला न्यूजीलैंड के मार्टिन गुप्टिल को।
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दिन-रात का टेस्ट मैचपिंक बॉल के साथ-साथ क्रिकेट के सबसे पुराने प्रारूप टेस्ट की लोकप्रियता बनाए रखने के लिए आईसीसी ने 2015 में एक और नया प्रयोग किया। वनडे और टी-20 के बाद पहली बार कोई टेस्ट मैच दूधिया रोशनी यानी दिन-रात में खेला गया। पिंक बॉल के साथ-साथ दूधिया रोशनी से टेस्ट को देखने के लिए हजारों की संख्या में दर्शक स्टेडियम पहुंचे।
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लाइफाईएक ऐसी तकनीक जिसके बारे में लोगों ने जानने के बारे में खासी रूचि दिखाई वो था लाइफाई। ना तो ये शब्द नया है और ना ही ये आविष्कार। असल में लाईफाई का पूरा नाम है लाइट फिडेलिटी। इंटरनेट के इस्तेमाल को ये तकनीक एकदम बदल डालेगी। ये एक वायरलेस तकनीक होगी जिसमें लाइट की मदद से इंटरनेट को चलाया जा सकेगा। इसका सफल परीक्षण एक एलईडी लाइट से किया भी गया। इस तकनीक ने जैसे नाम से और अभी से ही सबको दीवाना बना लिया है।
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डबस्मैशअब बात करें एक ऐसे मजेदार ट्विस्ट की जिसने सबको मजे दिए। इस साल सोशल मीडिया पर डबस्मैश का चलन जोरों पर देखा गया। इस चलन को एक्टरों ने खूब हवा दी। उन्होंने पुराने गानों से लेकर फिल्मों के डायलॉग्स तक को एक्ट करके कुछ सेकेंड्स के फनी वीडियो में बनाया और अपलोड किया। एक-एक कर ये ट्रेंड लगभग हर एक्टर के सिर चढ़कर बोला। बाद में लोगों ने अपने मजे के लिए खुद के डबस्मैश भी बनाए।
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इवन ऑडबढ़ते ट्रैफिक और प्रदूषण के लेवेल को देखते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 1 जनवरी, 2015 से दिल्ली की सड़कों पर एक दिन ईवन (सम) और दूसरे दिन ऑड (विषम) नंबर की गाड़ियों को ही चलने देने का फैसला लिया है। इसे उन्होंने एक प्रयोग के तौर पर लाया है। उन्होंने साफ किया है कि प्रयोग के विफल होने पर वो इसे वापस ले लेंगे। इस ईवन-ऑड के फेरे ने भी खूब बातें बटोरीं। सोशल मीडिया पर तो कई तरह के मेम्स भी दिखाई दिए।
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संस्कारी जेम्स बॉन्डजी हां, संस्कारी जेम्स बॉन्ड एक ऐसा विषय रहा जिसके सबने मजे लिए। जब से सेंसर बोर्ड ने जेम्स बॉन्ड की लेटेस्ट सीरीज स्पेक्टर को भारत में प्रदर्शित करने से पहले फिल्म में फिल्माए गए एक किसिंग सीन के शॉट के वक्त को काटा और फिर सीन का नाममात्र ही रहने दिया, फिर #sanskarijamesbondचर्चा में आ गए। बॉन्ड सीरीज को जितना उसकी स्टोरी प्लॉट के लिए जाना जाता है उतना ही उनके किरदारों को उनके काम के लिए। बॉन्ड गर्ल के साथ विदेशी फिल्म होते हुए भी छोटा सी किसिंग सीन के होने पर लोगों ने खूब मजाक बनाया। कहना था कि जेम्स बॉन्ड संस्कारी हो चला है।
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नेट न्यूट्रैलिटीएक गंभीर चीज जो लोगों के बीच आई और इसपर लोगों ने अपनी जमकर प्रतिक्रियाएं दी, उसमें से नेट न्यूट्रैलिटी इस साल का एक मुद्दा था। दरअसल, इसका अर्थ है मोबाइल पर बगैर भेदभाव के इंटरनेट आधारित सेवा देना। इसका मतलब था कि इंटनेटसेवा प्रदान करने वाली कंपनियां इंटरेनट कंटेंट के बीच किसी तरह का भेदभाव ना करें और अलग-अलग साइटों या सेवाओं के लिए विभिन्न तरह के चार्ज ना लें। ये उपभोक्ता पर होना चाहिए कि वो क्या देखे और सभी तरह के कंटेंट के लिए एक जैसा ही चार्ज दे।
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फेसबुक डीपी फिल्टर चेंजसोशल मीडिया पर एक नए तरह के सहानुभूति दिखाने के तरीके ने पूरे विश्वभर में खूब प्रचलन हासिल किया। ये काम शुरू हुआ जब फेसबुक के फाउंडर मार्क जुकरबर्ग ने पेरिस अटैक में मारे गए आम लोगों के प्रति अपनी सहानुभूति और साथ साबित करने के लिए अपने फेसबुक प्रोफाइल पिक्चर को फ्रांस के झंडे के रंग में रंग लिया। इसके बाद फेसबुक ने बाकी लोगों से भी ऐसा करने की राय रखी, जो सहानुभूति दिखाने में इच्छित हों। बस फिर क्या था, मार्क के ऐसा करते ही लोगों ने अपने डीपी फिल्टर्स भी बदल डाले।
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चेन्नई फ्लडक्या इस साल से पहले आपने कभी भी सुना था कि तमिलनाडु के चेन्नई में इतनी बारिश हुई को घरों के घर डूब जाएं? सड़क दिखना बंद हो जाएं? गलियां नदी हो जाएं और इसकी वजह से लोग बेघर भी हो जाएं? इस साल चेन्नई के बाढ़ ने जैसे पूरे देश को हिलाया। अब इसे खराब मैनेजमेंट कहें या फिर कुछ और, लेकिन पानी के बढ़े हुए स्तर ने अधिक बारिश को प्राकृतिक आपदा बना दिया और कई लोगों की जानें ले गया।
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कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा?कमाई का मामला हो या फिर चर्चा का, या फिर सेट्स या कहानी का, बाहुबली फिल्म का नशा तो देशभर के सिर चढ़कर बोला। इस दक्षिण फिल्म को हिंदी में भी रिलीज किया गया। स्टोरी लाइन और उसे पेश करने का अंदाज इतना आकर्षक था कि फिल्म को एक ऐसे मोड़ पर छोड़ा गया जिसकी किसी ने उम्मीद भी नहीं की होगी। इसके बाद तो थियेटर्स से निकलने वाला दिन है और आज का दिन है, लोगों में बस यही सवाल कौंध रहा है कि आखिर 'कटप्पा ने बाहुबली को क्यों मारा'?फिल्म के दूसरे इंस्टॉलमेंट का लोग तेजी से इंतजार कर रहे हैं।
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पीरियड्स डिबेटअब जरा बात कर लें उस चीज की जो भारतीय समाज में एक टैबू है। पीरियड्स। एक ऐसी चीज जो जितनी महिलाओं में बायोलॉजिकल है उतना ही इसके बारे में लोग खुलकर बात करने में दबते हैं। लेकिन ये साल रहा औरतों के नाम जहां महिलाओं ने जमकर पीरियड्स से जुड़े हर टैबू को तोड़ा। इस विषय पर एक लड़की की तस्वीर सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई जिसे उसने खुद ही डाला था। तस्वीर में वो सोई हुई है और उसे पैंट में खून का ब्लॉट है। वो इसको लोगों के साथ शेयर करके पीरियड्स से जुड़े समाज में टैबू को तोड़ना चाहती थी। वहीं एक दूसरी छात्रा ने अपने युनिवर्सिटी के मैराथॉन में पीरियड्स में होने के बावजूद बगैर पैड के ही दौड़ी। खुद भारत में में केरल में हैपी टू ब्लीड नाम का कैपेंन चला जिसमें औरतों ने नैपकिंस और बोर्ड पर हैपी टू ब्लीड लिखकर ट्विटर पर शेयर किया।
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ट्रांसजेंडर बड़े पदों परये साल को आप ट्रांसजेंडरों की वजह से भी याद करेंगे। इस साल पदमिनी प्रकाश देश की पहली ट्रांसजेंडर एंकर बनी और देश को गर्व महससू कराया। वो तमिलनाडु से हैं और वहां के लोटस टीवी नाम के क्षेत्रिय चैनल में एंकर बनी। वहीं दूसरी और के प्रतिका यशीनी तमिलमाडु युनिफॉर्म्ड सर्विसेज रेक्रूमेंट बोर्ड की तरफ पहली ट्रांसजेंडर सब-इंस्पेक्टर बनी।
ट्वीट पर कार्रवाईइसी साल एक और ट्रेंड देखा गया। वो था सरकार की लोगों की ओर से की गई ट्वीट पर तुरंत कार्रवाई। कहना गलत नहीं होगा कि सोशल मीडिया लोगों की जुबान बनकर उभरा और सोशल प्लैटफॉर्म पर चीजें रखने की वजह से सरकार को फौरन ही एक्शन लेने पर मजबूर होना पड़ा। जैसा कि रेलवे मंत्री सुरेश प्रभु ने उस महिला पैसेंजर तक तुरंत मदद पहुंचाई जिसने ट्वीट किया कि वो कोच में अकेली महिला यात्री है और साथ में बैठा पुरूष यात्री उसे परेशान कर रहा है। ऐसे में उसतक मदद फटाफट पहुंची। ऐसे ही कई मामले और हैं।