नहीं रहा 'पेड़' बन चुका आदमी, तस्वीरें देख सकें तो बढ़ें आगे
Thu, 04 Feb 2016 12:52 PM IST
उसका शरीर इतना अजीबोगरीब था कि देखकर किसी को भी लगे कि वो तेजी से पेड़ बनता जा रहा है। लाइलाज बीमारी होने की वजह से उसने दम तोड़ ही दिया।
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देदे कोसवारा की उम्र 42 साल थी। वो इंडोनेशिया के बदॉन्ग से थे। सभी तस्वीरें डेली मेल और मिरर से।
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लोग उन्हें ओरिजन ट्रीमैन के नाम से भी जानते हैं। लेकिन लाइलाज बीमारी ने उनकी जान ले ली।
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देदे जितना भी जिए इसी उम्मीद में रहे कि उनका इलाज कहीं मुमकिन हो पाएगा, पर ऐसा नहीं हो सका।
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वो असल में लीवैनडोस्की लुट्ज डिस्प्लासिया सिंड्रोम से ग्रसित थे। इस बीमारी में बदन पर कंट्रोल ना किए जा सकने वाले इंफेक्शन और चक्कते हो जाते हैं।
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फिर ये चक्कते कुछ यूं बढ़ते हैं कि बाद में वो किसी पेड़ की छाल से दिखने लगते हैं। चमड़ी इनके अंद या तो कहीं छुप जाती है या तो कहीं खत्म हो जाती है।
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ऐसे मामले विश्व में दुर्लभ ही हैं पर हैं। इस बीमारी को कोई ठोस इलाज अभी तक तो मुमकिन नहीं हो सका है।
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देदे की एक पत्नी और एक बच्चा भी था। उनकी पत्नी ने उन्हें दस साल पहले ही छोड़ दिया जब वो परिवार को संभालने में असमर्थ हो गए थे।
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लेकिन अजीबोगरीब बदन की वजह से उन्हें कोई आगे पार्टनर नहीं मिल सका। उनका जीवन जैसे अकेलेपन और तनाव का शिकार था।
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उनका सपना बढ़ई बनने का था। लेकिन जैसे ही उनके हाथ-पैर इस बीमारी की वजह से काम करने लायक नहीं बचे और कुछ और हो गए, तभी से उनका ये सपना भी टूट गया।
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देदे के पास इतने रुपए भी नहीं थे कि वो बेहतर इलाज करवा सकें। उनके पास बैठने के अलावा कोई काम नहीं रहता था।
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बैठने की आदत की वजह से उन्हें धूम्रपान करने की आदत लग गई। वो कई अन्य बीमारियों के भी शिकार थे।
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उन्हें हेपटाइटिस, लिवर और गैस्ट्रिक डिसऑर्डर भी थे। उनके बदन से भारी-भरकम इंफेक्शन को हटाने के लिए दो बार सर्जरी भी गई थी।
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लेकिन छह किलो तक पेड़ की छाल नुमा इंफेक्शन को निकालने के बाद भी वो फिर से बढ़ आए।
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उनकी बहन बताती हैं कि वो इतने कमजोर हो गए थे कि बहुत कम बोल पाते थे।
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लेकिन इलाज का उनके बदन पर कोई असर नहीं हुआ। वो लगातार बीमार और इस डिसऑर्ड से परेशान ही रहे।
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उनकी कहानी वाकई दर्दनाक थी।