ये जगहें कभी जन्नत सरीखी थी लेकिन हमने और आपने इन्हें जहरीला बना दिया कि यहां रहना खतरे से खाली नहीं।
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दुनिया के सबसे जहरीले स्थान, भारत की नदी भी शामिल
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चीन का लिनफेन दुनिया का सबसे जहरीला शहर है। इसे जहन्नुम कहा जाए तो अतिश्योक्ति नहीं होगा। इस शहर में प्रदूषण का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि सफेद कपड़े पहनने पर कुछ ही देर में कपड़े काले हो जाते हैं।
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प्रशांत महासागर में ग्रेट पेसिफिक गैराज पैच टापू दूसरे नंबर पर सबसे जहरीला स्थान है। इस टापू पर ज्यादातर प्लास्टिक का कचरा है। ये टापू अमेरिका के टेक्सास से दोगुना बड़ा है।
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ब्राजील के रोनडोनिया में बहने वाली अमेजन नदी के आस-पास की हजारों एकड़ जमीन तीसरी सबसे प्रदूषित जगह है। एक समय ये जगह हरी-भरी हुआ करती थी। यहां के वर्षोवन की हरियाली देखते ही बनती थी। लेकिन हजारों पेड़ काटकर जलाने से हराभरा स्थान प्रदूषण वाले श्मशान में तब्दील हो चुका है।
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आपको जानकर ताज्जुव होगा कि प्राचीन समय से लोगों की आस्था का केंद्र रही और पौराणिक मान्यता रखने वाली यमुना नदी आज इतनी प्रदूषित हो चुकी है कि दुनिया के सबसे जहरीले स्थानों में शुमार हो चुकी है। हालांकि सरकारें हमेशा से यमुना को साफ करने के दावे और वादे करती आ रही हैं लेकिन हकीकत यही है कि रोजाना करीब हजारों एमएलडी (मेगा लिटर पर डे) की मात्रा में कचरा यमुना में बहाया जाता है।
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पेरू के ला ओरोया में सीसा प्रदूषण का स्तर इतना है कि यहां रह रहे बच्चों की रक्त धमिनियों तक में सीसा मिल जाता है। सीसा प्रदूषण के लिए यहां की अमेरिकन कंपनी डू रन को जिम्मेदार बताया जाता है।
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न्यूक्लियर कचरा डंप करने की वजह से रूस की कराचय झील का रेडिएशन इतना बड़ गया है कि घंटे भर में भी किसी भी शख्स को अस्पताल जाना पड़ जाए। इस इलाके के कामगार सबसे ज्यादा कैंसर से पीड़ित होते हैं। यही नहीं इस इलाके के आस-पास में जन्म लेने वाले ज्यादातर बच्चे लेकिमिया (एक प्रकार की बीमारी) से प्रभावित होते हैं।
इंसान ने धरती को ही जहरीला नहीं बनाया है, अब ये दायरा अंतरिक्ष तक पहुंच चुका है। करीब 4 लाख पाउंड वजनी अंतरिक्ष कचरा (सेटेलाइट, और तमाम अंतरिक्ष यान) अंतरिक्ष को प्रदूषित कर रहा है।