सोनागाछी, कहने को तो सोने का पेड लेकिन इस सोने के पेड़ पर कितनी जिंदा लाशें लटकी हुई हैं, आप अंदाजा भी नहीं लगा सकते।
विज्ञापन
न जानें कितनी जिंदा लाशें हैं इस 'सोने के पेड़' पर
2 of 13
सोनागाछी, जिन्होंने सुन रखा होगा उन्हें पता होगा कि हम किस नरक की बात कर रहे हैं लेकिन जिन्हें नहीं पता उन्हें बता दें कि ये एशिया का सबसे बड़ा रेड लाइट एरिया है।
विज्ञापन
न जानें कितनी जिंदा लाशें हैं इस 'सोने के पेड़' पर
3 of 13
इस स्लम में 18 साल से कम उम्र की करीब 12 हजार लड़कियां सेक्स व्यापार में शामिल हैं।
न जानें कितनी जिंदा लाशें हैं इस 'सोने के पेड़' पर
4 of 13
फोटोग्राफर सौविद दत्ता हाल ही में यहां गए और उन्होंने वहां की कुछ बेहद चुनिंदा दृश्यों को अपने कैमरे में कैद किया है।
विज्ञापन
न जानें कितनी जिंदा लाशें हैं इस 'सोने के पेड़' पर
5 of 13
इन तस्वीरों को उन्होंने श्रेणीबद्घ किया है और The Price of a Child नाम दिया है।
विज्ञापन
न जानें कितनी जिंदा लाशें हैं इस 'सोने के पेड़' पर
6 of 13
कोलकाता के इस रेडलाइट एरिया को विषय बनाकर एक फिल्म भी बनी है। Born Into Brothels नाम की इस फिल्म को ऑस्कर सम्मान भी मिल चुका है।
विज्ञापन
न जानें कितनी जिंदा लाशें हैं इस 'सोने के पेड़' पर
7 of 13
जिस उम्र में हमारी मां हमें दुनिया की रीति-रिवाज, लाज-शरम सिखाती हैं वहीं यहां कि बच्चियां खुद को बेचना सीखती हैं।
न जानें कितनी जिंदा लाशें हैं इस 'सोने के पेड़' पर
8 of 13
ये लड़कियां मर्दों के साथ सोना सीख जाती हैं। उन्हें खुश करना सीख जाती हैं, जिसके बदले उन्हें दो डॉलर यानि 124 रुपए मिलते हैं।
न जानें कितनी जिंदा लाशें हैं इस 'सोने के पेड़' पर
9 of 13
यहां की ज्यादातर लड़कियां स्कूल छोड़ चुकी हैं। अब यही उनकी दुनिया है। परिवार का पेट पालने के लिए ये करना उनकी मजबूरी है।
न जानें कितनी जिंदा लाशें हैं इस 'सोने के पेड़' पर
10 of 13
ये सारा धंधा कई गैंग आपस में मिलकर चलाते हैं। वो ही इस पूरे स्लम को संचालित करते हैं।
न जानें कितनी जिंदा लाशें हैं इस 'सोने के पेड़' पर
11 of 13
ये एक गैर-कानूनी स्लम है। दत्ता के अनुसार, ये सब भ्रष्टाचार और गरीबी की वजह से है।
न जानें कितनी जिंदा लाशें हैं इस 'सोने के पेड़' पर
12 of 13
उन्हें उम्मीद है कि उनके इस प्रयास से हालात में कुछ सुधार आएगा।
न जानें कितनी जिंदा लाशें हैं इस 'सोने के पेड़' पर
13 of 13
ये कहने में कोई हर्ज नहीं जहां एक ओर हम महिला सशक्तिकरण की बात कर रहे हैं वहीं हमारे देश में ऐसी जगहें भी हैं जहां औरतें और बच्चियां ऐसा काम करने को मजबूर हैं।(www.dailymail.co.uk)